सिद्धवाटम मंदिर में नया ध्वजस्तंभ स्थापित, विकास की योजना आगे
नंद्याल जिले के सिद्धवाटम मंदिर में नए ध्वजस्तंभ की स्थापना की गई। मंदिर ट्रस्ट ने विकास योजनाओं और भक्तों के लिए सुविधाओं का ऐलान किया।
सोमवार सुबह 10.51 बजे सिद्धवाटम क्षेत्र के श्री कामाक्षी समेत सिद्धवटेश्वर स्वामी मंदिर में नए ध्वजस्तंभ की स्थापना की गई। श्रीशैलम ने जिस मंदिर को अपनाया है, वहां तीन दिन की तैयारी की रस्में पूरी होने के बाद यह काम हुआ।
स्थापना से पहले उस सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और जप किया गया, और शास्त्रों के मुताबिक इसे लगाया गया। ध्वजस्तंभ यानी ध्वजदंड को मंदिर के चार अहम हिस्सों में गिना जाता है, जिसमें गर्भगृह (sanctum sanctorum), मूल मूर्ति (मुख्य देवता) और बलि पीठम (बलि की वेदी) शामिल हैं।
मंदिर परंपरा में महत्व
आगम शास्त्र इन चार चीजों को खास अहमियत देते हैं, और मंदिर के त्योहार और रस्में करने से पहले ध्वजारोहण, यानी झंडा फहराने की रस्म, जरूरी होती है। इसलिए ध्वजस्तंभ मंदिर के कामकाज के लिए बेहद जरूरी है।
स्थापना के बाद पुजारियों ने बलिहरण किया, जिसमें आठों दिशाओं के देवताओं को रस्मी चढ़ावा दिया गया, फिर पूर्णाहुति की गई, यानी पवित्र अग्नि में आखिरी आहुति।
विकास की योजनाओं का ऐलान
मंदिर ट्रस्ट बोर्ड के चेयरमैन पोथुगुंटा रमेश नायडू और एग्जीक्यूटिव ऑफिसर एम. श्रीनिवास राव दूसरी हस्तियों के साथ समारोह में शामिल हुए। रमेश नायडू ने ऐलान किया कि सिद्धवाटम और ज्योति मंदिरों को चरणों में विकसित किया जाएगा, और ज्यादा भक्तों को आकर्षित करने के लिए सही प्रचार की योजना है।
श्रीनिवास राव ने कहा कि जब से मंदिरों को श्रीशैलम मंदिर ने अपनाया है, सभी रस्में और सेवाएं आगम परंपराओं के मुताबिक सख्ती से की जा रही हैं। उन्होंने भक्तों को भरोसा दिलाया कि जगह पर बुनियादी सुविधाएं भी दी जाएंगी।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सिद्धवाटम मंदिर में नया ध्वजस्तंभ कब लगाया गया?
सोमवार सुबह 10.51 बजे सिद्धवाटम क्षेत्र के श्री कामाक्षी समेत सिद्धवटेश्वर स्वामी मंदिर में नए ध्वजस्तंभ की स्थापना की गई।
मंदिर में ध्वजस्तंभ क्यों जरूरी होता है?
ध्वजस्तंभ मंदिर के चार अहम हिस्सों में गिना जाता है। आगम शास्त्र में इसे खास अहमियत दी जाती है और कोई भी मंदिर की रस्म करने से पहले ध्वजारोहण की रस्म जरूरी होती है।
ध्वजस्तंभ स्थापना के बाद क्या-क्या रस्में की गईं?
स्थापना के बाद पुजारियों ने बलिहरण किया, जिसमें आठों दिशाओं के देवताओं को रस्मी चढ़ावा दिया गया, फिर पवित्र अग्नि में पूर्णाहुति की गई।
मंदिर ट्रस्ट के पास आगे क्या योजनाएं हैं?
मंदिर ट्रस्ट बोर्ड की योजना है कि सिद्धवाटम और ज्योति मंदिरों को चरणों में विकसित किया जाएगा, ज्यादा भक्तों को आकर्षित करने के लिए सही प्रचार और बुनियादी सुविधाएं दी जाएंगी।
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