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श्रावस्ती के दूबकला में तृतीय साहित्य उत्सव और विराट कवि सम्मेलन आयोजित

श्रावती के दूबकला में एक मांगलिक कार्यक्रम के सुअवसर पर तृतीय साहित्योत्सव एवं विराट कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।

श्रावस्ती के दूबकला में तृतीय साहित्य उत्सव और विराट कवि सम्मेलन आयोजित
Image credit: News Darpan Team

श्रावती के दूबकला में एक मांगलिक कार्यक्रम के सुअवसर पर तृतीय साहित्योत्सव एवं विराट कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों के साथ अलग-अलग जनपदों से आए कवियों ने हिस्सा लिया। कवियों की रचनाओं और काव्यपाठ ने कार्यक्रम में मौजूद श्रोताओं को बांधे रखा।

इस साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का सफल आयोजन और संयोजन जनपद के अग्रणी युवा साहित्यकार एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिला महामंत्री श्रवण कुमार सायक ने किया। कार्यक्रम के दौरान साहित्य, कला और कविताओं के जरिए लोगों को जोड़ा गया। आयोजन में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों के साथ साहित्यप्रेमी और बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, जिला पंचायत अध्यक्ष एवं श्रावस्ती के पूर्व सांसद दद्दन मिश्रा ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने श्रावस्ती जैसे आकांक्षी जनपद में साहित्य और कला के विकास को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि श्रवण सायक जैसे युवा ऊर्जावान साथी समाज को साहित्य के प्रति जागरूक करने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं।

विशिष्ट अतिथि एवं समाजवादी नेता इंजीनियर विनोद त्रिपाठी ने कार्यक्रम में मौजूद कवियों के काव्यपाठ की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कवियों से अपनी रचनाओं में बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उनके संबोधन में कविताओं के जरिए समाज और जीवन के अलग-अलग पक्षों को सामने लाने पर जोर रहा।

विराट कवि सम्मेलन का शानदार संचालन बिहार से पधारे सुप्रसिद्ध कवि अनुपम पाठक 'अनुपम' ने किया। उन्होंने श्री आकुल जी की पंक्तियां, "आज की शाम खूबसूरत है, आज कितना हंसी मुहूरत है", दोहराकर कार्यक्रम के माहौल को जीवंत बना दिया। इसके बाद मंच पर उपस्थित विभिन्न जनपदों के नामचीन कवियों ने अपनी-अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं।

बलरामपुर के श्याम 'शिल्प' ने अपना मनमोहक गीत पढ़ा, "तब तुम आना गांव ओ मितवा!" उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं का ध्यान खींचा। बहराइच के दुर्गेश बदनाम ने अपनी बेहतरीन हास्य रचनाओं से श्रोता समूह को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।

दिल्ली से आए मनोज मिश्र कप्तान ने राष्ट्रीय तेवर की रचना पढ़ी: "हमका भगवान दिहे सबकुछ, तू जौन देव चुपचाप धरी"। सिरसिया के संजय श्रीवास्तव ने अपनी पंक्तियां प्रस्तुत कीं: "मन में अन्तर्द्वन्द बहुत है, सामाजिक प्रतिबंध बहुत है"।

कैसरगंज के उमा प्रसाद वर्मा ने अपनी रचना से समां बांधा: "गुंडन कइहन ठोंकय ख़ातिर,योगी याद किहे जइहौ"। धर्मेंद्र मौर्य ने बेटी की विदाई के मार्मिक दृश्यों को मुक्त काव्य के माध्यम से जीवंत कर दिया। उनकी प्रस्तुति के दौरान श्रोताओं की आंखें नम हो गईं।

स्थानीय कवि आदर्श त्रिपाठी ने पढ़ा, "जो उलझे व्यर्थ विवादों में वे केवल कोलाहल होंगें"। कार्यक्रम के संचालक अनुपम पाठक ने भी अपनी कविता सुनाई: "एक राही चल पड़ा जबसे सफ़र में गीत के, है नहीं वह फ़िक्र में तब हार या फिर जीत के"।

आयोजक और कवि श्रवण कुमार सायक ने अपनी पंक्तियां साझा कीं, "हैं शब्द सब तुम्हारे वाणी भी है तुम्हारी"। उनकी प्रस्तुति के साथ आयोजन में कवियों की भागीदारी और साहित्यिक रंग और गहरा हुआ।

इस भव्य साहित्योत्सव में जीतेन्द्र मिश्र, नीलमणि शुक्ल, बब्बू शर्मा, देवकीनंदन मिश्र, धर्मेंद्र शुक्ल, राम निवास त्रिपाठी, शिवम मिश्र, अभय त्रिपाठी, अजय चौधरी, मिठाई लाल गुप्ता, अखिल और सुनील सहित क्षेत्र के तमाम गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में साहित्यप्रेमी और श्रोता भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में आयोजक श्रवण कुमार सायक ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन में शामिल हुए सभी लोगों का धन्यवाद किया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तृतीय साहित्य उत्सव और कवि सम्मेलन कहां आयोजित हुआ?

यह आयोजन श्रावस्ती के दूबकला में हुआ।

कार्यक्रम का आयोजन और संयोजन किसने किया?

कार्यक्रम का आयोजन और संयोजन युवा साहित्यकार एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिला महामंत्री श्रवण कुमार सायक ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ किसने किया?

मुख्य अतिथि दद्दन मिश्रा ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

कवि सम्मेलन का संचालन किसने किया?

कवि सम्मेलन का संचालन बिहार से आए कवि अनुपम पाठक 'अनुपम' ने किया।

#कवि सम्मेलन#श्रावस्ती

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