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सह्याद्री कॉलेज ने शुरू की 'प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस' लेक्चर सीरीज़

सह्याद्री कॉलेज ने शुरू की 'प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस' लेक्चर सीरीज़ कुवेम्पु यूनिवर्सिटी से जुड़े शिवमोगा के सह्याद्री आर्ट्स कॉलेज ने 'प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस' नाम की एक अनोखी लेक्चर सीरीज़ शुरू की

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कुवेम्पु यूनिवर्सिटी से जुड़े शिवमोगा के सह्याद्री आर्ट्स कॉलेज ने 'प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस' नाम की एक अनोखी लेक्चर सीरीज़ शुरू की है। इस पहल के तहत सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक, लेखक और अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ क्लासरूम में आकर छात्रों के साथ अपना अनुभव और ज्ञान साझा करेंगे।

छात्रों को मिलेगी अलग-अलग दृष्टिकोण से सीखने की सुविधा

शुक्रवार को हुए पहले सत्र में कई जाने-माने लोग शामिल हुए। इनमें वरिष्ठ किसान आंदोलन कार्यकर्ता के.टी. गंगाधर, दलित संघर्ष समिति के राज्य संयोजक एम. गुरुमूर्ति, कवि और पत्रकार एन. रवि कुमार, लेखिका पद्माक्षी के. और डॉक्टर-लेखक प्रीतम शामिल थे।

इन वक्ताओं ने अपने-अपने विषयों पर छात्रों से बात की। श्री गंगाधर ने अर्थशास्त्र के छात्रों से कृषि अर्थव्यवस्था पर चर्चा की। श्री गुरुमूर्ति ने राजनीतिक विज्ञान के छात्रों को कर्नाटक में दलित आंदोलन के इतिहास और प्रभाव के बारे में बताया। पत्रकारिता और मास कम्युनिकेशन के छात्रों के लिए श्री रवि कुमार ने "लोकतंत्र और मीडिया" पर सत्र लिया। अंग्रेजी साहित्य के छात्रों के साथ सुश्री पद्माक्षी ने पी. लंकेश की कविता अव्वा पर चर्चा की। वहीं, डॉ. प्रीतम ने प्रसिद्ध कन्नड़ लेखक पूर्णचंद्र तेजस्वी के साहित्यिक योगदान पर बात की।

शिक्षा के लिए व्यापक दृष्टिकोण

इस लेक्चर सीरीज़ का उद्घाटन कुवेम्पु यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रो. शरथ अनंतमूर्ति ने किया। उन्होंने कॉलेज की तारीफ करते हुए कहा कि इसने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के 'प्रोफेसर्स ऑफ प्रैक्टिस' कॉन्सेप्ट को एक नया आयाम दिया है। उन्होंने कहा कि जहां UGC ने इस पहल को मुख्य रूप से उद्योगपतियों और बिजनेस लीडर्स के लिए सोचा था, वहीं सह्याद्री कॉलेज ने सामाजिक आंदोलनों और अन्य क्षेत्रों के लोगों को शामिल करके इसे और प्रगतिशील बना दिया है।

"यह जरूरी है कि छात्रों को उन लोगों से सीखने का मौका मिले जो सामाजिक बदलाव के आंदोलनों का हिस्सा रहे हैं," प्रो. अनंतमूर्ति ने जोर देकर कहा।

नेतृत्व और सहयोग

इस कार्यक्रम में कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. सिराज अहमद, प्रो. मेती मल्लिकार्जुन और प्रो. एच.पी. मंजूनाथ जैसे कई गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे। उनकी उपस्थिति ने संस्थान की समावेशी और गतिशील शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाया।

सह्याद्री आर्ट्स कॉलेज छात्रों को अकादमिक के साथ-साथ वास्तविक जीवन की विशेषज्ञता से जोड़कर उन्हें सामाजिक चुनौतियों और अवसरों को समझने में मदद करना चाहता है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को पेशेवर और नागरिक जीवन के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है।

स्रोत: The Hindu

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