आरबीआई ने साढ़े तीन साल बाद रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया
RBI ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% किया रेपो रेट भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50% कर दिया है। करीब साढ़े तीन साल में यह पहली बढ़ोतरी है।
RBI ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% किया
रेपो रेट
भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50% कर दिया है। करीब साढ़े तीन साल में यह पहली बढ़ोतरी है।
मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन की बैठक के अंत में यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। RBI ने अपनी दो महीने में जारी होने वाली मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया।
यह कदम पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, महंगाई के बढ़ते दबाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये पर बने दबाव के बीच उठाया गया है। रेपो रेट बढ़ाने के साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख भी “न्यूट्रल” से बदलकर “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” कर दिया है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि कैलिब्रेटेड टाइटनिंग की तरफ बढ़ने का मतलब यह भी है कि “नजदीकी समय में रेट कट की संभावना नहीं है।” नीति के रुख में यह बदलाव अहम है, क्योंकि विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि आने वाली वित्तीय तिमाहियों में रेपो रेट में और बढ़ोतरी हो सकती है।
ग्रोथ और महंगाई का अनुमान
RBI ने वित्त वर्ष FY27 के लिए वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% रखा है। मल्होत्रा के मुताबिक, CPI महंगाई का अनुमान अब 5.2% रखा गया है।
इस तरह रेपो रेट का फैसला एक तरफ कर्ज की लागत बढ़ाता है, तो दूसरी तरफ इसमें ग्रोथ और महंगाई को लेकर RBI के ताजा अनुमान भी शामिल हैं। केंद्रीय बैंक ने यह नीति घोषणा ऐसे समय की है, जब वह महंगाई के दबाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये पर बने दबाव से निपट रहा है।
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इस दर में बदलाव का असर कर्ज और दूसरे वित्तीय प्रोडक्ट पर मिलने वाली ब्याज दरों पर पड़ सकता है। परिवारों के लिए इस बढ़ोतरी का असर होम लोन लेने, कार खरीदने, कोई प्रोजेक्ट शुरू करने या पैसे को फिक्स्ड डिपॉजिट में रखने के फैसले पर पड़ सकता है।
कर्ज लेने वालों पर क्यों पड़ सकता है असर
विश्लेषकों ने कहा कि RBI का नया रुख कर्ज पर ब्याज दरों को बढ़ा सकता है। अगर आने वाले महीनों में रेपो रेट में और बढ़ोतरी होती है, तो ब्याज का बोझ और बढ़ सकता है। विश्लेषकों ने इसको लेकर चेतावनी दी है।
विभवंगल अनुकूलकरा के मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ मौर्या ने कहा कि कर्ज लेने वालों को ज्यादा भुगतान के लिए तैयार रहना चाहिए। रेपो रेट बढ़ने के बाद फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और कार लोन महंगे हो सकते हैं।
मौर्या ने कहा कि बैंक इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट यानी EMI बढ़ा सकते हैं या लोन की अवधि लंबी कर सकते हैं। इसका अलग-अलग कर्ज लेने वालों पर अलग असर पड़ सकता है। कुछ लोगों को हर महीने ज्यादा रकम चुकानी पड़ सकती है, जबकि कुछ लोगों को अपना लोन चुकाने में ज्यादा समय लग सकता है।
इसका तुरंत असर खास तौर पर उन लोगों के लिए अहम हो सकता है, जो बड़ा कर्ज लेने पर विचार कर रहे हैं। ज्यादा ब्याज दर की वजह से घर खरीदने वाले संभावित खरीदार बड़ा होम लोन लेने से पहले दोबारा सोच सकते हैं। यह बात ऐसे समय में और अहम हो सकती है, जब प्रॉपर्टी की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और दुनिया भर में अनिश्चितता जारी है।
फोर्टेशिया रियल्टी के डायरेक्टर शिव गर्ग ने NDTV से कहा कि 5.5 per cent तक 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का रेजिडेंशियल मार्केट पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि EMI में तुरंत होने वाली बढ़ोतरी पहली बार घर खरीदने वालों के लिए बड़ी चिंता नहीं बन सकती, लेकिन प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतें और दुनिया भर में बनी अनिश्चितता कुछ खरीदारों को अपना खरीदारी का फैसला टालने के लिए मजबूर कर सकती हैं।
प्रॉपर्टी मार्केट के लिए अहम परीक्षा
रेपो रेट में यह बढ़ोतरी नवरात्रि और दिवाली के बीच आने वाले त्योहारी समय में हुई है। आम तौर पर यह रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट के लिए एक अहम सीजन होता है। ऐसे में कर्ज की लागत बढ़ने का असर खरीदारों और डेवलपर्स के लिए प्रॉपर्टी की बिक्री के इस अहम समय में ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
गर्ग ने कहा कि त्योहारी तिमाही प्रॉपर्टी की बिक्री के लिए बेहद अहम थी। उनका आकलन था कि रेपो रेट में बढ़ोतरी खरीदारों के फैसले पर असर डाल सकती है, भले ही EMI में तुरंत होने वाली बढ़ोतरी पहली बार घर खरीदने वालों के लिए बड़ी चिंता न बने।
तीर्थ रियल्टीज के मैनेजिंग डायरेक्टर विजय रौंडल ने कहा कि रेपो रेट को 5.5 per cent तक बढ़ाने से कंस्ट्रक्शन फाइनेंस और वर्किंग कैपिटल की लागत बढ़ जाएगी। इसका असर सिर्फ व्यक्तिगत कर्ज लेने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। कंस्ट्रक्शन से जुड़े डेवलपर्स और दूसरे कारोबारों को भी ज्यादा फाइनेंसिंग लागत का सामना करना पड़ सकता है।
ज्यादा ब्याज दर से निवेशकों के लिए भी समीकरण बदल सकता है। श्याम ग्रुप - धोलेरा SIR के डायरेक्टर हार्दिक शाह ने NDTV से कहा कि 5.5 per cent का रेपो रेट प्रॉपर्टी और फिक्स्ड-इनकम एसेट के बीच की तुलनात्मक आकर्षकता को बदल देगा।
कर्ज की ज्यादा लागत से ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील प्रॉपर्टी सेगमेंट की वैल्यूएशन पर दबाव पड़ सकता है। कमर्शियल रियल एस्टेट और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REITs को भी ज्यादा फाइनेंसिंग लागत का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, लंबे समय के लीज एग्रीमेंट कुछ स्थिरता दे सकते हैं।
यील्ड के प्रति संवेदनशील निवेशक कमर्शियल प्रॉपर्टी से ज्यादा रिटर्न की मांग कर सकते हैं। खास तौर पर ऑफिस और रिटेल एसेट से ज्यादा रिटर्न की मांग की जा सकती है। हालांकि, अगर अंतिम खरीदारों की मांग मजबूत बनी रहती है, तो अफोर्डेबल हाउसिंग और रेंटल हाउसिंग पर इसका असर तुलनात्मक रूप से कम रह सकता है।
बचत करने वालों के लिए इसका क्या मतलब
रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर सिर्फ कर्ज लेने वालों पर ही नहीं पड़ सकता। बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। इससे बचत करने वालों के लिए कम और मध्यम अवधि के फिक्स्ड डिपॉजिट ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं।
हालांकि, मौर्या ने बचत करने वालों को चेतावनी दी कि वे बिना सोचे-समझे ज्यादा ब्याज वाली फिक्स्ड डिपॉजिट का पीछा न करें। इसलिए जमा करने वालों को मिलने वाला संभावित फायदा एक चेतावनी के साथ आता है। उन्हें सिर्फ बताई गई ज्यादा ब्याज दर को देखकर फैसला लेने के बजाय पूरे फैसले का आकलन करना चाहिए।
परिवारों के लिए RBI की कार्रवाई कई वित्तीय फैसलों से जुड़ गई है। उन्हें यह तय करना होगा कि कर्ज लेना है या नहीं, घर या कार खरीदनी है या नहीं, कोई प्रोजेक्ट शुरू करना है या नहीं, पैसे को फिक्स्ड डिपॉजिट में लॉक करना है या इंतजार करना है। रेपो रेट 5.25 per cent से बढ़कर 5.5 per cent हो गया है, लेकिन इसके संभावित असर का दायरा कर्ज, प्रॉपर्टी की खरीद, कंस्ट्रक्शन फाइनेंस, निवेश और बचत तक फैला हुआ है।
RBI की रेपो रेट बढ़ोतरी की समय-सीमा
इससे पहले रेपो रेट में बढ़ोतरी फरवरी 2023 में हुई थी। उस समय RBI ने रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी करते हुए इसे 6.50% कर दिया था। केंद्रीय बैंक ने 2023-24 के दौरान रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। इसके बाद 2025 में उसने रेपो रेट में कटौती का चक्र शुरू किया।
इसलिए ताजा बढ़ोतरी उस अवधि के बाद बदलाव को दिखाती है, जिसमें पहले रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ और उसके बाद कटौती का चक्र शुरू हुआ। RBI अब न्यूट्रल रुख से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग की तरफ बढ़ गया है। वहीं, गवर्नर ने कहा है कि नजदीकी समय में रेपो रेट में कटौती की उम्मीद नहीं है।
विश्लेषकों की ओर से आगे और बढ़ोतरी की संभावना को लेकर चेतावनी दिए जाने के बीच कर्ज लेने वालों, प्रॉपर्टी खरीदारों, डेवलपर्स, निवेशकों और बचत करने वालों को अपने वित्तीय फैसलों में बदले हुए रेपो रेट के माहौल का हिसाब रखना होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
RBI ने रेपो रेट कितना बढ़ाया है?
RBI ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है।
रेपो रेट में यह बढ़ोतरी कब हुई?
करीब साढ़े तीन साल में यह रेपो रेट की पहली बढ़ोतरी है।
RBI ने रेपो रेट क्यों बढ़ाया?
यह फैसला पश्चिम एशिया के संघर्ष, बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये पर दबाव के बीच लिया गया।
रेपो रेट बढ़ने से कर्ज लेने वालों पर क्या असर पड़ सकता है?
फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और कार लोन महंगे हो सकते हैं। बैंक EMI बढ़ा सकते हैं या लोन की अवधि लंबी कर सकते हैं।
FY27 के लिए RBI ने GDP ग्रोथ और महंगाई का अनुमान कितना रखा है?
RBI ने FY27 के लिए वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% और CPI महंगाई का अनुमान 5.2% रखा है।
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