मौलाना अबू तालिब रहमानी बोले, बेटियों की सुरक्षा में देश की व्यवस्था नाकाम
मौलाना अबू तालिब रहमानी ने कहा है कि बेटी की कोई जाति या धर्म नहीं होता। हिंदू हो या मुस्लिम, हर बेटी की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी पूरे समाज की है।
मौलाना अबू तालिब रहमानी ने कहा है कि बेटी की कोई जाति या धर्म नहीं होता। हिंदू हो या मुस्लिम, हर बेटी की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी पूरे समाज की है। उन्होंने कहा कि बच्चियों की हिफाजत के मामले में देश की व्यवस्था नाकाम साबित हो रही है और इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और कोलकाता के इस्लामी विद्वान मौलाना अबू तालिब रहमानी भोपाल में आयोजित धार्मिक एवं इस्लाही जलसा-ए-आम को संबोधित कर रहे थे। महिलाओं की सुरक्षा और बच्चियों के लापता होने की घटनाओं पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, “बेटी तो बेटी होती है, वह हिंदू हो या मुस्लिम, उसकी सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी पूरे समाज की है।”
मौलाना रहमानी ने कहा कि बेटियों की हिफाजत किसी एक धर्म या समुदाय का मुद्दा नहीं है। यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने महिलाओं और बच्चियों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बच्चियों की सुरक्षा के मामले में देश की व्यवस्था नाकाम साबित हो रही है। उनके मुताबिक, बेटियों की सुरक्षा को धर्म और मजहब के दायरे में बांटकर नहीं देखा जाना चाहिए। हर बच्ची की सुरक्षा समाज और शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
जलसा-ए-आम में मौलाना रहमानी ने मुस्लिम समाज की सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों की सहायता केवल भीख देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जरूरतमंदों को भीख नहीं, सम्मानजनक और व्यवस्थित मदद मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज को ऐसी व्यवस्थित व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को सम्मान के साथ मदद मिल सके। इस मदद का मकसद उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी होना चाहिए।
मौलाना रहमानी ने समाज के सक्षम लोगों से जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस जिम्मेदारी को सामूहिक रूप से निभाया जाना चाहिए।
भोपाल के इस जलसे में उनके संबोधन का केंद्र महिलाओं की हिफाजत, बेटियों की सुरक्षा, सामाजिक सुधार और जरूरतमंदों के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी रहा। उन्होंने समाज से इस पूरे मुद्दे पर आत्ममंथन करने और बेटियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मौलाना अबू तालिब रहमानी ने बेटियों की सुरक्षा को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा में देश की व्यवस्था नाकाम साबित हो रही है और इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
उन्होंने कहा कि हर बेटी की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी पूरे समाज की है, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम।
मौलाना रहमानी ने बेटियों की सुरक्षा को धर्म से जोड़ने पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा को धर्म या मजहब के दायरे में बांटकर नहीं देखना चाहिए।
जरूरतमंद लोगों की मदद को लेकर मौलाना रहमानी ने क्या अपील की?
उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों को भीख के बजाय सम्मानजनक और व्यवस्थित मदद मिलनी चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
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