साइमन जॉनसन बने यूके के नए एआई इकोनॉमिक्स इंस्टीट्यूट के चेयर
नोबेल विजेता साइमन जॉनसन ने चीन की 'ओवर-ऑटोमेशन' समस्या और एआई रेस पर दी राय नोबेल विजेता साइमन जॉनसन बने यूके के नए एआई इकोनॉमिक्स इंस्टीट्यूट के चेयर 2024 के अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार विजेता
नोबेल विजेता साइमन जॉनसन ने चीन की 'ओवर-ऑटोमेशन' समस्या और एआई रेस पर दी राय
नोबेल विजेता साइमन जॉनसन बने यूके के नए एआई इकोनॉमिक्स इंस्टीट्यूट के चेयर
2024 के अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार विजेता और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के प्रोफेसर साइमन जॉनसन को यूनाइटेड किंगडम के नए एआई इकोनॉमिक्स इंस्टीट्यूट का चेयर नियुक्त किया गया है। ब्रिटिश सरकार ने 8 जून को यह घोषणा की।
दूरदर्शी नियुक्ति
आईएमएफ (इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड) के पूर्व चीफ इकोनॉमिस्ट रहे जॉनसन ने संस्थानों के राष्ट्रीय समृद्धि पर प्रभाव पर अपने रिसर्च के लिए दुनियाभर में पहचान बनाई। आर्थिक सिस्टम और संस्थागत ढांचे में उनकी विशेषज्ञता से उम्मीद है कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आर्थिक प्रभावों को समझने में इंस्टीट्यूट का मार्गदर्शन करेंगे।
एआई इकोनॉमिक्स इंस्टीट्यूट का मकसद एआई के अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करना है। इसका फोकस ऐसी नीतियां बनाने पर होगा, जो एआई के फायदों को बढ़ा सकें और जोखिमों को कम कर सकें। जॉनसन की लीडरशिप को इस मिशन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, खासकर जब दुनिया एआई टेक्नोलॉजी के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को अपनाने की कोशिश कर रही है।
ग्लोबल एआई रेस का संदर्भ
जॉनसन की यह नियुक्ति ऐसे वक्त में हुई है, जब एआई डेवलपमेंट में ग्लोबल कॉम्पिटिशन तेज हो रहा है। चीन और अमेरिका जैसे देश इस दौड़ में आगे निकलने की होड़ में हैं। हाल ही में हांगकांग में UBS एशियन इन्वेस्टमेंट कॉन्फ्रेंस के दौरान जॉनसन ने चीन के एआई अप्रोच पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चीन का "ओवर-ऑटोमेशन" का झुकाव गैर-जरूरी प्रक्रियाओं और सामाजिक चुनौतियों को जन्म दे सकता है।
एआई इकोनॉमिक्स इंस्टीट्यूट के चेयर के रूप में जॉनसन से उम्मीद है कि वे ऐसे मुद्दों को हल करेंगे और यह बताएंगे कि देश किस तरह टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट, आर्थिक स्थिरता और समानता के बीच संतुलन बना सकते हैं।
इस इंस्टीट्यूट की स्थापना से यह साफ है कि यूके एआई और उसके आर्थिक प्रभावों पर ग्लोबल चर्चा को आकार देने के लिए प्रतिबद्ध है। जॉनसन की भूमिका न केवल यूके की नीतियों पर असर डालेगी, बल्कि इस अहम क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी प्रभावित करेगी।
स्रोत: South China Morning Post
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