संजय सूरी: टीवी पर वापसी को बताया "घर वापसी" का एहसास
संजय सूरी: मेरे पास ₹100 करोड़ की फिल्म नहीं है, लेकिन मैंने ऐसी फिल्मों में काम किया है जो समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं संजय सूरी ने अपने करियर और क्रिएटिव संतुष्टि पर की बात एक्टर संजय सूरी, जो हाल
संजय सूरी: मेरे पास ₹100 करोड़ की फिल्म नहीं है, लेकिन मैंने ऐसी फिल्मों में काम किया है जो समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं
संजय सूरी ने अपने करियर और क्रिएटिव संतुष्टि पर की बात
एक्टर संजय सूरी, जो हाल ही में टीवी शो जूही मुई से जुड़े हैं, इसे अपने करियर का "फुल-सर्कल मोमेंट" मानते हैं। 1997 में टीवी से शुरुआत करने के बाद फिल्मों में कदम रखने वाले सूरी को इस शो का सामाजिक रूप से प्रासंगिक थीम और कम समय की प्रतिबद्धता ने आकर्षित किया। उन्होंने कहा, "मैंने लंबे कमिटमेंट्स से खुद को दूर रखा। यह एक महीने का कमिटमेंट था और हमने ट्रैक को ओपन रखा है ताकि जब ज़रूरत हो, मैं वापस आ सकूं। सिनेमा में भी मैंने ज्यादातर सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों में काम किया है।"
करीब तीन दशक बाद टीवी पर वापसी को लेकर सूरी ने अपने शुरुआती दिनों की यादें साझा कीं। लगभग 30 साल पहले उन्होंने ट्रैवल शो इंडियन हॉलीडे होस्ट किया था। इसके बाद यही तो प्यार है जैसे शो और फिल्म प्यार में कभी कभी में लीड रोल निभाया। फिर उनका करियर फिल्मों और प्रोडक्शन की ओर शिफ्ट हो गया। उन्होंने कहा, "तो ये मेरे लिए 30 साल बाद घर वापसी जैसा है।"
सूरी का मानना है कि टीवी, फिल्म और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बीच की लाइनें अब धुंधली हो रही हैं। उन्होंने कहा, "आपको प्लेटफॉर्म-अज्ञेय रहना होगा और वही काम करना होगा जो आप करना चाहते हैं, खासकर मेरे करियर के इस स्टेज पर।" उन्होंने यह भी साफ किया कि पहले टीवी से उनकी दूरी दिलचस्पी की कमी की वजह से नहीं थी, बल्कि इसलिए थी क्योंकि वे लंबे प्रोजेक्ट्स के लिए समय नहीं दे सकते थे।
फिल्म एक्टर्स के टीवी की ओर रुख करने को लेकर बनी धारणा पर सूरी ने कहा, "यह किसी की सोच हो सकती है। पहले भी मैं दो साल तक घर पर बैठा था और कुछ नहीं किया। मेरी इम्तियाज़ अली के साथ मैं वापस आऊंगा रिलीज़ हुई है, एक ओटीटी शो आने वाला है और मैं शॉर्ट फिल्मों में भी काम करूंगा।"
अपने 27 साल लंबे करियर पर बात करते हुए सूरी ने माना कि उनके पास ₹100 करोड़ की ब्लॉकबस्टर फिल्म नहीं है, लेकिन उन्हें गर्व है कि उन्होंने ऐसी फिल्मों में काम किया है जो समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं। उन्होंने कहा, "मेरी महत्वाकांक्षाएं कभी घबराहट या दिखावे से प्रेरित नहीं रही हैं।" उन्होंने बताया कि उनके फैसले हमेशा क्रिएटिव संतुष्टि पर आधारित रहे हैं, न कि मेनस्ट्रीम मापदंडों पर।
हीरो-ड्रिवन इंडस्ट्री में काम करने की चुनौतियों पर बात करते हुए सूरी ने अपनी फिल्म तेरा जादू चल गया का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, "उन दिनों सिनेमा पूरी तरह से हीरो-ड्रिवन था। या तो आप लीड में होते थे, या फिर कुछ भी नहीं। मैंने सोचा, 'ठीक है, मैं अपने टी20 ग्राउंड पर खेलूंगा।' मुझे दीवार में एक ईंट बनने में कोई दिक्कत नहीं, लेकिन अगर आप वो ईंट निकाल दें, तो उसका असर दिखना चाहिए।"
एक प्रोड्यूसर के तौर पर सूरी ने हमेशा स्टोरीटेलिंग को प्राथमिकता दी है, न कि मुनाफे को। उनकी फिल्म आई एम भारत की सबसे बड़ी क्राउडफंडेड प्रोजेक्ट्स में से एक बनी और इसे नेशनल अवॉर्ड भी मिला। इसे उन्होंने बेहद संतोषजनक अनुभव बताया।
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