राजीव खंडेलवाल ने पत्नी को 'गुलाम' बताया, रिश्तों पर नई बहस शुरू
राजीव खंडेलवाल ने कहा, "मैं अपनी पत्नी मंजिरी का 'गुलाम' हूं"; एक्सपर्ट ने समझाया रिश्तों की साइकोलॉजी राजीव खंडेलवाल का 'प्यार में गुलामी' वाला बयान रिश्तों पर नई बहस शुरू कर गया एक्टर राजीव
राजीव खंडेलवाल ने कहा, "मैं अपनी पत्नी मंजिरी का 'गुलाम' हूं"; एक्सपर्ट ने समझाया रिश्तों की साइकोलॉजी
राजीव खंडेलवाल का 'प्यार में गुलामी' वाला बयान रिश्तों पर नई बहस शुरू कर गया
एक्टर राजीव खंडेलवाल ने हाल ही में अपनी पत्नी मंजिरी कामतकर के साथ अपने रिश्ते को प्यार भरी "गुलामी" के रूप में बताया। उन्होंने ये बात मजाकिया अंदाज में कही ताकि उनकी मंजिरी के प्रति उनकी डिवोशन को समझाया जा सके। अपने गेम शो तुम हो ना – घर की सुपरस्टार में उन्होंने कहा, "मैं मंजिरी से डरता नहीं हूं कि मुझे कोई डर सताता है। मैं उससे प्यार करता हूं। और जब आप किसी से प्यार करते हैं, तो उनके प्रति एक तरह का डर भी होता है।" 2011 से शादीशुदा खंडेलवाल के इस बयान ने रिश्तों और उनकी साइकोलॉजी पर एक बड़ी चर्चा छेड़ दी है।
छोटी बातें, बड़ा मतलब
खंडेलवाल ने बताया कि उनकी "गुलामी" उनकी रोजमर्रा की छोटी-छोटी देखभाल में नजर आती है। चाय और ब्रेकफास्ट बनाने से लेकर मंजिरी की शाम की स्नैक की ख्वाहिश पूरी करने तक, उन्होंने बताया कि ये सब उनके शादीशुदा जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा, "उसे चाय बहुत पसंद है, खासकर वो जो मैं बनाता हूं, तो मैं उसके लिए चाय भी बनाता हूं।" उन्होंने ये भी जोड़ा कि ये सब मजबूरी नहीं बल्कि प्यार और ध्यान देने का नतीजा है।
प्यार मजबूरी नहीं, इच्छा से होता है
साइकोथेरेपिस्ट और रिलेशनशिप कोच डेलनना राजेश ने खंडेलवाल के बयान पर कहा कि भले ही उन्होंने "गुलाम" शब्द को प्यार भरे अंदाज में इस्तेमाल किया हो, लेकिन हेल्दी रिश्ते इच्छा पर टिके होते हैं, न कि मजबूरी पर। उन्होंने समझाया, "प्यार का मतलब खुद को किसी और के लिए खो देना नहीं है। ये उस इंसान के लिए अपनी मर्जी से मौजूद रहने का नाम है, जिसे आपने चुना है।" उन्होंने बताया कि रोजमर्रा के काम, जैसे चाय बनाना या कपड़े तह करना, सिर्फ काम नहीं होते बल्कि ये भावनात्मक संदेश देते हैं कि आप परवाह करते हैं।
बराबरी नहीं, बैलेंस जरूरी
डेलनना ने आधुनिक रिश्तों में एक आम गलतफहमी पर भी बात की कि बराबरी का मतलब जिम्मेदारियों को 50-50 में बांटना है। उन्होंने बताया कि रिश्तों में बैलेंस ज्यादा जरूरी है। "जिंदगी कभी बराबर नहीं होती। ऐसे समय आते हैं जब एक पार्टनर 80% जिम्मेदारी उठाता है और दूसरा सिर्फ 20%। फिर किसी और समय ये रोल्स बदल जाते हैं।" उन्होंने कहा कि ये लचीलापन, सख्त बराबरी से ज्यादा हेल्दी और मजबूत रिश्ते बनाता है।
इन छोटे इशारों का महत्व
खंडेलवाल ने जिन छोटे-छोटे कामों का जिक्र किया, वो रिश्तों में इमोशनल सेफ्टी और भरोसा बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। डेलनना ने बताया, "जब आपको सही मायने में cared for महसूस होता है, तो आपका नर्वस सिस्टम शांत होता है, स्ट्रेस कम होता है और भरोसा बढ़ता है।" समय के साथ ये छोटे इशारे इंसान को वो भरोसा देते हैं जिसकी हर किसी को जरूरत होती है: कि वो देखे जा रहे हैं, उनकी वैल्यू है और उन्हें सपोर्ट किया जा रहा है।
खंडेलवाल की मजाकिया कंफेशन ने प्यार और पार्टनरशिप की गहराई पर एक नई चर्चा शुरू की है। ये याद दिलाता है कि अक्सर सबसे छोटे इशारे ही सबसे गहरी भावनात्मक अहमियत रखते हैं।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजीव खंडेलवाल ने अपनी पत्नी को क्या बताया?
राजीव खंडेलवाल ने अपनी पत्नी मंजिरी को 'गुलाम' बताया।
खंडेलवाल ने अपने रिश्ते को कैसे समझाया?
उन्होंने अपने रिश्ते को प्यार भरी 'गुलामी' के रूप में समझाया।
क्या खंडेलवाल का 'गुलाम' कहना मजाक था?
हाँ, उन्होंने ये बात मजाकिया अंदाज में कही थी ताकि उनकी पत्नी के प्रति डिवोशन को समझाया जा सके।
रिश्तों में बराबरी का क्या मतलब है?
बराबरी का मतलब जिम्मेदारियों को 50-50 में बांटना नहीं, बल्कि बैलेंस बनाना ज्यादा जरूरी है।
छोटी-छोटी देखभाल का रिश्तों में क्या महत्व है?
ये छोटी-छोटी देखभाल इमोशनल सेफ्टी और भरोसा बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
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