इमरान खान की याचिका पर 26 अक्टूबर को सुनवाई करेगा हाई कोर्ट
बॉम्बे हाई कोर्ट 26 अक्टूबर को इमरान खान की भारत छोड़ने के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा इमरान खान याचिका: बॉम्बे हाई कोर्ट 26 अक्टूबर को भारत छोड़ने के नोटिस को चुनौती देने वाली
इमरान खान याचिका: बॉम्बे हाई कोर्ट 26 अक्टूबर को भारत छोड़ने के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा
बॉम्बे हाई कोर्ट 26 अक्टूबर को अभिनेता इमरान खान की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें पुलिस के उस नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है।
इस याचिका में मुंबई पुलिस और फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस यानी एफआरओ की ओर से जारी नोटिस को चुनौती दी गई है। इमरान के वकीलों ने इन नोटिसों को गैरकानूनी और मनमाना बताया है।
यह मामला मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के संबंध में इमरान को हिरासत में लिए जाने के बाद सामने आया।
अब इस कानूनी विवाद में भारत छोड़ने के लिए कहने वाला आदेश और एक अलग नोटिस, दोनों शामिल हैं। दूसरे नोटिस में पूछा गया है कि उनका ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया यानी ओसीआई कार्ड रद्द क्यों न कर दिया जाए।
केंद्र के समय मांगने के बाद कोर्ट ने सुनवाई की तारीख तय की
यह मामला चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच के सामने रखा गया।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने याचिका को पढ़ने और समझने के लिए समय मांगा।
इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय कर दी।
इमरान के वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने जल्द सुनवाई की मांग की थी, क्योंकि पुलिस के नोटिस में अभिनेता को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के लिए कहा गया है।
याचिका में पुलिस और एफआरओ की कार्रवाई को चुनौती दी गई है और कोर्ट से इसे रद्द करने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान इमरान के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि वह दो साल की उम्र से भारत में रह रहे हैं।
उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उनके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है।
वकीलों ने आगे दलील दी कि इमरान ने प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया था।
उनके मुताबिक, हिरासत में लिए जाने के समय इमरान उस इलाके से गुजर रहे थे और बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
कानूनी टीम ने पुलिस से सीसीटीवी फुटेज भी मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इमरान प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे या उन्होंने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।
अगस्त क्रांति मैदान में क्या हुआ
इमरान को 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया था। वहां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन आयोजित किया गया था।
मामले पर आई रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रदर्शन सीजेपी की ओर से आयोजित किया गया था।
बीसी ने बताया कि इमरान ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने कहा कि इमरान भारतीय नागरिक नहीं हैं और इसके बावजूद प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इसी वजह से इमिग्रेशन एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
इमरान के वकीलों ने पुलिस के इस बयान पर आपत्ति जताई है।
उन्होंने कहा है कि इमरान प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे और केवल उस इलाके से गुजर रहे थे।
कोर्ट में पेश किए गए एक दूसरे विवरण में कहा गया कि उस दिन इमरान नाना चौक से होकर जा रहे थे।
उनके वकीलों ने कहा कि रास्ता बंद था और मीडिया से जुड़े लोगों के सवाल पूछने के बाद इमरान ने एक बयान दिया था।
हिरासत में लिए जाने से पहले इमरान ने कहा था कि वह शहर के निवासी के तौर पर वहां गए थे, ताकि इलाके में लगी पाबंदियों और लोगों की दबाई गई आवाजों को देख सकें।
रिपोर्ट में दिए गए अलग-अलग दावों से यह साफ नहीं होता कि इमरान ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था या नहीं।
यह सवाल इस विवाद के केंद्र में है, क्योंकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई उस आरोप के बाद शुरू हुई कि प्रदर्शन स्थल पर उनकी मौजूदगी राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने के बराबर थी।
बाद में इमरान ने कहा कि उन्हें मीडिया के जरिए पता चला कि एफआईआर में उनका नाम शामिल किया गया है।
उनकी कानूनी टीम ने पुलिस से सीसीटीवी फुटेज मांगी है, ताकि घटनास्थल पर उनकी गतिविधियों और उनकी मौजूदगी की जांच की जा सके।
28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस
पहले नोटिस में इमरान से 28 अक्टूबर से पहले भारत छोड़ने को कहा गया था।
यह पुलिस नोटिस एक शिकायत और उसके बाद इमरान के प्रदर्शन में शामिल होने की जांच की मांग किए जाने के बाद जारी किया गया।
यह शिकायत बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने की थी।
सोमैया ने मुंबई पुलिस और एफआरओ को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि इमरान अमेरिकी नागरिक हैं और राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होकर उन्होंने ओसीआई के नियमों और वीजा की शर्तों का उल्लंघन किया है।
रिपोर्ट में इस दावे का श्रेय सोमैया को दिया गया है। इसे पक्के तौर पर साबित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया गया है।
शिकायत के बाद मुंबई पुलिस ने इमरान को नोटिस जारी किया और उनसे 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के लिए कहा।
इसके बाद मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा, जहां इमरान ने इस नोटिस को चुनौती दी।
याचिका में कहा गया है कि पुलिस और एफआरओ की ओर से की गई कार्रवाई गैरकानूनी और मनमानी है।
कोर्ट के सामने वकीलों की दलील इमरान के भारत से लंबे जुड़ाव पर भी केंद्रित रही।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि इमरान दो साल की उम्र से भारत में रह रहे हैं।
याचिका पर तुरंत विचार करने की मांग करते हुए वकीलों ने इस बात का भी सहारा लिया कि इमरान का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उनके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है।
इस तरह कोर्ट में तय सुनवाई उस 28 अक्टूबर की समयसीमा से पहले होगी, जिसका जिक्र नोटिस में किया गया है।
ओसीआई स्टेटस को लेकर एफआरओ का अलग नोटिस
एफआरओ ने इमरान को दूसरा नोटिस भेजकर पूछा है कि उनका ओसीआई कार्ड रद्द क्यों न किया जाए।
इस नोटिस का जवाब देने के लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है।
यह पहला नोटिस नहीं है। पहले नोटिस में उनसे 28 अक्टूबर से पहले भारत छोड़ने को कहा गया था।
इस वजह से कानूनी विवाद में भारत में उनकी मौजूदा स्थिति और उनके ओसीआई कार्ड के भविष्य, दोनों सवाल शामिल हो गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नागरिकता से जुड़े ढांचे के तहत ओसीआई कार्डधारकों को भारत में रहने और भारत आने-जाने की अनुमति होती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ओसीआई कार्डधारकों को भारत में राजनीतिक अधिकार हासिल नहीं होते और उन्हें आंदोलनों में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं होती।
रिपोर्ट में इस कानूनी कार्रवाई को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सीजेपी के प्रदर्शन में इमरान की कथित भागीदारी से जोड़ा गया है।
इसलिए अगस्त क्रांति मैदान में इमरान ने वास्तव में क्या किया था, इस बारे में अलग-अलग दावों का इस कार्रवाई में खास महत्व है।
पुलिस का कहना है कि इमरान ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।
उनके वकीलों का कहना है कि वह केवल उस इलाके से गुजर रहे थे।
सीटीवी फुटेज मांगने का मकसद इसी विवाद को साफ करने में मदद लेना है।
अब तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि कोर्ट ने यह निष्कर्ष दे दिया हो कि इमरान ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।
किरीट सोमैया की शिकायत और विवाद की शुरुआत
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत किरीट सोमैया की शिकायत से हुई।
सोमैया ने मुंबई पुलिस और एफआरओ को पत्र लिखा।
उन्होंने आरोप लगाया कि इमरान अमेरिकी नागरिक होने के बावजूद राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल हुए और इस तरह ओसीआई के नियमों तथा वीजा की शर्तों का उल्लंघन किया।
यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कानूनी कार्रवाई इमरान की सीजेपी के प्रदर्शन में कथित मौजूदगी के बाद शुरू हुई।
इसके बाद पुलिस ने उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया।
बाद में एफआरओ ने उनका ओसीआई कार्ड रद्द किए जाने को लेकर दूसरा नोटिस भेजा।
इमरान के वकीलों ने इस मुख्य आरोप को खारिज किया है कि वह प्रदर्शन में शामिल थे।
उनका कहना है कि अभिनेता उस इलाके से होकर जा रहे थे, उन्हें बैरिकेड के पास रोका गया और बाद में हिरासत में ले लिया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने अगस्त क्रांति मैदान से पहले एक बैरिकेड पर इमरान को रोका था।
क्या हुआ था, यह साबित करने की कोशिश के तहत उनकी कानूनी टीम ने इलाके की सीसीटीवी फुटेज मांगी है।
इसलिए इस मामले की सुनवाई में ओसीआई कार्डधारकों पर लागू कानूनी नियमों के साथ-साथ यह तथ्यात्मक सवाल भी शामिल होगा कि प्रदर्शन स्थल पर इमरान ने क्या किया था।
आमिर खान ने राज ठाकरे से मुलाकात की
इस विवाद के बीच उस समय भी ध्यान गया, जब इमरान के मामा और अभिनेता आमिर खान ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे से उनके मुंबई स्थित घर शिवतीर्थ में मुलाकात की।
यह मुलाकात इमरान को भारत छोड़ने के लिए कहे जाने वाले नोटिस को लेकर चल रहे विवाद के बीच हुई।
इस मुलाकात की वजह नहीं बताई गई है।
आमिर खान या राज ठाकरे, दोनों में से किसी ने भी इस मुलाकात के बारे में कोई बयान जारी नहीं किया है।
रिपोर्टों में कहा गया कि आमिर की पत्नी गौरी स्प्रैट भी इस मुलाकात में शामिल हुई थीं।
आमिर खान और राज ठाकरे के बीच दोस्ताना रिश्ता रहा है। उनकी पिछली मुलाकातों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी सामने आती रही हैं।
मुलाकात के समय की वजह से इस बात को लेकर अटकलें लगने लगीं कि क्या इसका संबंध इमरान के मामले से था।
इन अटकलों को इसलिए भी बल मिला क्योंकि राज ठाकरे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अपनी राय जाहिर कर चुके हैं।
रिपोर्ट में यह पुष्टि नहीं की गई है कि यह मुलाकात इमरान की कानूनी कार्रवाई से जुड़ी थी।
इस मुलाकात की खबर उस समय आई, जब बॉम्बे हाई कोर्ट इमरान की ओर से नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की तैयारी कर रहा था।
इमरान का पारिवारिक बैकग्राउंड और शुरुआती साल
इस कानूनी विवाद के बाद इमरान की जिंदगी और उनके करियर पर फिर से ध्यान गया है।
इमरान का जन्म 1983 में अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य के शहर मैडिसन में हुआ था।
उनके पिता अनिल पाल भारतीय बंगाली मूल के अमेरिकी हैं और उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में पढ़ाई की थी।
बाद में फिल्म डायरेक्टर बने मंसूर खान वहां अनिल पाल के सहपाठी थे।
इमरान की मां नुजहत खान, आमिर खान की कजिन हैं।
मंसूर खान इमरान के मामा हैं।
नुजहत खान ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनिल पाल से शादी की और अमेरिका चली गईं।
इमरान के माता-पिता का तलाक उस समय हुआ, जब वह करीब डेढ़ साल के थे।
तलाक के बाद इमरान अपनी मां के साथ मुंबई लौट आए।
उनकी परवरिश नुजहत खान ने की।
इमरान ने कहा है कि वह अपने पिता के सरनेम के बजाय अपनी मां का सरनेम खान इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि उनकी मां ने ज्यादातर उनकी परवरिश अकेले की।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मैं खान सरनेम इस्तेमाल करता हूं, क्योंकि एक तरह से मेरी मां ने मेरी परवरिश अकेले की।”
उन्होंने यह भी कहा, “मेरी मां मेरे पूरे सफर में मेरे साथ थीं।”
उन्होंने बताया कि इसी वजह से वह खान सरनेम का इस्तेमाल करते हैं।
इमरान ने अपने बचपन का काफी हिस्सा अपने नाना-नानी के घर बिताया।
उन्होंने मुंबई में शुरुआती पढ़ाई शुरू की।
पढ़ाई, मुश्किलें और अमेरिका में जिंदगी
इमरान के लिए अपने परिवार में आए बड़े बदलावों और नए माहौल के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल रहा।
उन्होंने बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल में पढ़ाई की।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वहां उनकी हालत इतनी बिगड़ गई थी कि उनके माता-पिता को उन्हें स्कूल से निकालना पड़ा।
उन्होंने कहा कि उस दौर में बच्चों को डंडों से पीटा जाता था।
इमरान ने बताया कि वह इस स्थिति का ठीक तरह से सामना नहीं कर पाए और इसकी वजह से उनकी हकलाने की समस्या बहुत बढ़ गई।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके नंबर गिरने लगे थे।
बाद में उनकी मां ने अभिनेता राज जुत्शी से शादी की।
इमरान को तमिलनाडु के कूनूर के एक बोर्डिंग स्कूल भेजा गया।
इसके बाद उन्होंने ऊटी के एक दूसरे बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई की।
कुछ साल बाद वह अपने पिता के साथ रहने के लिए अमेरिका लौट गए।
उन्होंने वहां अगले कई साल बिताए।
कैलिफोर्निया में उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की।
इसके बाद उन्होंने लॉस एंजिल्स में फिल्ममेकिंग की पढ़ाई की।
वह भारत लौटे और अभिनेता के तौर पर बॉलीवुड में अपना करियर शुरू किया।
उनके पारिवारिक बैकग्राउंड की वजह से बॉलीवुड में उन्हें आमिर खान के भांजे के तौर पर भी जाना जाता था।
शानदार शुरुआत और युवा सितारों में जगह
आमिर खान ने इमरान को अभिनेता के तौर पर लॉन्च किया।
इमरान की पहली फिल्म रोमांटिक कॉमेडी ‘जाने तू... या जाने ना’ थी। इसका डायरेक्शन अब्बास टायरवाला ने किया था।
यह फिल्म 2008 में रिलीज हुई और उस साल की बड़ी हिट फिल्मों में शामिल रही।
इमरान ने बेस्ट मेल डेब्यू के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता।
रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म क्रिटिक्स ने उन्हें “इस दौर का सबसे अच्छा युवा अभिनेता” बताया।
इसके बाद उनकी अगली दो फिल्में, एक्शन फिल्में ‘किडनैप’ और ‘लक’, असफल रहीं।
इसके बाद अगले दो साल में उनके करियर ने सफलता का दौर देखा।
उन्होंने बड़े प्रोडक्शन हाउस की फिल्मों में लीड रोल निभाए।
इन फिल्मों में 2010 में करण जौहर के प्रोडक्शन की ‘आई हेट लव स्टोरीज’ शामिल थी।
उन्होंने 2011 में यश राज फिल्म्स की ‘मेरे ब्रदर की दुल्हन’ में भी काम किया।
इसी साल वह आमिर खान प्रोडक्शंस की ‘देली बेली’ में भी नजर आए।
स्रोत के मुताबिक, इन तीनों फिल्मों ने अच्छा प्रदर्शन किया।
इमरान ने बॉलीवुड में रोमांटिक हीरो के तौर पर अपनी जगह बना ली।
रणबीर कपूर और रणवीर सिंह के साथ उनका नाम भी उस समय के बड़े युवा सितारों में गिना जाने लगा।
इस शुरुआती सफलता ने उन्हें युवा हिंदी फिल्म अभिनेताओं की एक पीढ़ी में पहचान दिलाई।
करियर में गिरावट और बदलती धारणा
रिपोर्ट के मुताबिक, उस सफल दौर के बाद इमरान के करियर का ग्राफ लगातार नीचे जाने लगा।
उनकी एक्टिंग को लेकर आलोचना में यह बात भी कही गई कि उनकी रेंज बहुत सीमित है।
धीरे-धीरे ऐसी धारणा बन गई कि वह सिर्फ शहरी और रोमांटिक किरदारों में ही ठीक लगते हैं।
विशाल भारद्वाज ने 2012 में उन्हें ‘मटरू की बिजली का मंडोला’ में हरियाणा के एक युवा के रोल में कास्ट किया।
सामाजिक कार्यकर्ता हुकुम सिंह का किरदार निभाने के लिए, जिसे मटरू के नाम से जाना जाता है, इमरान ने हरियाणवी बोलने की ट्रेनिंग ली।
यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही।
कई साल बाद इमरान ने दावा किया कि अजय देवगन के इस रोल को ठुकराने के बाद भारद्वाज ने उन्हें कास्ट किया था।
इमरान ने कहा कि भारद्वाज उन्हें सिर्फ इसलिए लेना चाहते थे, ताकि फिल्म के लिए बड़ा बजट हासिल किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगा कि भारद्वाज उनके साथ काम करने में दिलचस्पी नहीं रखते थे।
इमरान ने इस अनुभव के बारे में कहा, “मुझे उनके साथ एक दूरी महसूस होती थी।”
उन्होंने आगे कहा, “कोई जुड़ाव नहीं था, बस ‘एक्शन’ और ‘कट’ था।”
उन्होंने इसे “मेरी जिंदगी की सबसे अकेली फिल्म” बताया।
2013 में ‘वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई दोबारा!’ की असफलता के साथ भी मुश्किलें जारी रहीं।
इस फिल्म में इमरान ने एक गैंगस्टर का किरदार निभाया था। फिल्म में अक्षय कुमार भी थे।
फिल्म के बुरी तरह असफल होने के बाद आलोचकों ने इमरान को फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी बताया।
इसके बाद उन्होंने ‘गोरी तेरे प्यार में’ और ‘कट्टी बट्टी’ में फिर से शहरी रोमांटिक भूमिकाएं निभाईं।
इन फिल्मों में उनकी को-स्टार करीना कपूर, श्रद्धा कपूर और कंगना रनौत थीं।
इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई।
2015 में रिलीज हुई ‘कट्टी बट्टी’ लीड एक्टर के तौर पर इमरान की आखिरी फिल्म बन गई।
लगातार पांच फिल्में फ्लॉप होने के बाद उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी।
निजी जिंदगी और अलगाव
इस दौरान इमरान की निजी जिंदगी में भी बदलाव आए।
वह 19 साल की उम्र से अवंतिका मलिक को डेट कर रहे थे।
दोनों ने 2011 में शादी की।
उनकी एक बेटी है, जिसका नाम इमारा है।
यह रिश्ता आगे जारी नहीं रह सका और आठ साल बाद 2019 में दोनों अलग हो गए।
अलगाव उस समय हुआ, जब करियर से जुड़ी मुश्किलों की वजह से इमरान पहले ही फिल्म इंडस्ट्री से दूर हो चुके थे।
स्रोत के मुताबिक, इमरान के कई सालों तक लोगों की नजरों से दूर रहने के बाद बॉलीवुड आगे बढ़ चुका था।
फिल्मों से उनकी लंबी दूरी उनके करियर की कहानी का हिस्सा बन गई।
उनकी वापसी की कहानी उन मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मुश्किलों से भी जुड़ी है, जिनके बारे में उन्होंने बाद में सार्वजनिक रूप से बात की।
इमरान ने डिप्रेशन और एंग्जायटी पर बात की
कई सालों तक चुप रहने के बाद 2023 में सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट ने इमरान को फिर से चर्चा में ला दिया।
इस पोस्ट में उन्होंने मुश्किल दिनों और अपने अतीत के दर्द का जिक्र किया।
उन्होंने लिखा, “चुप रहने के लिए माफ कीजिए... जब आप लंबे समय तक अंधेरे में रहे हों, तो धूप भी शुरुआत में सहन करना मुश्किल लग सकती है।”
उन्होंने आगे लिखा, “हम सभी के पास कुछ निशान हैं, कुछ पुराने घाव हैं, जो अब भी दर्द करते हैं।”
उन्होंने कहा, “लेकिन प्यार हर दर्द को ठीक कर देता है।”
इमरान उन गिने-चुने भारतीय फिल्म सितारों में शामिल हैं, जिन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी से अपनी लड़ाई के बारे में सार्वजनिक रूप से बात की है।
कई इंटरव्यू में उन्होंने अपनी मुश्किलों पर चर्चा की और बताया कि रोजमर्रा के सामान्य काम भी उनके लिए बेहद मुश्किल हो सकते थे।
उस दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा, “उन सालों के दौरान मैं इनमें से कुछ भी करने की हालत में नहीं था।”
उन्होंने आगे कहा, “मेरे लिए रोज की जिंदगी जीना भी मुश्किल हो गया था।”
उन्होंने यह भी कहा, “जब आप गहरे और गंभीर डिप्रेशन से जूझ रहे होते हैं, तो सुबह उठना, दांत साफ करना और नहाना भी किसी बहुत बड़ी चुनौती से कम नहीं होता।”
2024 में ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने डिप्रेशन के बारे में खुलकर बात की।
उन्होंने कहा, “मैं हफ्ते में चार बार थेरेपी के लिए जाता हूं।”
इमरान ने यह भी बताया कि वह लंबे समय तक अपनी एंग्जायटी को पहचान नहीं पाए थे।
उन्होंने कहा कि डिप्रेशन, एंग्जायटी और इस तरह की दूसरी मुश्किलों के कई पहलू होते हैं, जिन्हें लोग महसूस तो करते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि उन्हें पहचान भी पाएं।
उन्होंने कहा कि समझ धीरे-धीरे आती है, जब व्यक्ति अपने भीतर हो रही चीजों को लेकर ज्यादा जागरूक होने लगता है।
उन्होंने आगे कहा कि शायद उन्होंने इसे ठीक तरह से 2016 के आखिरी महीनों के आसपास समझना शुरू किया।
इमरान ने अपनी बेटी इमारा और अपनी पार्टनर लेखा वॉशिंगटन को उस दौर से बाहर आने में मदद करने का श्रेय दिया।
फिल्मों में वापसी
11 साल के ब्रेक के बाद इमरान ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ के साथ बॉलीवुड में लौटे।
रिपोर्ट जिस साल की है, उसी साल यह फिल्म आई।
इस फिल्म में उनका रोल लीड रोल नहीं, बल्कि गेस्ट अपीयरेंस था।
यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही।
अब वह डायरेक्टर दानिश असलम की फिल्म ‘अधूरे हम अधूरे तुम’ में लीड रोल में नजर आने वाले हैं।
2015 में आई उनकी आखिरी फिल्म ‘कट्टी बट्टी’ के बाद यह फिल्म लीड एक्टर के तौर पर उनकी योजनाबद्ध वापसी है।
फिल्म में उनके साथ भूमि पेडनेकर के होने की उम्मीद है।
एक रिपोर्ट में कहा गया था कि फिल्म को दिसंबर में नेटफ्लिक्स पर रिलीज करने की योजना थी।
इमरान से उम्मीद की जा रही थी कि वह दिवाली के बाद फिल्म का प्रमोशन शुरू करेंगे।
मौजूदा कानूनी स्थिति ने इस योजना को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म की टीम स्थिति साफ होने तक प्रमोशन शुरू नहीं करना चाहती।
फिल्म की आधिकारिक रिलीज डेट की घोषणा नहीं की गई थी।
इस तरह यह नोटिस उस समय आया है, जब लीड रोल में इमरान की वापसी की तैयारी चल रही है।
कोर्ट की कार्रवाई से तत्काल विवाद आगे किस तरह बढ़ेगा, यह तय हो सकता है। वहीं प्रोडक्शन टीम की प्रमोशन से जुड़ी योजनाएं अब भी साफ नहीं हैं।
फिल्म इंडस्ट्री इस कार्रवाई को लेकर बंटी हुई
इस नोटिस पर फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
फिल्ममेकर किरण राव ने इंस्टाग्राम पर गुस्सा जाहिर किया।
उन्होंने लिखा, “वाह, अब मुंबई पुलिस ऐसा कर रही है?”
अभिनेत्री सबा आजाद ने भी इस कार्रवाई को गलत बताया।
अभिनेता रजा मुराद ने इसके उलट रुख अपनाया और कार्रवाई का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि किसी विदेशी नागरिक को भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देने का अधिकार नहीं है।
अभिनेता गजेंद्र चौहान ने भी एफआरओ और सरकार की ओर से की गई कार्रवाई की तारीफ की।
उन्होंने कहा कि इमरान को 28 अक्टूबर तक का समय देने के बजाय 24 घंटे के भीतर देश से बाहर भेज दिया जाना चाहिए।
इन प्रतिक्रियाओं से मामले के मुख्य सवाल को लेकर बंटवारा साफ दिखाई देता है। सवाल यह है कि क्या प्रदर्शन स्थल पर इमरान की मौजूदगी राजनीतिक प्रदर्शन में हिस्सा लेने के बराबर थी और क्या रिपोर्टों में बताए गए नियमों के तहत इस आधार पर कार्रवाई सही थी।
रिपोर्टों से यह संकेत नहीं मिलता कि कोर्ट ने अब तक इस सवाल पर कोई फैसला दिया है।
इमरान की वापसी के लिए याचिका क्यों अहम है
यह याचिका ऐसे समय आई है, जब इमरान लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री से दूर रहने के बाद अपना करियर फिर से बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
लीड एक्टर के तौर पर उनकी आखिरी फिल्म 2015 में आई ‘कट्टी बट्टी’ थी।
‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ में गेस्ट अपीयरेंस के जरिए उनकी वापसी बॉक्स ऑफिस पर सफलता नहीं ला सकी।
‘अधूरे हम अधूरे तुम’ में उनकी प्रस्तावित लीड भूमिका को इस वापसी का अगला बड़ा कदम माना जा रहा था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कानूनी विवाद का असर फिल्म की रिलीज और प्रमोशन की योजनाओं पर पड़ सकता है।
फिल्म को दिसंबर में नेटफ्लिक्स पर रिलीज करने की योजना थी, हालांकि आधिकारिक रिलीज डेट की घोषणा नहीं की गई थी।
प्रमोशनल कैंपेन शुरू करने से पहले टीम स्थिति साफ होने का इंतजार कर रही थी।
इसी दौरान इमरान को पहले नोटिस में दी गई तत्काल शर्त का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें 28 अक्टूबर से पहले भारत छोड़ने को कहा गया है।
एफआरओ के दूसरे नोटिस में उनसे यह बताने को कहा गया है कि उनका ओसीआई कार्ड रद्द क्यों न किया जाए। जवाब देने के लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है।
उनके वकील इन नोटिसों से राहत मांग रहे हैं और दलील दे रहे हैं कि यह कार्रवाई गैरकानूनी और मनमानी है।
उन्होंने कोर्ट के सामने यह भी रखा है कि इमरान दो साल की उम्र से भारत में रह रहे हैं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड या लंबित मामला नहीं है।
पुलिस और उनके खिलाफ की गई शिकायत उस आरोप पर आधारित है कि उन्होंने अगस्त क्रांति मैदान के प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।
इमरान के वकीलों ने इस आरोप से इनकार किया है और अपने पक्ष को मजबूती देने के लिए सीसीटीवी फुटेज मांगी है।
बॉम्बे हाई कोर्ट 26 अक्टूबर को इस याचिका पर सुनवाई करने वाला है। यह तारीख नोटिस में दी गई समयसीमा से दो दिन पहले है।
इस सुनवाई से इमरान के भारत में रहने के अधिकार और उनके ओसीआई कार्ड की स्थिति को लेकर चल रहे विवाद का अगला चरण तय होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बॉम्बे हाई कोर्ट इमरान खान की याचिका पर कब सुनवाई करेगा?
कोर्ट 26 अक्टूबर को इमरान खान की याचिका पर सुनवाई करेगा।
इमरान खान की याचिका किस नोटिस के खिलाफ है?
याचिका मुंबई पुलिस और FRO के उस नोटिस के खिलाफ है, जिसमें उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने को कहा गया है।
इमरान खान के खिलाफ दूसरा नोटिस किस बारे में है?
दूसरे नोटिस में पूछा गया है कि उनका OCI कार्ड रद्द क्यों न कर दिया जाए।
इमरान खान को हिरासत में क्यों लिया गया था?
उन्हें 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था।
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