महिलाओं में लो ओवेरियन रिज़र्व की बढ़ती समस्या पर विशेषज्ञों की चेतावनी
ज्यादा भारतीय महिलाएं जान रही हैं कि उनकी ओवेरियन रिज़र्व कम है: प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले डॉक्टर क्या कहना चाहते हैं महिलाओं के परिवार शुरू करने की उम्र बदल रही है।
ज्यादा भारतीय महिलाएं जान रही हैं कि उनकी ओवेरियन रिज़र्व कम है: प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले डॉक्टर क्या कहना चाहते हैं
महिलाओं के परिवार शुरू करने की उम्र बदल रही है। हायर एजुकेशन, करियर की डिमांड, फाइनेंशियल गोल्स और 20s में मदरहुड के लिए तैयार न होने जैसी वजहों से कई महिलाएं प्रेग्नेंसी को डिले कर रही हैं। लेकिन फर्टिलिटी अपनी बायोलॉजिकल टाइमलाइन पर चलती है, जो हमेशा लाइफ प्लान से मैच नहीं करती। फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट्स अब एक नई समस्या देख रहे हैं – लो ओवेरियन रिज़र्व।
लो ओवेरियन रिज़र्व क्या है?
लो ओवेरियन रिज़र्व का मतलब है कि महिला की उम्र के हिसाब से ओवरी में अंडों की संख्या कम है। यह इनफर्टिलिटी नहीं है। SHE दिल्ली हॉस्पिटल की चीफ IVF स्पेशलिस्ट डॉ. कृति तिवारी बताती हैं, "लो ओवेरियन रिज़र्व का मतलब यह नहीं है कि आप प्रेग्नेंट नहीं हो सकतीं, लेकिन चांस कम हो सकते हैं।" यह फर्क समझना जरूरी है, क्योंकि यह बताता है कि यह कंडीशन फैमिली प्लानिंग को प्रभावित कर सकती है, लेकिन कंसीव करने की संभावना खत्म नहीं करती।
ऐसा क्यों होता है?
महिलाएं जन्म से ही एक फिक्स्ड नंबर के अंडों के साथ पैदा होती हैं। शरीर की बाकी सेल्स की तरह ये अंडे दोबारा नहीं बनते। समय के साथ अंडों की क्वांटिटी और क्वालिटी दोनों कम होती जाती हैं। ज्यादातर महिलाओं में 30 की उम्र के बाद फर्टिलिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है और 35-40 के बीच तेजी से घटती है। लेकिन कुछ महिलाओं में यह गिरावट जल्दी शुरू हो जाती है। इसके कारण हो सकते हैं – जेनेटिक्स, ओवेरियन सर्जरी, एंडोमेट्रियोसिस, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर, कीमोथेरेपी या अन्य बीमारियां।
भारत में हुई एक स्टडी में पाया गया कि 30 से कम उम्र की 29% महिलाएं, जो फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के लिए आईं, उनमें एंटी-मुलरियन हॉर्मोन (AMH) का लेवल उम्मीद से कम था। यह बताता है कि कुछ भारतीय महिलाओं में ओवेरियन एजिंग जल्दी हो सकती है।
लो ओवेरियन रिज़र्व की खामोश प्रकृति
इस कंडीशन की सबसे बड़ी चुनौती है कि इसके कोई साफ लक्षण नहीं होते। कई महिलाएं पूरी तरह से हेल्दी महसूस करती हैं और उनकी पीरियड्स भी रेगुलर होती हैं। कुछ को पीरियड्स में अनियमितता दिख सकती है, लेकिन ज्यादातर को इसका पता तब चलता है जब उन्हें कंसीव करने में दिक्कत होती है।
डॉक्टर आमतौर पर ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड से ओवेरियन रिज़र्व चेक करते हैं। AMH टेस्ट से अंडों की संख्या का अंदाजा लगाया जाता है, और अल्ट्रासाउंड से ओवरी में छोटे फॉलिकल्स गिने जाते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि सिर्फ AMH लेवल देखकर नतीजा न निकालें, क्योंकि उम्र, हेल्थ और अंडों की क्वालिटी भी फर्टिलिटी में अहम भूमिका निभाते हैं।
महिलाएं क्या कर सकती हैं?
लो ओवेरियन रिज़र्व का पता चलना इमोशनली मुश्किल हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उम्मीद खत्म हो गई है। कई महिलाएं नेचुरली कंसीव करती हैं, जबकि कुछ को फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है। जल्दी डायग्नोसिस जरूरी है, ताकि महिलाएं अपनी फर्टिलिटी के विकल्प प्लान कर सकें, जैसे जल्दी कंसीव करने की कोशिश या एग फ्रीजिंग पर विचार।
एग फ्रीजिंग या फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन उन महिलाओं के लिए एक विकल्प है, जो प्रेग्नेंसी डिले करना चाहती हैं। यह हर किसी के लिए जरूरी नहीं है, लेकिन ओवेरियन रिज़र्व को जल्दी समझना महिलाओं को सही फैसले लेने में मदद कर सकता है और आगे चलकर अनचाही मुश्किलों से बचा सकता है।
क्या इसे रोका जा सकता है?
ओवेरियन रिज़र्व की नेचुरल गिरावट को रोका नहीं जा सकता। कोई डाइट, सप्लीमेंट या चमत्कारी इलाज अंडों की संख्या नहीं बढ़ा सकता। लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल जैसे बैलेंस्ड डाइट लेना, स्मोकिंग से बचना, रेगुलर एक्सरसाइज और क्रॉनिक बीमारियों को कंट्रोल में रखना रिप्रोडक्टिव हेल्थ को सपोर्ट कर सकते हैं।
लो ओवेरियन रिज़र्व के इमोशनल असर को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं अक्सर चिंता, गिल्ट और अकेलेपन का कारण बनती हैं। परिवार का सपोर्ट, काउंसलिंग और सपोर्ट ग्रुप्स मेडिकल ट्रीटमेंट्स जितने ही जरूरी हो सकते हैं।
जागरूकता का महत्व
आखिर में, जागरूकता सबसे ताकतवर हथियार है। महिलाओं को जल्दी गाइनकॉलजिस्ट से बात करनी चाहिए, अपनी फैमिली हिस्ट्री को समझना चाहिए और समय पर मेडिकल सलाह लेनी चाहिए। ये कदम महिलाओं को सही जानकारी और विकल्प देकर उनके भविष्य को आत्मविश्वास के साथ प्लान करने में मदद कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लो ओवेरियन रिज़र्व क्या है?
लो ओवेरियन रिज़र्व का मतलब है कि महिला की उम्र के हिसाब से ओवरी में अंडों की संख्या कम है।
महिलाएं लो ओवेरियन रिज़र्व के बारे में क्यों जान रही हैं?
महिलाएं प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले इसकी जानकारी ले रही हैं क्योंकि यह फैमिली प्लानिंग को प्रभावित कर सकती है।
लो ओवेरियन रिज़र्व का पता कैसे लगाया जाता है?
डॉक्टर आमतौर पर ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड से ओवेरियन रिज़र्व चेक करते हैं। AMH टेस्ट से अंडों की संख्या का अंदाजा लगाया जाता है।
महिलाएं क्या कर सकती हैं अगर उन्हें लो ओवेरियन रिज़र्व का पता चले?
महिलाएं जल्दी कंसीव करने की कोशिश कर सकती हैं या एग फ्रीजिंग पर विचार कर सकती हैं।
क्या लो ओवेरियन रिज़र्व को रोका जा सकता है?
ओवेरियन रिज़र्व की गिरावट को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसे जल्दी समझकर सही फैसले लिए जा सकते हैं।
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