सुप्रीम कोर्ट ने कहा- RTI एक्टिविज़्म अब बिज़नेस बन गया
सुप्रीम कोर्ट ने RTI कार्यकर्ता राकेश बेहल और उनके सहयोगी की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी। दोनों पर पंजाब के गुरदासपुर में रोड निर्माण में बाधा डालने और मज़दूरों को डराने-धमकाने का आरोप है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को RTI कार्यकर्ता राकेश बेहल और उनके सहयोगी राजीव कुमार की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी। दोनों पर पंजाब के गुरदासपुर में रोड निर्माण कार्य में बाधा डालने और मज़दूरों को धमकाने का आरोप है। FIR के मुताबिक, दोनों ने निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे लोगों को धमकाया।
जस्टिसंदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पूछा, "आप कौन हैं जो इन रास्तों के निर्माण की निगरानी कर रहे हैं? आपको ये अधिकार किसने दिए?" इससे पहले, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी 14 मई को उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान RTI एक्टिविज़्म के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि RTI का मकसद पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार को उजागर करना है, लेकिन हाल के दिनों में इसका इस्तेमाल अधिकारियों को डराने और ब्लैकमेल करने के लिए किया जा रहा है। जस्टिस बिश्नोई ने कहा, "RTI एक्टिविज़्म अब एक बिज़नेस बन गया है।"
गौरतलब है कि RTI एक्ट 2005 में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने इशारा किया कि कुछ लोग इस कानून का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे इसके असली मकसद पर सवाल उठ रहे हैं।
इस फैसले से RTI कार्यकर्ताओं के बीच हलचल मच गई है। कई लोग इसे न्यायपालिका का सख्त रुख मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे ईमानदार कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है। वहीं, कोर्ट ने साफ किया कि कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त कदम उठाना ज़रूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सुप्रीम कोर्ट ने RTI कार्यकर्ता राकेश बेहल की ज़मानत याचिका क्यों खारिज की?
राकेश बेहल और उनके सहयोगी राजीव कुमार पर पंजाब के गुरदासपुर में सड़क निर्माण कार्य में बाधा डालने और मज़दूरों को धमकाने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पूछा कि उन्हें निर्माण कार्य की निगरानी करने का अधिकार किसने दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने RTI एक्टिविज़्म के बारे में क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि RTI एक्टिविज़्म अब एक बिज़नेस बन गया है। जस्टिस विजय बिश्नोई का कहना था कि RTI का असली मकसद पारदर्शिता और भ्रष्टाचार को उजागर करना है, लेकिन अब इसका इस्तेमाल अधिकारियों को डराने और ब्लैकमेल करने के लिए किया जा रहा है।
RTI एक्ट 2005 किस लिए लागू किया गया था?
RTI एक्ट 2005 पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था ताकि भ्रष्टाचार को उजागर किया जा सके।
इस फैसले से RTI कार्यकर्ताओं में क्या प्रतिक्रिया हुई?
कई लोग इसे न्यायपालिका का सख्त रुख मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे ईमानदार कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त कदम उठाना ज़रूरी है।
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