जिंदा शख्स को मृत घोषित कर 25 लाख की जमीन बेच दी गई
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ जिले में जमीन की धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ जिले में जमीन की धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रानीगंज तहसील इलाके में एक शख्स को सरकारी कागजात में मरा हुआ बताकर उसकी करीब 25 लाख रुपये की जमीन दूसरे लोगों के नाम करा दी गई और फिर बेच दी गई। पीड़ित व्यक्ति सियाराम ने जब इस धोखाधड़ी की जानकारी दी तो एसडीएम ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
फतनपुर थाना इलाके के पूरे गोशाई गांव में रहने वाले सियाराम ने साल 2005 में लक्षीपुर बाजार के पास सड़क किनारे एक बिस्वा जमीन खरीदी थी। कुछ दिन पहले जब वह जमीन की प्रमाणित खतौनी निकलवाने तहसील गए तो उन्हें झटका लगा। उनकी जमीन पर किसी और का नाम दर्ज था। आरोप है कि लक्षीपुर बाजार के पास रहने वाली दो महिलाओं ने अपने पिता का नाम श्रीराम उर्फ सियाराम बताकर साल 2022 में सियाराम को मृत घोषित करा दिया और उनकी जमीन की वरासत अपने नाम करा ली।
इसके बाद दोनों महिलाओं ने दाखिल-खारिज की कार्रवाई पूरी की और फिर यह जमीन किसी तीसरे शख्स को बेच दी। सियाराम का कहना है कि पूरा मामला फर्जीवाड़े का है क्योंकि वह जिंदा हैं और जमीन के असली मालिक भी वही हैं। उन्होंने इस धोखाधड़ी की शिकायत रानीगंज एसडीएम के पास दर्ज कराई है।
एसडीएम अनुराग सिंह ने बताया कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और जांच की जिम्मेदारी तहसीलदार को सौंप दी गई है। जांच में अगर आरोप सही पाए गए तो दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला जमीन के रिकॉर्ड में हो रही गड़बड़ियों को लेकर सवाल खड़े करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह धोखाधड़ी का मामला क्या है?
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ जिले में एक जिंदा आदमी सियाराम को सरकारी कागजात में मृत घोषित कर उसकी 25 लाख रुपये की जमीन दूसरे लोगों के नाम करके बेच दी गई। सियाराम की जमीन को उसके अपने पिता का नाम बताकर हड़प लिया गया।
किसने यह धोखाधड़ी की?
लक्षीपुर बाजार के पास रहने वाली दो महिलाओं ने अपने पिता का नाम श्रीराम उर्फ सियाराम बताकर साल 2022 में सियाराम को मृत घोषित करा दिया और उनकी जमीन की वरासत अपने नाम करवा ली।
सियाराम को यह धोखाधड़ी कब पता चली?
सियाराम को कुछ दिन पहले जब वह अपनी जमीन की प्रमाणित खतौनी निकलवाने तहसील गए तो पता चला कि उनकी जमीन पर किसी और का नाम दर्ज है।
सियाराम ने कब यह जमीन खरीदी थी?
सियाराम ने साल 2005 में लक्षीपुर बाजार के पास सड़क किनारे एक बिस्वा जमीन खरीदी थी।
अब इस मामले में क्या हो रहा है?
एसडीएम ने शिकायत को गंभीरता से लिया है और तहसीलदार को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी है। अगर आरोप सही पाए गए तो दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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