मानसून में मसूड़ों की समस्या और सांस की बदबू बढ़ने के कारण
मानसून में मसूड़ों की समस्या और सांस की बदबू क्यों बढ़ जाती है? मानसून में मसूड़ों से खून आना और सांस की बदबू जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ये सिर्फ मौसम का इत्तेफाक नहीं है।
मानसून में मसूड़ों से खून आना और सांस की बदबू जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ये सिर्फ मौसम का इत्तेफाक नहीं है। लक्ष्मी डेंटल लिमिटेड के ऑर्थोडॉन्टिस्ट डॉ. जैनिल पारेख के मुताबिक, बारिश के मौसम में लाइफस्टाइल में बदलाव ऐसे हालात पैदा कर देते हैं, जो ओरल हेल्थ की दिक्कतों को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, मानसून खुद इन समस्याओं की सीधी वजह नहीं है।
कैसे मानसून की आदतें ओरल हेल्थ को प्रभावित करती हैं?
बारिश के मौसम में खानपान और सफाई की आदतों में बदलाव आ जाता है, जो अनजाने में दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। लोग मीठे स्नैक्स और ड्रिंक्स ज्यादा लेते हैं, पानी कम पीते हैं और कई बार ओरल हाइजीन का ध्यान नहीं रखते। इन वजहों से बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं, जिससे मसूड़ों में सूजन और सांस की बदबू की समस्या हो सकती है। डॉ. पारेख कहते हैं, "पानी कम पीने और प्लाक साफ न करने से बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं।"
इस मौसम में प्लाक जमने की समस्या ज्यादा होती है। अगर इसे नियमित ब्रशिंग और इंटरडेंटल क्लीनिंग से हटाया न जाए, तो यह जिंजिवाइटिस, कैविटी और सांस की बदबू जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। डेंटिस्ट्स इस मौसम में सूजे हुए मसूड़े, प्लाक जमने और शुरुआती स्टेज की मसूड़ों की बीमारियों के ज्यादा मामले देखते हैं।
बैक्टीरिया और प्लाक की भूमिका
सांस की बदबू हमेशा आपके खाने से जुड़ी नहीं होती। डॉ. पारेख बताते हैं कि मसूड़ों के पास प्लाक जमा होने से खाने के कण फंस जाते हैं। बैक्टीरिया इन्हें तोड़ते हैं और सल्फर कंपाउंड छोड़ते हैं, जिससे बदबू आती है। अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, तो यह बैक्टीरिया मसूड़ों में सूजन और यहां तक कि पीरियोडोंटल डिजीज का कारण बन सकते हैं।
कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है, जैसे स्मोकर्स, डायबिटीज के मरीज, ऑर्थोडॉन्टिक ट्रीटमेंट करा रहे लोग और जिनकी ओरल हाइजीन सही नहीं है। उदाहरण के लिए, ब्रेसेस के कारण प्लाक और खाने के कण आसानी से जमा हो जाते हैं, जिससे मसूड़ों की सेहत बनाए रखने के लिए ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है।
चेतावनी के संकेत और बचाव
मसूड़ों की बीमारी अक्सर चुपचाप शुरू होती है और शुरुआती स्टेज में दर्द नहीं होता, इसलिए इसे नजरअंदाज करना आसान हो जाता है। लेकिन अगर मसूड़ों से खून आना, सांस की बदबू, सूजन या लाल मसूड़े, मसूड़ों में दर्द, मसूड़ों का पीछे हटना या दांत हिलने जैसे लक्षण दिखें, तो इन्हें हल्के में न लें। समय पर पहचान से मसूड़ों और हड्डियों को लंबे समय तक नुकसान से बचाया जा सकता है।
डॉ. पारेख कहते हैं कि मसूड़ों की बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका नियमित ओरल हाइजीन है। इसमें फ्लोराइड टूथपेस्ट से दिन में दो बार ब्रश करना, फ्लॉस या इंटरडेंटल ब्रश से दांतों के बीच की सफाई करना, जीभ की सफाई, हाइड्रेटेड रहना, खाने के बाद कुल्ला करना और मीठे स्नैक्स को सीमित करना शामिल है। वे हर छह महीने में प्रोफेशनल डेंटल चेकअप कराने की भी सलाह देते हैं ताकि किसी भी समस्या का समय पर पता चल सके।
डेंटिस्ट के पास कब जाएं?
घरेलू नुस्खे सांस की बदबू से अस्थायी राहत दे सकते हैं, लेकिन वे मसूड़ों की बीमारी का इलाज नहीं कर सकते। अगर अच्छी ओरल हाइजीन के बावजूद एक हफ्ते से ज्यादा समय तक मसूड़ों से खून आना, सूजन, दर्द या सांस की बदबू बनी रहती है, तो डेंटिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।
अगर आप समझें कि मानसून के दौरान आपकी आदतें ओरल हेल्थ को कैसे प्रभावित करती हैं, तो आप मसूड़ों की समस्याओं और सांस की बदबू से बचने के लिए पहले से कदम उठा सकते हैं। सही ओरल हाइजीन बनाए रखना और समय पर डेंटल केयर लेना बड़ा फर्क ला सकता है।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मानसून में मसूड़ों की समस्या क्यों बढ़ती है?
मानसून में खानपान और सफाई की आदतों में बदलाव आता है, जिससे मसूड़ों में सूजन और सांस की बदबू जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
क्या मानसून खुद मसूड़ों की समस्याओं का कारण है?
नहीं, मानसून खुद इन समस्याओं का सीधा कारण नहीं है, लेकिन यह लाइफस्टाइल में बदलाव लाता है जो समस्याएं बढ़ा सकता है।
मसूड़ों की बीमारी के लक्षण क्या हैं?
मसूड़ों से खून आना, सांस की बदबू, सूजन, लाल मसूड़े, मसूड़ों में दर्द और दांतों का हिलना इसके लक्षण हैं।
मसूड़ों की बीमारी से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
नियमित ओरल हाइजीन, जैसे दिन में दो बार ब्रश करना, फ्लॉस करना और हाइड्रेटेड रहना जरूरी है।
डेंटिस्ट के पास कब जाना चाहिए?
अगर एक हफ्ते से ज्यादा समय तक मसूड़ों से खून आना, सूजन या सांस की बदबू बनी रहती है, तो डेंटिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।
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