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भारत-यूके सोशल सिक्योरिटी समझौते से वर्कर्स को $500 मिलियन की बचत

यूके के साथ संशोधित सोशल सिक्योरिटी समझौता, भारतीय कंपनियों और वर्कर्स को $500 मिलियन की बचत भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच नया सोशल सिक्योरिटी समझौता 15 जुलाई से लागू होगा।

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भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच नया सोशल सिक्योरिटी समझौता 15 जुलाई से लागू होगा। इससे यूके में काम कर रही भारतीय कंपनियों और वर्कर्स को करीब $500 मिलियन की बचत होगी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने यह जानकारी दी है।

पहला सोशल सिक्योरिटी समझौता, जिसे डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन (DCC) भी कहा जाता है, जुलाई 2025 में साइन हुआ था। इसके तहत यूके में तीन साल तक काम करने वाले भारतीय वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी में डबल कॉन्ट्रिब्यूशन से छूट दी गई थी, बशर्ते वे इस दौरान भारत में सोशल सिक्योरिटी का योगदान करते रहें।

संशोधित समझौते में यह छूट अब पांच साल तक बढ़ा दी गई है। इससे यूके में काम कर रहे 90-95% भारतीय वर्कर्स को फायदा होगा। यूके में मौजूद 900 से ज्यादा भारतीय कंपनियों और वहां काम कर रहे 75,000 से ज्यादा भारतीय वर्कर्स के लिए यह बड़ा राहतभरा कदम माना जा रहा है।

पहले भारतीय वर्कर्स को यूके में सोशल सिक्योरिटी में योगदान करना पड़ता था, जबकि वे यूके के बेनिफिट्स के लिए पात्र नहीं थे। यूके में बेनिफिट्स के लिए लगातार दस साल का योगदान जरूरी है। लेकिन अब इस समझौते से ज्यादातर टेंपरेरी वर्कर्स को डबल कॉन्ट्रिब्यूशन से छूट मिल जाएगी। इसके लिए कंपनियों को भारतीय सरकार से एक सर्टिफिकेट लेना होगा, जो यह साबित करेगा कि वर्कर्स भारत में सोशल सिक्योरिटी का योगदान कर रहे हैं।

DCC के लागू होने की घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूके के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) भी एक्टिवेट हो रहा है। यह समझौता यूके के स्टील इंपोर्ट टैरिफ को लेकर विवाद के कारण रुका हुआ था। हाल ही में दोनों देशों ने इस मुद्दे को सुलझा लिया है, जिससे भारत को अपने स्टील एक्सपोर्ट्स के लिए मार्केट एक्सेस मिलता रहेगा।

यूके के नए टैरिफ नियम 1 जुलाई से लागू होंगे, तब भारत को स्टील टैरिफ में मिली रियायतों का पूरा ब्यौरा सामने आएगा। अधिकारियों ने बताया है कि इस समझौते में देश-विशेष कोटा, रिजिडुअल कोटा और ऑथराइज्ड-यूज स्कीम्स के तहत एक्सेस शामिल है।

सोशल सिक्योरिटी और ट्रेड पर यह दोहरी सफलता भारत और यूके के बीच मजबूत आर्थिक रिश्तों को दर्शाती है, जिससे दोनों देशों के बिजनेस और वर्कर्स को फायदा होगा।

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