भारतीय वैज्ञानिकों ने सुपरनोवा SN 2023zcu का अध्ययन कर ब्रह्मांडीय दूरी मापन विधियों को परिष्कृत किया।
सुपरनोवा SN 2023zcu से ब्रह्मांडीय दूरी का अध्ययन संभव
भारतीय वैज्ञानिकों ने सुपरनोवा SN 2023zcu का अध्ययन कर ब्रह्मांडीय दूरी मापन विधियों को परिष्कृत किया।
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Study of supernova SN 2023zcu aids cosmic distance measureme · NewsDarpan AI
भारतीय वैज्ञानिकों ने सुपरनोवा SN 2023zcu पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन में योगदान दिया है। यह सुपरनोवा 8 दिसंबर 2023 को सर्पिल गैलेक्सी NGC 2139 के किनारे खोजा गया था, जो पृथ्वी से लगभग 90.7 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर है। यह अध्ययन द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है और सुपरनोवा के विकास और ब्रह्मांडीय दूरी मापन में इसकी भूमिका पर विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।
SN 2023zcu टाइप IIP श्रेणी का सुपरनोवा है, जो तब होता है जब विशाल लाल सुपरजायंट तारे अपना परमाणु ईंधन समाप्त कर लेते हैं और ढह जाते हैं। इसकी प्रकाश वक्र में 'प्लेटो' चरण देखा गया, जहां हाइड्रोजन पुनर्संयोजन के कारण चमक स्थिर रहती है। शोधकर्ताओं ने एक्सपैंडिंग फोटोस्फेरिक मेथड (EPM) का उपयोग करके इसकी दूरी 27.8 मेगापारसेक (Mpc) मापी, जो स्थानीय ब्रह्मांड को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
अध्ययन ने बोलोमेट्रिक ल्यूमिनोसिटी का मॉडलिंग करके मूल तारे के गुणों का अनुमान लगाया, जिसमें सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 12 गुना और विस्फोट ऊर्जा 2 × 10⁵¹ एर्ग्स पाई गई। स्पेक्ट्रोस्कोपिक अवलोकनों में विस्फोट के दौरान लोहे, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे नए तत्वों का निर्माण देखा गया, जो ब्रह्मांडीय पुनर्चक्रण में सुपरनोवा की भूमिका को दर्शाता है।
यह शोध आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES) के वैज्ञानिकों द्वारा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से किया गया। सुपरनोवा के विभिन्न चरणों की नियमित निगरानी ने इन शक्तिशाली खगोलीय घटनाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद की है।
यह अध्ययन न केवल तारकीय विकास की समझ को गहरा करता है, बल्कि ब्रह्मांडीय दूरी मापन की विधियों को भी परिष्कृत करता है, जिससे भविष्य के खगोलीय अनुसंधान और खोजों में सहायता मिलेगी।
स्रोत: Press Information Bureau (Govt. of India) प्रेस विज्ञप्ति, 12 JUN 2026. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2272106
