स्टालिन ने जनगणना सुधार की मांग की, खुले फॉर्मेट से 12,000 करोड़ की बर्बादी का खतरा
DMK अध्यक्ष स्टालिन ने खुले फॉर्मेट से 12,000 करोड़ की बर्बादी का खतरा बताया। तमिलनाडु सरकार से प्रस्ताव पास करने की मांग की।
एम.के. स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में सही जाति जनगणना के लिए प्रस्ताव की मांग की
DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने तमिलनाडु सरकार से कहा है कि वह विधानसभा में एक प्रस्ताव पास करे जिसमें केंद्र पर दबाव डाला जाए कि वह जाति जनगणना के तरीके में बदलाव करे। उन्होंने चेतावनी दी है कि मौजूदा खुले फॉर्मेट से 12,000 करोड़ रुपये बर्बाद होंगे और कोई काम का डेटा नहीं मिलेगा।
खुला फॉर्मेट 'निराशाजनक'
सोशल मीडिया पर एक बयान में स्टालिन ने केंद्र के फैसले की आलोचना की है जिसमें जाति की जानकारी पहले से तय ड्रॉप-डाउन लिस्ट या मानक मेनू के बिना दर्ज की जाएगी। उन्होंने इस तरीके को निराशाजनक बताया। उन्होंने केंद्र की उस सफाई को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया है कि OBC कैटेगरी में सूचीबद्ध समुदाय जातियां नहीं बल्कि वर्ग हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सही जाति जनगणना तभी सफल हो सकती है जब वह केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा मिलकर तैयार की गई समुदायों की लिस्ट पर आधारित हो। उन्होंने केंद्र से कहा कि वह राज्य सरकारों से बात करे और पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग कैटेगरी में सूचीबद्ध जातियों की जानकारी इकट्ठा करे, ताकि लोग एक संयुक्त लिस्ट से चुन सकें।
भ्रम और बढ़े-चढ़े दावों का खतरा
स्टालिन ने चेतावनी दी कि लोगों के सुझाव के आधार पर जाति की जानकारी इकट्ठा करने से भ्रम पैदा होगा। उन्होंने कहा, "जैसा कि सामाजिक न्याय में दिलचस्पी रखने वालों ने पहले ही बताया है, इससे 46 लाख समुदायों से जुड़े दावे सामने आएंगे।"
उन्होंने कहा कि यह गलत तरीका न सिर्फ सरकारी फंड और कर्मचारियों की मेहनत बर्बाद करेगा बल्कि कोई फायदा भी नहीं देगा, सिर्फ आंखों में धूल झोंकने का काम करेगा। DMK नेता ने जोर देकर कहा कि प्रस्ताव में केंद्र से ऐसी जनगणना कराने की मांग होनी चाहिए जो अन्य पिछड़ा वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का पता लगा सके, सही आरक्षण नीति बना सके और OBC सशक्तिकरण सुनिश्चित कर सके।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्टालिन ने जाति जनगणना के लिए क्या मांग की है?
स्टालिन ने तमिलनाडु सरकार से विधानसभा में एक प्रस्ताव पास करने की मांग की है। इस प्रस्ताव से केंद्र पर दबाव डाला जाएगा कि वह जाति जनगणना के तरीके में बदलाव करे। उन्होंने कहा कि जनगणना के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा तैयार की गई समुदायों की एक संयुक्त लिस्ट होनी चाहिए।
मौजूदा खुले फॉर्मेट से क्या नुकसान हो सकता है?
स्टालिन ने चेतावनी दी है कि खुले फॉर्मेट से 12,000 करोड़ रुपये बर्बाद होंगे और कोई काम का डेटा नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह तरीका सरकारी फंड और कर्मचारियों की मेहनत बर्बाद करेगा।
खुले फॉर्मेट में जाति की जानकारी कैसे दर्ज की जाएगी?
खुले फॉर्मेट में जाति की जानकारी ड्रॉप-डाउन लिस्ट या मानक मेनू के बिना दर्ज की जाएगी। लोग अपने सुझाव के आधार पर जानकारी भर सकेंगे, जिससे भ्रम पैदा हो सकता है।
इस तरीके से कितने दावे सामने आ सकते हैं?
स्टालिन ने कहा कि खुले फॉर्मेट से 46 लाख समुदायों से जुड़े दावे सामने आ सकते हैं, जिससे भ्रम और भ्रांति की स्थिति बन जाएगी।
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