सीजेपी समर्थकों के जुटते ही मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क गेट बंद किए
मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क के गेट बंद किए, सीजेपी समर्थक प्रदर्शन के लिए जुटे अभिजीत दीपके कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक अपने तय प्रदर्शन से पहले जुटना शुरू हुए तो मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में
अभिजीत दीपके
कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक अपने तय प्रदर्शन से पहले जुटना शुरू हुए तो मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में आने-जाने के सभी रास्ते बंद कर दिए और बैरिकेड लगा दिए। गेट नंबर 6 के पास भारी सुरक्षा भी तैनात की गई है। इसके अलावा, इलाके में पुलिस के अतिरिक्त जवान भी बुलाए गए हैं।
सीजेपी के नाम से भी जानी जाने वाली इस पार्टी ने ऐलान किया है कि वह 2 अक्टूबर से शिवाजी पार्क में अपना “जेल भरो आंदोलन” शुरू करेगी। प्रस्तावित प्रदर्शन गेट नंबर 6 पर 4 बजे रखा गया है, हालांकि पुलिस ने इस जगह पर कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी है।
इस विवाद में कई मुद्दे एक साथ जुड़ गए हैं। इनमें चुनाव आयोग से जुड़ी सीजेपी की मांगें, शोर और ट्रैफिक को लेकर स्थानीय लोगों की आपत्तियां, शिवाजी पार्क के इस्तेमाल पर लगी पाबंदियां और वरिष्ठ लेखक जावेद अख्तर से जुड़ी सार्वजनिक बहस शामिल हैं।
सीजेपी समर्थकों के जुटने पर पुलिस ने गेट बंद किए
मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क के आसपास जवान तैनात कर दिए हैं और प्रदर्शनकारियों को मैदान में दाखिल होने से रोकने के लिए कदम उठाए हैं। पार्क में आने-जाने के सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं और मैदान के चारों तरफ बैरिकेड लगाए गए हैं।
शिवाजी पार्क के आसपास हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। अतिरिक्त बल भी मौके पर बुलाया गया है। दादर रेलवे स्टेशन पर भी सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
पुलिस ने आपात स्थिति के लिए तैयारियां की हैं और गेट नंबर 6 पर भारी सुरक्षा तैनात की है। पुलिस की यह कार्रवाई शिवाजी पार्क में सभा के लिए इजाजत नहीं मिलने और पार्टी के उसी जगह पर कार्यक्रम जारी रखने के फैसले से जुड़ी है।
रिपोर्टों में कहा गया है कि 4 बजे होने वाले प्रदर्शन से पहले लोग कई जगहों पर जुटना शुरू हो गए थे। सभा की इजाजत नहीं होने के कारण यह संभावना भी बताई गई कि प्रदर्शन शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया जा सकता है।
पुलिस ने आयोजकों से कहा है कि वे किसी दूसरी जगह पर प्रदर्शन के लिए आवेदन करें। पुलिस की इस मनाही के बावजूद सीजेपी ने साफ कर दिया है कि वह शिवाजी पार्क में ही आंदोलन करने का इरादा रखती है।
सीजेपी की क्या मांगें हैं
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के मुताबिक, प्रदर्शन की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। संगठन ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए हैं।
सीजेपी ने आंदोलन के लिए तीन मुख्य मांगें रखी हैं। पहली मांग ज्ञानेश कुमार का तुरंत इस्तीफा और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की है।
दूसरी मांग स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया को तुरंत रोकने और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की है। तीसरी मांग चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को खत्म करने की है।
संगठन ने नियुक्तियों के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था की मांग की है, जिसमें सिविल सोसाइटी की भागीदारी हो। इन मांगों के चलते मुंबई में प्रस्तावित प्रदर्शन चुनाव आयोग, मतदाता सूचियों की तैयारी और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है।
उपलब्ध रिपोर्टों में प्रदर्शन के शिवाजी पार्क में होने की पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्टों से इतना पता चलता है कि इस जगह के लिए कार्यक्रम का ऐलान किया गया था, पुलिस ने इजाजत देने से इनकार किया था और तय समय से पहले समर्थक इलाके की ओर बढ़ने लगे थे।
शिवाजी पार्क पर ही क्यों है पूरा विवाद
मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन की इजाजत देने से इनकार करते हुए इलाके की प्रकृति, संभावित शोर, ट्रैफिक में रुकावट और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही का हवाला दिया है। शिवाजी पार्क के आसपास रहने वाले लोगों ने भी प्रस्तावित सभा का विरोध किया है। उनका कहना है कि बड़ी सभा से इलाके की शांति प्रभावित हो सकती है और ट्रैफिक के साथ-साथ रोजमर्रा की जिंदगी पर भी असर पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को ज्ञापन देकर प्रदर्शन रोकने के लिए कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बड़ी सभाओं की वजह से इलाके में रहने वाले और वहां से गुजरने वाले लोगों को परेशानी होती है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा कि लोग पार्क में टहलने आते हैं और हाल के समय में वहां प्रदर्शन ज्यादा होने लगे हैं। उस निवासी ने कहा कि ऐसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे शांति भंग होती है और लोगों को परेशानी होती है।
स्थानीय एसोसिएशन ने मुंबई पुलिस को पत्र लिखकर कहा है कि किसी को भी इस जगह पर प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। स्थानीय लोगों ने आसपास मौजूद स्कूलों और अस्पतालों का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि प्रदर्शनों की वजह से लोगों के लिए आना-जाना मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आयोजकों को इसके बजाय प्रदर्शन के लिए आजाद मैदान का इस्तेमाल करना चाहिए। यह सुझाव स्थानीय निवासियों की तरफ से आया है, जबकि पुलिस ने अलग से आयोजकों को किसी दूसरी जगह के लिए आवेदन करने की सलाह दी है।
स्थानीय लोगों की आपत्तियां सिर्फ सभा में आने वाली भीड़ के संभावित आकार तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने गैर-खेल गतिविधियों के लिए शिवाजी पार्क के इस्तेमाल से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठाए हैं।
विवाद में कोर्ट के आदेश और पाबंदियों का हवाला
स्थानीय लोगों का कहना है कि गैर-खेल गतिविधियों के लिए शिवाजी पार्क के इस्तेमाल पर नियमों के तहत सीमा तय है और ऐसी गतिविधियों की इजाजत एक साल में सीमित संख्या में दिनों के लिए ही दी जा सकती है। इस दावे के समर्थन में उन्होंने 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश और महाराष्ट्र सरकार के 2016 के फैसले का हवाला दिया है।
कार्यक्रम की इजाजत से इनकार करते हुए मुंबई पुलिस ने भी 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश का जिक्र किया है। पुलिस ने इजाजत नहीं देने की वजह बताते हुए इलाके को “शांत क्षेत्र” बताया है।
इस तरह सीजेपी की राजनीतिक मांगों के साथ-साथ शिवाजी पार्क पर लगी पाबंदियां भी विवाद का हिस्सा बन गई हैं। आयोजकों के लिए यह जगह चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ उनके आंदोलन की घोषित शुरुआत का स्थान है।
पुलिस और स्थानीय लोगों के लिए आपत्तियों का संबंध पार्क के इस्तेमाल, शोर और ट्रैफिक पर पड़ने वाले असर, आपातकालीन आवाजाही में संभावित रुकावट और आसपास के संस्थानों पर पड़ने वाले असर से है। प्रदर्शन शिवाजी पार्क में हो सकता है या नहीं, इस सवाल पर हुए विवाद के कारण शिवाजी पार्क और दादर इलाके दोनों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
अभिजीत दीपके का समर्थकों को जुटाने का अभियान
अभिजीत दीपके प्रदर्शन के लिए समर्थकों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन से पहले मुंबई पुलिस ने उन्हें मरीन ड्राइव से थोड़ी देर के लिए हिरासत में लिया था।
पूछताछ के बाद दीपके को छोड़ दिया गया। उन्होंने चेंबूर के आंबेडकर हॉस्टल में छात्रों से भी मुलाकात की और उनसे आंदोलन को समर्थन देने की अपील की।
दीपके लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील करते हुए ऑटो-रिक्शा में सफर करते हुए भी दिखाई दिए। शिवाजी पार्क में प्रस्तावित सभा के लिए पुलिस की इजाजत नहीं मिलने के बाद भी उनका अभियान जारी रहा।
सीजेपी ने कहा है कि इजाजत से इनकार के बावजूद आंदोलन शिवाजी पार्क में ही होगा। पार्टी ने गेट नंबर 6 को कार्यक्रम की जगह बताया है। यही वह इलाका है जहां पुलिस ने भारी सुरक्षा तैनात की है।
रिपोर्टों में पार्टी की कार्रवाई के दूसरे चरण का भी जिक्र है। इसे “प्रोटेस्ट 2.0” बताया गया है। यह कार्रवाई मुंबई के छत्रपति शिवाजी पार्क से शुरू होने वाली है।
विशाल ददलानी ने समर्थन का ऐलान किया
संगीतकार और गायक विशाल ददलानी ने आंदोलन का समर्थन किया है और कहा है कि वह प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर मुंबई के लोगों से शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 पर जुटने की अपील की।
उनकी अपील से संगठन से बाहर की एक सार्वजनिक आवाज भी इस प्रदर्शन से जुड़ गई। यह प्रदर्शन पहले ही पुलिस की मनाही और स्थानीय लोगों के विरोध की वजह से ध्यान खींच रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों में ददलानी के समर्थन और उनकी अपील का जिक्र है, लेकिन प्रदर्शन स्थल पर उनके किसी अलग भाषण या कार्रवाई का विवरण नहीं दिया गया है।
समर्थकों का जुटना, पुलिस के बैरिकेड और पार्क के प्रवेश रास्तों का बंद किया जाना, तय समय से पहले ही इस कार्यक्रम को सुरक्षा से जुड़ा मामला बना चुका है। पुलिस दादर रेलवे स्टेशन के आसपास आने-जाने पर भी नजर रख रही है और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियां कर रही है।
बहस में जावेद अख्तर की एंट्री
शोर और स्थानीय लोगों को होने वाली परेशानी के सवाल से आगे बढ़कर यह विवाद तब और बड़ा हो गया, जब जावेद अख्तर ने एक्स पर प्रस्तावित प्रदर्शन पर टिप्पणी की। अख्तर ने लिखा कि उन्हें खुशी है कि शिवाजी पार्क के कुछ निवासी ध्वनि प्रदूषण को लेकर संवेदनशील हो रहे हैं और अधिकारियों से सीजेपी का प्रदर्शन रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि जब महाराष्ट्र की कोई राजनीतिक पार्टी शिवाजी पार्क में रैली करेगी, तब भी यही निवासी उतनी ही मजबूती से आपत्ति जताएंगे। इस तरह उनकी पोस्ट में शोर को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता का समर्थन किया गया, लेकिन यह सवाल भी उठाया गया कि क्या राजनीतिक सभाओं के मामले में भी यही पैमाना अपनाया जाएगा।
अख्तर की पोस्ट का जवाब देने वाले एक यूजर ने उनकी उस पुरानी पोस्ट का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने एक बहादुर पायलट के लिए महावीर चक्र की मांग की थी। उस यूजर ने इसी संदर्भ का इस्तेमाल अख्तर की आलोचना करने के लिए किया और कहा कि अगर ऐसा नहीं होता तो सीजेपी प्रदर्शन पर उनकी पोस्ट के बाद हुई आलोचना को लेकर वह परेशान होते।
उस यूजर ने अख्तर पर “संतुलन का खेल” खेलना जानने का आरोप भी लगाया और कहा कि उनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है। अख्तर ने यूजर शाहिद खालिद को जवाब देते हुए कहा कि उन्हें निश्चित तौर पर बहुत कुछ सीखने की जरूरत है और उन्होंने अपनी शुभकामनाएं दीं।
एक अन्य यूजर ने अख्तर को गाली देते हुए उन्हें “बेवकूफ” कहा। अख्तर ने जवाब दिया कि इस संदेश से पता चलता है कि बचपन में उस यूजर को किस तरह के संस्कार दिए गए थे।
यह बातचीत सिर्फ स्थानीय लोगों के व्यवहार या शोर के मुद्दे तक सीमित नहीं रही। यह सीजेपी के प्रदर्शन के मकसद और इस सवाल पर भी चर्चा में बदल गई कि क्या चुनाव आयोग का विरोध सरकार का विरोध कहा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग को लेकर बहस
यूजर कृपाल मकवाना ने दावा किया कि हो सकता है अख्तर को पता ही न हो कि प्रदर्शन किस मुद्दे पर है। मकवाना ने आरोप लगाया कि अख्तर के लिए सरकार के खिलाफ होने वाला कोई भी प्रदर्शन उसे रद्द करने की मांग करने की पर्याप्त वजह है।
अख्तर ने इस समझ पर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा कि उनकी समझ के मुताबिक प्रदर्शन चुनाव आयोग के खिलाफ है। उनके मुताबिक चुनाव आयोग पूरी तरह स्वतंत्र संस्था होनी चाहिए और वह सरकार का हिस्सा नहीं है।
अख्तर ने इसके बाद पूछा कि चुनाव आयोग का विरोध सरकार के विरोध के रूप में क्यों देखा जाना चाहिए। उनके जवाब के बाद सोशल मीडिया पर चल रही बहस शोर और ट्रैफिक को लेकर स्थानीय लोगों की आपत्तियों से हटकर उस संस्थागत मुद्दे पर पहुंच गई, जो सीजेपी की मांगों के केंद्र में है।
सीजेपी की घोषित मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और उनके खिलाफ संभावित आपराधिक कार्रवाई, मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, जनवरी 2025 की मतदाता सूची और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून का मुद्दा शामिल है। अख्तर की टिप्पणियों में चुनाव आयोग और सरकार के बीच अंतर पर बात की गई, जबकि संगठन का प्रदर्शन चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रियाओं के खिलाफ है।
इस बातचीत से यह भी सामने आया कि प्रदर्शन की जगह को लेकर शुरू हुआ स्थानीय विवाद किस तरह व्यापक सोशल मीडिया बहस का हिस्सा बन गया। यूजर इस बात पर बहस करते रहे कि शोर और लोगों को होने वाली परेशानी के कारण कार्यक्रम रद्द होना चाहिए या नहीं, राजनीतिक रैलियों पर भी ऐसी ही आपत्तियां लागू होनी चाहिए या नहीं, और प्रदर्शन का संस्थागत निशाना क्या है।
अब आगे क्या होगा
प्रस्तावित प्रदर्शन अब भी शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 से जुड़ा हुआ है। पुलिस ने इसी जगह भारी सुरक्षा तैनात की है और मैदान में जाने का रास्ता रोक दिया है। सीजेपी ने कहा है कि इजाजत से इनकार के बावजूद वह इसी जगह पर आगे बढ़ेगी।
स्थानीय लोग शोर, ट्रैफिक, रोजमर्रा की जिंदगी में रुकावट और आसपास स्कूलों और अस्पतालों की मौजूदगी समेत कई वजहों से सभा का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने पार्क के गैर-खेल इस्तेमाल से जुड़ी पाबंदियों का भी हवाला दिया है। इसके साथ ही उन्होंने 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश और महाराष्ट्र सरकार के 2016 के फैसले का जिक्र किया है।
पुलिस ने गेट बंद कर दिए हैं, बैरिकेड लगाए हैं, दादर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है और संभावित आपात स्थिति के लिए तैयारियां की हैं। अगर इजाजत से इनकार के बावजूद सभा होती है तो लोगों को हिरासत में लिए जाने की संभावना भी बनी हुई है।
प्रदर्शन की घोषणा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनावी प्रक्रिया के कुछ पहलुओं के खिलाफ अभियान के तौर पर की गई है। हालांकि, इसका तत्काल विवाद इस बात को लेकर है कि क्या शिवाजी पार्क का इस्तेमाल इस कार्यक्रम के लिए किया जा सकता है और बड़ी सभा से आसपास के इलाके में कितनी परेशानी पैदा हो सकती है।
स्थानीय लोगों की आपत्तियों, पुलिस की पाबंदियों, दीपके के समर्थक जुटाने के अभियान, ददलानी के समर्थन और अख्तर की ऑनलाइन टिप्पणियों ने मिलकर सीजेपी की प्रस्तावित कार्रवाई को मुंबई में चर्चा का बड़ा मुद्दा बना दिया है। अब अगला घटनाक्रम इस बात पर निर्भर करेगा कि पुलिस की मनाही और लागू सुरक्षा इंतजामों के बावजूद आयोजक घोषित जगह पर कार्यक्रम कर पाते हैं या नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क के गेट क्यों बंद किए?
सीजेपी समर्थक प्रदर्शन के लिए जुटने लगे थे, इसलिए पुलिस ने उन्हें मैदान में दाखिल होने से रोकने के लिए सभी गेट बंद कर बैरिकेड लगा दिए।
सीजेपी का प्रदर्शन कब और कहां होना था?
सीजेपी का “जेल भरो आंदोलन” 2 अक्टूबर से शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 पर शाम 4 बजे होना था।
क्या पुलिस ने सीजेपी के प्रदर्शन की इजाजत दी थी?
नहीं, पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी थी और आयोजकों से दूसरी जगह आवेदन करने को कहा था।
सीजेपी की मुख्य मांगें क्या हैं?
सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर प्रक्रिया रोककर जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को खत्म करने की मांग कर रही है।
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