प्रतापगढ़ में बेसहारा गायों की समस्या, समाज से मदद की अपील
प्रतापगढ़ के पट्टी कोतवाली इलाके में गाय की हालत को लेकर स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है।
प्रतापगढ़ के पट्टी कोतवाली इलाके में गाय की हालत को लेकर स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। नगर पंचायत पट्टी के नगरवासियों का कहना है कि गौ माता किसी राजनीतिक पार्टी, संगठन या किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की है। उनका मानना है कि सिर्फ सरकार या नगर पंचायत पर जिम्मेदारी डालकर समाज अपने फर्ज से मुंह नहीं मोड़ सकता।
नगरवासियों ने कहा कि आज बहुत से लोग खुद को हिंदू तो बताते हैं, लेकिन गाय की सेवा के मामले में जरूरी संवेदनशीलता नहीं दिखाते। कई लोग गाय को तब तक पालते हैं जब तक वह दूध देती है, लेकिन जैसे ही दूध देना बंद हो जाता है, उसे सड़कों पर बेसहारा छोड़ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सड़कों पर भूखी-प्यासी घूमती गायों को देखकर हर संवेदनशील इंसान को इस पर सोचना चाहिए।
नगरवासियों ने बताया कि अगर किसी को असली हालात पर शक है तो वह गौशाला जाकर खुद देख सकता है। उनके मुताबिक गौशाला में समाज के अलग-अलग तबकों के लोगों की मदद के सबूत मिलते हैं। ऐसे में सिर्फ सरकार को दोषी ठहराने की बजाय समाज के सक्षम लोगों को भी आगे आकर गायों के चारा, पानी और इलाज में मदद करनी चाहिए।
नगरवासियों का कहना है कि गाय को धार्मिक आस्था में माता का दर्जा दिया गया है, इसलिए गौ सेवा सिर्फ भाषणों और नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ पशुओं के प्रति संवेदना और जिम्मेदारी व्यवहार में भी दिखनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि बेसहारा गायों के लिए जितना हो सके चारा-पानी का इंतजाम करें और दूध देना बंद होने के बाद पशुओं को सड़कों पर छोड़ने की आदत पर रोक लगाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रतापगढ़ में गायों की समस्या क्या है?
पट्टी कोतवाली इलाके में बहुत सी गायें बेसहारा हो गई हैं। लोग दूध देने वाली गायों को तो पालते हैं, लेकिन जैसे ही दूध देना बंद हो जाता है, उन्हें सड़कों पर भूखी-प्यासी छोड़ दिया जाता है।
क्या सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी है गायों की देखभाल करना?
नहीं, नगरवासियों का कहना है कि गौ सेवा पूरे समाज की जिम्मेदारी है, न कि सिर्फ सरकार या नगर पंचायत की। समाज के सक्षम लोगों को भी आगे आकर गायों के चारा, पानी और इलाज में मदद करनी चाहिए।
नगरवासियों ने क्या अपील की है?
उन्होंने लोगों से कहा है कि बेसहारा गायों के लिए जितना हो सके चारा-पानी का इंतजाम करें। साथ ही दूध देना बंद होने के बाद पशुओं को सड़कों पर छोड़ने की आदत पर रोक लगाएं।
गौशाला में क्या देखने को मिलता है?
गौशाला में समाज के अलग-अलग तबकों के लोगों द्वारा गायों की मदद के सबूत मिलते हैं, जो दिखाता है कि धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ पशुओं के प्रति संवेदना व्यवहार में भी दिखाई दे सकती है।
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