सुंदर पिचाई ने बाल्मर की टिप्पणियों को प्रेरणा में बदला
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने बताया, कैसे उन्होंने अपनी टीम को मोटिवेट किया जब माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ स्टीव बाल्मर ने क्रोम ब्राउज़र को 'राउंडिंग एरर' कहा 2008 में जब गूगल ने अपना क्रोम ब्राउज़र लॉन्च
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने बताया, कैसे उन्होंने अपनी टीम को मोटिवेट किया जब माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ स्टीव बाल्मर ने क्रोम ब्राउज़र को 'राउंडिंग एरर' कहा
2008 में जब गूगल ने अपना क्रोम ब्राउज़र लॉन्च किया, तो उस वक्त माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ स्टीव बाल्मर ने इसे "राउंडिंग एरर" कहकर खारिज कर दिया था। उस समय माइक्रोसॉफ्ट का इंटरनेट एक्सप्लोरर ग्लोबल ब्राउज़र मार्केट में करीब 60% हिस्सेदारी के साथ राज कर रहा था। वहीं, क्रोम एक नया प्रोडक्ट था, जिसे शुरुआत में ज्यादा सफलता नहीं मिली।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक हालिया कार्यक्रम में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने उस दौर को याद किया और बताया कि उन्होंने बाल्मर की इस टिप्पणी को अपनी टीम के लिए प्रेरणा में कैसे बदला। पिचाई ने कहा, "यह हमारी टीम के लिए निराशाजनक हो सकता था।" लेकिन उन्होंने इसे अलग नजरिए से देखा और अपनी टीम से कहा, "इस बात का मतलब है कि हम सही दिशा में काम कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने हमें खारिज करने की जरूरत महसूस की।"
शुरुआती दिनों में क्रोम को थोड़ी सफलता मिली, लेकिन जल्द ही इसकी ग्रोथ धीमी हो गई और इसका मार्केट शेयर कम ही रहा। इसके बावजूद पिचाई और उनकी टीम ने उम्मीदें कम करने के बजाय आक्रामक रणनीति अपनाई। उन्होंने बड़े लक्ष्य तय किए और ब्राउज़र को लगातार अपडेट करने पर जोर दिया। हर छह हफ्ते में क्रोम का नया वर्जन लॉन्च किया गया, जबकि उस वक्त दूसरे ब्राउज़र हर छह महीने या साल में एक बार अपडेट होते थे। इन प्रयासों का नतीजा यह हुआ कि धीरे-धीरे क्रोम ने यूजर्स का भरोसा जीत लिया।
2012 तक, क्रोम ने अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला ब्राउज़र बनने का मुकाम हासिल कर लिया। यह सफलता न केवल टीम के प्रयासों का प्रमाण थी, बल्कि पिचाई की गूगल में मजबूत स्थिति बनाने में भी मददगार साबित हुई, जो बाद में उन्हें सीईओ बनने तक ले गई।
क्रोम के शुरुआती संघर्षों से सबक लेते हुए, पिचाई ने स्टैनफोर्ड के छात्रों को चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट्स अपनाने की सलाह दी, भले ही उनकी सफलता अनिश्चित हो। उन्होंने कहा, "मुश्किल चीजों पर काम करने से मैंने बहुत कुछ सीखा है। यह आमतौर पर अन्य महान और आशावादी लोगों को भी आकर्षित करता है।" उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऊंचे लक्ष्य पूरी तरह से हासिल न भी हों, तो भी उनकी ओर बढ़ने से शानदार नतीजे मिल सकते हैं।
पिचाई ने छात्रों को यह भी सलाह दी कि वे समाज या माता-पिता की उम्मीदों के बजाय अपने जुनून को फॉलो करें। उन्होंने कहा, "अपने रास्ते पर चलते हुए उस चीज़ पर ध्यान न दें जो आपके माता-पिता चाहते हैं, या जो आपके दोस्त कर रहे हैं, या जो समाज आपसे उम्मीद करता है।" इसके बजाय उन्होंने उन्हें वह करने के लिए प्रेरित किया जो उन्हें सबसे ज्यादा उत्साहित करता है। पिचाई ने कहा, "उन चीजों के बारे में सोचें, जिन पर आप अपने रूममेट्स के साथ रातभर बातें करते रहते हैं। और फिर वही चीजें करें।"
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्टीव बाल्मर ने Chrome को क्या कहा था?
2008 में जब Google ने Chrome लॉन्च किया, तो Microsoft के सीईओ स्टीव बाल्मर ने इसे 'राउंडिंग एर' कहकर खारिज कर दिया। उस समय Internet Explorer को 60% मार्केट शेयर था।
सुंदर पिचाई ने अपनी टीम को बाल्मर की टिप्पणी को कैसे समझाया?
पिचाई ने अपनी टीम को बताया कि यह बात का मतलब है कि वे सही दिशा में काम कर रहे हैं, क्योंकि बाल्मर को उन्हें खारिज करने की जरूरत महसूस हुई। इसी सोच को उन्होंने प्रेरणा में बदल दिया।
Chrome की सफलता के लिए Google ने क्या रणनीति अपनाई?
Google ने हर छह हफ्ते में Chrome का नया वर्जन लॉन्च किया, जबकि दूसरे ब्राउज़र हर छह महीने या साल में एक बार अपडेट होते थे। इसी तेज़ रफ़्तार अपडेट से Chrome ने यूजर्स का भरोसा जीता।
Chrome को दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला ब्राउज़र कब बना?
2012 तक Chrome ने सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला ब्राउज़र बन गया।
पिचाई ने Stanford के छात्रों को क्या सलाह दी?
पिचाई ने कहा कि मुश्किल चीजों पर काम करें और अपने जुनून को फॉलो करें, माता-पिता या समाज की उम्मीदों के बजाय। उन्होंने कहा कि ऊंचे लक्ष्य न भी पूरे हों, तो भी उनकी ओर बढ़ने से शानदार नतीजे मिल सकते हैं।
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