मद्रास हाईकोर्ट ने रूट बदलने पर अवैध खनन का आरोप खारिज किया
सिर्फ रूट बदलने से अवैध खनन का आरोप नहीं लग सकता: मद्रास हाईकोर्ट मदुरै: मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने फैसला दिया है कि अगर खनिजों को ले जाने के लिए वैध ट्रांजिट पास है और कोई चोरी या अवैध खनन का
सिर्फ रूट बदलने से अवैध खनन का आरोप नहीं लग सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मदुरै: मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने फैसला दिया है कि अगर खनिजों को ले जाने के लिए वैध ट्रांजिट पास है और कोई चोरी या अवैध खनन का आरोप नहीं है, तो सिर्फ रूट बदलने को अवैध खनन नहीं माना जा सकता।
जस्टिस आर. विजयकुमार ने यह टिप्पणी मदुरै जिले के पलामेडु पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए की। यह एफआईआर आसैथंबी नाम के व्यक्ति के खिलाफ दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता पर बीएनएस, 2023 की धारा 303(2) और खनिज और खनन (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) के तहत आरोप लगाए गए थे। मामला तब शुरू हुआ जब पलामेडु में आसैथंबी के ट्रैक्टर को रोका गया, जो फेंसिंग स्टोन ले जा रहा था।
याचिकाकर्ता को मेलूर से अलंगनल्लूर तक फेंसिंग स्टोन ले जाने के लिए ट्रांजिट पास जारी किया गया था। लेकिन वाहन को मंजूर रूट में शामिल नहीं किए गए इलाके मणिकमपट्टी में पाया गया, जिसके बाद पुलिस ने रूट बदलने के आधार पर एफआईआर दर्ज की।
कोर्ट ने देखा कि एफआईआर में खुद वैध ट्रांजिट पास की बात स्वीकार की गई है और याचिकाकर्ता के खिलाफ सिर्फ रूट बदलने का आरोप है।
जस्टिस विजयकुमार ने कहा, "यह साफ है कि यह ट्रांजिट पास का उल्लंघन है और इसमें फेंसिंग स्टोन या सरकार के खनिजों की चोरी शामिल नहीं है।" कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले में दंडात्मक प्रावधान लागू करना कानूनी रूप से गलत है और इस तरह की कार्यवाही को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग माना। इसके बाद एफआईआर को रद्द कर दिया गया।
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