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नीट जैसी व्यवस्थागत समस्याओं को युवाओं की चिंता समझकर सुलझाएं: आरएसएस

आरएसएस नेताओं ने युवाओं की चिंताओं को समझने और व्यवस्था में सुधार के लिए समाज-सरकार सहयोग की मांग की।

नीट जैसी व्यवस्थागत समस्याओं को युवाओं की चिंता समझकर सुलझाएं: आरएसएस
Photo by Anete Lusina on Pexels

नौजवानों की चिंताओं को समझा जाए और उनका समाधान किया जाए: आरएसएस नेता

आरएसएस नेताओं ने नीट परीक्षा जैसे मुद्दों पर युवाओं की चिंताओं को दूर करने के लिए व्यवस्था में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि इन चिंताओं को समझने और मिलकर काम करने की जरूरत है, सिर्फ विरोध से काम नहीं चलेगा।

शुक्रवार को गुडिलोवा में तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक के आखिर में पत्रकारों से बात करते हुए आरएसएस के सह सरकार्यवाह सी.आर. मुकुंदा ने कहा कि जंतर-मंतर पर हाल में हुए विरोध को सिर्फ भ्रष्टाचार के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा, "जहां भी व्यवस्था में कमियां हैं, उन्हें समाज में जागरूकता के जरिए और सरकार की कोशिशों के साथ ठीक करना जरूरी है।"

सरकार और समाज को मिलकर काम करना होगा

मुकुंदा ने जोर देकर कहा कि नीट और इस तरह की व्यवस्थागत समस्याएं युवाओं में अपने भविष्य को लेकर असली चिंता पैदा करती हैं। उन्होंने कहा, "सिर्फ विरोध या बाधा डालने से समाधान नहीं निकलेगा।" उन्होंने कहा कि केंद्र, राज्य सरकारों और समाज को मिलकर सकारात्मक और रचनात्मक तरीके से व्यवस्था में सुधार करना होगा।

ये टिप्पणी तब आई जब मुकुंदा और अखिल भारत प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने विज्ञान विहार रेजिडेंशियल स्कूल कैंपस में हुई अखिल भारतीय समन्वय बैठक के आखिरी दिन मीडिया को संबोधित किया। बैठक में 326 प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें 49 महिलाएं थीं, जो अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले संघ से प्रेरित 32 संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

जनसंख्या, नशा और युवाओं से जुड़ाव

प्रतिनिधियों ने जनसंख्या में बदलाव और असंतुलन पर गंभीर चर्चा की, दुनिया भर और भारत में बुजुर्ग आबादी और घटती जन्म दर से पैदा होने वाली चुनौतियों की जांच की। मुकुंदा ने कहा, "अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों की जनसंख्या के अनुपात में हो रहे बदलाव और उनके सामाजिक असर पर चर्चा हुई, साथ ही समाज में संतुलन और सद्भाव बनाए रखने के उपायों पर भी बात हुई।"

बैठक में युवाओं के बीच नशीले पदार्थों की बढ़ती पहुंच पर गंभीर चिंता जताई गई। जोर दिया गया कि इस समस्या के लिए पूरे समाज की भागीदारी जरूरी है, सिर्फ सरकार या पुलिस की कार्रवाई से काम नहीं चलेगा।

मुकुंदा ने युवाओं के साथ सिर्फ बातचीत करने की जगह उनसे सीधे जुड़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "उनके साथ सीधे जुड़ना, उनकी भावनाओं और चिंताओं को समझना और बातचीत के जरिए देश, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के प्रति लगाव की भावना विकसित करना जरूरी है।"

प्रतिनिधियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भी विस्तार से चर्चा की, भारतीय नजरिए और सामाजिक संदर्भ में इसकी सकारात्मक संभावनाओं और जुड़ी सावधानियों दोनों पर विचार किया। बैठक में समाज के फायदे के नजरिए से टेक्नोलॉजी को देखने और संभावित बुरे असर के बारे में जागरूकता पैदा करने पर जोर दिया गया।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरएसएस नेताओं का नीट जैसी समस्याओं पर क्या कहना है?

आरएसएस के सह सरकार्यवाह सी.आर. मुकुंदा ने कहा कि नीट जैसी व्यवस्थागत समस्याएं युवाओं में भविष्य को लेकर असली चिंता पैदा करती हैं। उन्होंने जोर दिया कि सिर्फ विरोध से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि सरकार, राज्य सरकारों और समाज को मिलकर सकारात्मक तरीके से व्यवस्था में सुधार करना होगा।

बैठक में नशीले पदार्थों की समस्या पर क्या बात हुई?

बैठक में युवाओं के बीच नशीले पदार्थों की बढ़ती पहुंच पर गंभीर चिंता जताई गई। प्रतिनिधियों ने जोर दिया कि इस समस्या को सुलझाने के लिए सिर्फ सरकार या पुलिस की कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की भागीदारी जरूरी है।

अखिल भारतीय समन्वय बैठक में कितने लोग शामिल हुए?

बैठक में कुल 326 प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें 49 महिलाएं थीं। ये प्रतिनिधि संघ से प्रेरित 32 संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे जो अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं।

युवाओं के साथ जुड़ने के बारे में आरएसएस नेताओं ने क्या कहा?

मुकुंदा ने कहा कि युवाओं के साथ सिर्फ बातचीत करने की जगह उनसे सीधे जुड़ना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि उनकी भावनाओं और चिंताओं को समझना और बातचीत के जरिए देश, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के प्रति लगाव की भावना विकसित करना जरूरी है।

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