आरएसएस चीफ भागवत ने अमेरिका में बसे भारतीयों से अमेरिका के प्रति वफादारी की अपील की
न्यूयॉर्क में भागवत ने अमेरिका में बसे भारतीयों से कहा कि अपनी कर्मभूमि के प्रति वफादार रहें और पहले अमेरिका के फर्ज पूरे करें।
आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने अमेरिका दुनिया को संदेश, जानिए भाषण की बड़ी बातें
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भारतीय मूल के उन लोगों से कहा है जो अमेरिकी नागरिक बन चुके हैं कि वे अपनी "कर्म भूमि" (जहां काम करते हैं) के प्रति वफादार रहें। उन्होंने उनसे अमेरिका के प्रति अपने फर्ज पूरे करने को कहा, और उसके बाद ही अपनी जन्मभूमि के लिए योगदान के बारे में सोचें।
विविधता में एकता है भारत का डीएनए
न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में यूनिवर्सल वननेस प्रोग्राम के दौरान भारतीय डायस्पोरा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि भारत का मूल सिद्धांत विविधता में एकता है। उन्होंने कहा, "मैं उस देश से आता हूं जो आप में से कई लोगों की जन्मभूमि है। वहां हम विविधता में एकता महसूस करते हैं। हम विविधता की उस एकता को सजावट के रूप में देखते हैं।" उन्होंने समझाया कि भारत की अलग-अलग परंपराएं, जिनमें अलग-अलग दिन पेड़-पौधों की पूजा शामिल है, लोगों को पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारियां याद दिलाने का काम करती हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे फादर्स डे या मदर्स डे माता-पिता के प्रति फर्ज बताते हैं।
जहां कमाते हैं, उस धरती के प्रति फर्ज
भागवत ने जोर देकर कहा कि विदेश में बसे भारतीयों को अपने नए देश के प्रति जिम्मेदारियों को पहले रखना चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर हम अमेरिका में हैं, अमेरिका में कमाते हैं, तो हम अमेरिका का हिस्सा हैं। ऐसे में हमें यहां सही तरीके से बर्ताव करना चाहिए। जो लोग दूसरे देशों से आकर यहां बस गए हैं, यह उनकी कर्म भूमि है। उनका अपनी कर्म भूमि के प्रति भी फर्ज है। उन्हें इसे पूरा करना चाहिए। उन्हें अपने काम के प्रति वफादार रहना चाहिए।" उन्होंने कहा कि इन फर्जों को पूरा करने के बाद ही वे भारत में योगदान देने की इच्छा पर काम कर सकते हैं, और स्पष्ट किया कि ऐसा करने पर कोई पाबंदी नहीं है।
भारत सिर्फ यह चाहता है कि आप अच्छे से जिएं
आरएसएस नेता ने श्रोताओं से कहा कि भारत डायस्पोरा से किसी भौतिक योगदान की उम्मीद नहीं करता, बल्कि बस यही चाहता है कि वे अच्छे से जिएं, क्योंकि भारत ने उन्हें जीवन का फलसफा दिया है। उन्होंने उनसे कहा कि वे अपने कर्म के अनुसार काम करें, अमेरिका के प्रति अपने फर्ज पूरे करें, और उसके बाद ही, अगर संसाधन और समय हो, भारत के कल्याण के बारे में सोचें।
इंसानी जिम्मेदारी और करुणा की परीक्षा
भागवत ने श्रोताओं को एक प्रयोग करने को कहा: खाना खाते वक्त अपने सामने एक भूखे इंसान को खड़ा कर लें और उसकी तरफ से नजरें हटाए बिना या उसे वहां से भगाए बिना खाना जारी रखने की कोशिश करें। उन्होंने कहा, "आप उसकी आंखों से बचे बिना या उसे वहां से भगाए बिना खाना नहीं खा सकते। आप कोशिश कर सकते हैं, लेकिन आप ऐसा नहीं कर पाएंगे। क्योंकि आप और मैं इंसान हैं।"
उन्होंने कहा कि इंसानों की दुनिया के प्रति जिम्मेदारी है क्योंकि जानवरों के उलट उनके पास सोचने-समझने की ताकत है और सही-गलत की समझ है, जिससे वे एकता को समझ सकते हैं। भागवत ने कहा, "अगर कोई इंसान सही सोचता है, तो वह भगवान के करीब जाता है। अगर वह गलत सोचता है, तो वह जानवरों के करीब जाता है। इसलिए सोचते वक्त दिशा जरूरी है।"
भारत की नियति: एहसास कराना और याद दिलाना
भागवत ने निष्कर्ष दिया कि भारत की नियति है अपने भीतर विविधता में एकता को साकार करना और समय-समय पर दुनिया को याद दिलाना कि "हम एक हैं, और विविधता की वजह से एकता और भी खूबसूरत दिखती है।"
स्रोत: Live Hindustan
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरएसएस चीफ भागवत ने अमेरिका में बसे भारतीयों से क्या कहा?
भागवत ने कहा कि जो भारतीय अमेरिकी नागरिक बन गए हैं, उन्हें अपनी 'कर्म भूमि' यानी अमेरिका के प्रति वफादार रहना चाहिए। उन्हें पहले अमेरिका के प्रति अपने फर्ज पूरे करने चाहिए, उसके बाद ही भारत के लिए योगदान देने के बारे में सोचना चाहिए।
भागवत ने भारत का मूल सिद्धांत क्या बताया?
भागवत ने कहा कि भारत का मूल सिद्धांत 'विविधता में एकता' है। उन्होंने समझाया कि भारत की अलग-अलग परंपराएं और त्योहार लोगों को उनकी जिम्मेदारियां याद दिलाते हैं, जैसे फादर्स डे या मदर्स डे माता-पिता के प्रति फर्ज याद दिलाते हैं।
क्या भारत भारतीय डायस्पोरा से कोई भौतिक योगदान की उम्मीद करता है?
नहीं। भागवत ने कहा कि भारत भारतीय डायस्पोरा से किसी पैसे या भौतिक योगदान की उम्मीद नहीं करता। बस यही चाहता है कि वे अच्छे से जिएं और भारत ने जो जीवन का फलसफा दिया है, उसका पालन करें।
भागवत ने इंसानी जिम्मेदारी के बारे में क्या कहा?
भागवत ने कहा कि इंसानों के पास सोचने-समझने की ताकत और सही-गलत की समझ है, इसलिए उन्हें दुनिया के प्रति जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सही सोचने वाला व्यक्ति भगवान के करीब जाता है और गलत सोचने वाला जानवरों के करीब।
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