अलीगढ़ विश्वविद्यालय में देशभर के कवियों का भव्य महाकवि सम्मेलन
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अलीगढ़ में पांचवें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर शीला गौतम सेंटर फॉर लर्निंग के ऑडिटोरियम में भव्य विराट कवि सम्मेलन आयोजित किया गया।
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अलीगढ़ में पांचवें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर शीला गौतम सेंटर फॉर लर्निंग के ऑडिटोरियम में भव्य विराट कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कवि सम्मेलन में देशभर से आए नामी कवियों ने अपनी ताकतवर काव्य प्रस्तुतियों के जरिए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और वीर रस, श्रृंगार, हास्य, सामाजिक चेतना और देशभक्ति से भरी रचनाओं ने पूरे कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
कवि सम्मेलन में तमाम कवियों ने अपनी खास शैलियों में अलग-अलग विषयों को अभिव्यक्ति दी। कवि सबरस मुरसानी ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह के देशप्रेम और आजादी के लिए उनके समर्पण को अपनी पंक्तियों के जरिए रेखांकित किया। उन्होंने कहा:
"नहीं ऐसा कोई दानी, जिनकी है ये अमर कहानी, देश आजाद करने की ठानी, ऐसे राजा थे मुरसानी।"
कवयित्री उन्नति भारद्वाज ने नारी शक्ति और मातृत्व के त्याग को आवाज देते हुए कहा:
"नारी शक्ति देश की खातिर पूर्ण समर्पण करती है, पन्नाधाय सरीखी माता पुत्र को अर्पण करती है।"
कवि कुमार संभव ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति में मां के लिए श्रद्धा जाहिर करते हुए कहा:
"मां के पैरों को छू के चलता हूं, घर से जब कभी निकलता हूं।"
कवि मनोज चौहान ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह के व्यक्तित्व और उनके कामों को समर्पित अपनी रचना में कहा:
"इस समय से उस समय तक, जो स्वयं इक दौर थे, जिनके किस्से हर समय में व्याप्त हैं, चहुं ओर थे। इस धरा से उस गगन तक, दृष्टि में आता यही, राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी, हर दौर के सिरमौर थे।"
कवि डॉ. दौलतराम ने प्रेम और विरह की अनुभूति को अभिव्यक्त करते हुए अपनी पंक्तियों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा:
"न मिटा नाम तेरा दिल से, मिटाकर देखा, याद तू और भी आया, जितना भुलाकर देखा।"
कवि ज़ाहिद खान ने प्रेम की अनुभूतियों को अपनी काव्य प्रस्तुति में पिरोते हुए कहा:
"पनघट पर पनिहारिन जब-जब पानी भरने आती है, पांव में पायलिया उसकी प्रेम का अलख जगाती है।"
उन्होंने अपनी दूसरी पंक्तियों के माध्यम से प्रेम की तीव्रता को भी पेश किया।
हास्य कवि पद्म अलबेला ने अपनी हास्य-व्यंग्यपूर्ण रचना से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उन्होंने कहा:
"मेरा बुढ़ापा एक्टिव है एकदम, अभी एनर्जी बिल्कुल नहीं है कम। प्यार-मोहब्बत के चक्कर में अब भी रहते हैं हम, जागती-जागती बुढ़ापे में थोड़ी-सी शर्म।"
कवयित्री डॉ. शिखा दीप्ति ने नारी सशक्तीकरण और अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध का संदेश देते हुए कहा:
"चंडिका काली का अब अवतार ले लो बेटियों, न्याय करने का स्वयं अधिकार ले लो बेटियों। रौद्र धरकर रूप, दुशासन की आंखें फोड़ दो, अब उठो, हाथों में हथियार ले लो बेटियों।"
वहीं, डॉ. अजय अटल ने प्रेम की गहरी अनुभूतियों को अपनी पंक्तियों के जरिए अभिव्यक्त किया। उन्होंने कहा:
"तुम इश्क के दरिया में उतर क्यों नहीं जाते, जीने की तमन्ना है तो मर क्यों नहीं जाते।"
मुख्य अतिथि के तौर पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से प्रोफेसर विभा शर्मा मौजूद रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए उनसे विश्वविद्यालय का नाम रोशन करने का आह्वान किया और भगत सिंह का उदाहरण देते हुए उन्हें ढेर सारी किताबें पढ़ने की अपील की।
कवि सम्मेलन के दौरान सभागार में मौजूद श्रोताओं ने कवियों की प्रस्तुतियों का पूरे उत्साह के साथ आनंद लिया और तालियों के जरिए उनका स्वागत किया। इस कार्यक्रम ने विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में साहित्यिक गरिमा और सांस्कृतिक उल्लास का समावेश किया।
इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रबुद्ध सिंह, कार्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर अंजना कुमारी, प्रोफेसर नीता वार्ष्णेय, डॉ. शाहनवाज खान, सैकड़ों विद्यार्थी और विश्वविद्यालय के शिक्षक मौजूद रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अलीगढ़ विश्वविद्यालय में यह कवि सम्मेलन कब आयोजित किया गया?
यह कवि सम्मेलन राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अलीगढ़ के पांचवें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर आयोजित किया गया। इसे शीला गौतम सेंटर फॉर लर्निंग के ऑडिटोरियम में किया गया।
इस कवि सम्मेलन में कौन-कौन से कवि अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने आए?
इस सम्मेलन में देशभर से आए नामी कवियों ने भाग लिया, जिनमें कवि सबरस मुरसानी, कवयित्री उन्नति भारद्वाज, कवि कुमार संभव, कवि मनोज चौहान, कवि डॉ. दौलतराम, कवि ज़ाहिद खान, हास्य कवि पद्म अलबेला, कवयित्री डॉ. शिखा दीप्ति और डॉ. अजय अटल शामिल थे।
कवि सम्मेलन में किस तरह की रचनाएं प्रस्तुत की गईं?
कवियों ने वीर रस, श्रृंगार, हास्य, सामाजिक चेतना और देशभक्ति से भरी रचनाओं को प्रस्तुत किया। इसमें राजा महेंद्र प्रताप सिंह के देशप्रेम, नारी शक्ति, मातृत्व, प्रेम-विरह, हास्य-व्यंग्य और नारी सशक्तीकरण जैसे विषय शामिल थे।
मुख्य अतिथि कौन थीं और उन्होंने क्या कहा?
मुख्य अतिथि के तौर पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से प्रोफेसर विभा शर्मा मौजूद रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय का नाम रोशन करने का आह्वान किया और भगत सिंह का उदाहरण देते हुए उन्हें ढेर सारी किताबें पढ़ने की अपील की।
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