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पटना में साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 42.65 करोड़ रुपए का लेन-देन

पटना में साइबर ठगी के एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ा हुआ है जिसके जरिए 42.65 करोड़ रुपए की साइबर ठगी की रकम का लेन-देन किया गया।

पटना में साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 42.65 करोड़ रुपए का लेन-देन
Image credit: News Darpan Team

पटना में साइबर ठगी के एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ा हुआ है जिसके जरिए 42.65 करोड़ रुपए की साइबर ठगी की रकम का लेन-देन किया गया। क्राइम ब्रांच ने इस गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो फर्जी फर्मों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधों से जुड़ी रकम को ट्रांसफर करने काम करते थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शाकिब खान निवासी फ्रेजर रोड, पटना और संदीप कुमार निवासी बंदर बगीचा, पटना के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी फर्जी फर्मों के नाम पर करेंट और कॉर्पोरेट बैंक खाते खुलवाते थे और इन खातों के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी, ट्रेडिंग फ्रॉड, कोरियर ठगी और वायरसयुक्त APK के जरिए होने वाली साइबर ठगी की रकम का लेन-देन करते थे।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए हैं जिनमें लैपटॉप, POS मशीन, छह मोबाइल, छह पेन ड्राइव, कार्ड रीडर, डिजिटल सिग्नेचर डिवाइस, चिप, चेकबुक, एटीएम और QR कोड शामिल हैं।

इस मामले की शुरुआत 16 जुलाई को प्रतापगढ़ के कोतवाली देहात में दर्ज साइबर फ्रॉड की शिकायत से हुई थी। भुवालपुर डोमीपुर निवासी डॉ. सुमनेश सिंह के बैंक खाते से 2.50 लाख रुपए निकाल लिए गए थे। इसी शिकायत की जांच के दौरान पूरे गिरोह का खुलासा हुआ।

पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी जाली किरायानामा, फर्जी उद्यम, MSME और GST दस्तावेजों के जरिए कर्मचारियों और परिचितों के नाम पर फर्में बनवाते थे। इन्हीं फर्मों के आधार पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी की रकम मंगाई जाती थी और इस पर कमीशन लिया जाता था। जांच में पाया गया कि एक ही पते और मोबाइल नंबर पर कई फर्मों का पंजीकरण किया गया था।

प्रारंभिक जांच में 109 फर्मों के खातों से करीब 42.65 करोड़ रुपए के लेन-देन का पता चला है। समन्वय पोर्टल पर देखा गया कि ये खाते और मोबाइल नंबर देशभर की 500 से अधिक साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े हुए मिले हैं। पुलिस अब अन्य राज्यों की साइबर इकाइयों से समन्वय करके जांच को आगे बढ़ा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना में साइबर ठगी का यह गिरोह क्या काम करता था?

ये गिरोह फर्जी फर्मों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधों से जुड़ी रकम को ट्रांसफर करते थे। वो ऑनलाइन सट्टेबाजी, ट्रेडिंग फ्रॉड, कोरियर ठगी और वायरस वाले APK के जरिए होने वाली साइबर ठगी की रकम का लेन-देन करते थे और इस पर कमीशन लेते थे।

कुल कितनी रकम का लेन-देन इस गिरोह के जरिए हुआ?

प्रारंभिक जांच में 109 फर्मों के खातों से करीब 42.65 करोड़ रुपए के लेन-देन का पता चला है।

इस मामले की शुरुआत कैसे हुई?

16 जुलाई को प्रतापगढ़ के कोतवाली देहात में दर्ज साइबर फ्रॉड की शिकायत से शुरुआत हुई। एक डॉक्टर के बैंक खाते से 2.50 लाख रुपए निकाल लिए गए थे। इसी शिकायत की जांच के दौरान पूरे गिरोह का खुलासा हुआ।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से क्या-क्या बरामद किया?

पुलिस ने लैपटॉप, POS मशीन, छह मोबाइल, छह पेन ड्राइव, कार्ड रीडर, डिजिटल सिग्नेचर डिवाइस, चिप, चेकबुक, एटीएम और QR कोड शामिल कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए हैं।

ये खाते कितनी साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े हुए थे?

समन्वय पोर्टल पर देखा गया कि ये खाते और मोबाइल नंबर देशभर की 500 से अधिक साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े हुए मिले हैं।

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