एनएसई ने आईपीओ के लिए फाइल किया, बन सकता है सबसे बड़ा ऑफर
एनएसई ने आईपीओ के लिए फाइल किया: क्या ये भारत का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफरिंग बन सकता है?
कई सालों की देरी और रेगुलेटरी चुनौतियों के बाद, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई), जो भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, ने आखिरकार अपने आईपीओ (इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग) के लिए ड्राफ्ट पेपर फाइल कर दिए हैं। बुधवार देरात फाइल किए गए इस ड्राफ्ट में 14.89 करोड़ शेयरों की बिक्री (ओएफएस) का प्रस्ताव रखा गया है, जो कंपनी में लगभग 6% हिस्सेदारी के बराबर है। मार्केट के अनुमान के मुताबिक, इस ऑफरिंग से 20,000 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं, और कुछ प्रोजेक्शन इसे 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना जताते हैं। अगर ये ऊपरी स्तर पर प्राइस होता है, तो ये भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है।
ओएफएस का मतलब है प्रमोटर्स या शुरुआती निवेशकों द्वारा मौजूदा शेयरों की बिक्री, न कि नए शेयर जारी करना। भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ 2024 में हुआ Hyundai Motor India का 27,870 करोड़ रुपये का ऑफर था, जो पूरी तरह से एक ओएफएस था। अगर एनएसई का वैल्यूएशन प्राइवेट मार्केट के लेवल से मेल खाता है, जहां एनएसई के शेयर फिलहाल करीब 2,035 रुपये पर ट्रेड हो रहे हैं, तो इसका आईपीओ साइज 30,000 करोड़ रुपये तक जा सकता है।
एनएसई का अनुमानित वैल्यूएशन 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है, जो इसे भारत की 10 सबसे मूल्यवान लिस्टेड कंपनियों में शामिल कर देगा। यह इंफोसिसे भी ऊपर होगा, जिसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन 4.6 लाख करोड़ रुपये है। भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज 18 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ पहले स्थान पर है, उसके बाद एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल हैं।
भारत के फाइनेंशियल मार्केट्स में एनएसई की पकड़ इसके प्रीमियम वैल्यूएशन का मुख्य कारण है। FY26 तक, एनएसई का विभिन्न ट्रेडिंग सेगमेंट्स में दबदबा था: कैश इक्विटीज में 92.99%, इक्विटी फ्यूचर्स में 99.79%, इक्विटी ऑप्शंस में 74.71%, और एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी ऑप्शंस में 100%। इसके अलावा, एनएसई लगातार सात सालों से इक्विटी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा एक्सचेंज रहा है।
एनएसई की फाइनेंशियल परफॉर्मेंस इसकी मजबूती को और दिखाती है। FY26 में, एक्सचेंज ने 16,601 करोड़ रुपये की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू रिपोर्ट की, जो FY24 के 14,780 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसका नेट प्रॉफिट FY24 के 8,305 करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 10,302 करोड़ रुपये हो गया। इसके मुकाबले बीएसई ने FY26 में 4,834 करोड़ रुपये की रेवेन्यू रिपोर्ट की, जो एनएसई की लीडरशिप को और मजबूत करता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि एनएसई का वैल्यूएशन, जो इसके अनुमानित FY26 प्रॉफिट आफ्टर टैक्स का लगभग 40 गुना है, ग्लोबल एक्सचेंज पीयर्स के साथ मेल खाता है। इसकी मजबूत प्रॉफिटेबिलिटी, मार्केट में दबदबा, और भारत के रिटेल इन्वेस्टर बेस की तेजी से बढ़ती संख्या इसे एक लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के तौर पर आकर्षक बनाती है। डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में ग्लोबल लीडरशिप और डाइवर्सिफाइड रेवेन्यू स्ट्रीम्स इसकी स्थिति को और मजबूत करते हैं।
अगर ये आईपीओ सफल होता है, तो एनएसई भारत में पब्लिक ऑफरिंग्स के लिए नए बेंचमार्क सेट कर सकता है और देश के फाइनेंशियल इकोसिस्टम में अपनी अहमियत को और पुख्ता कर सकता है।
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