मध्य प्रदेश में चयनित किसानों को देसी गाय पर हर महीने 900 रुपये
भोपाल। मध्य प्रदेश में देसी गायों के संरक्षण और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार नई आर्थिक सहायता योजना शुरू करने जा रही है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में देसी गायों के संरक्षण और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार नई आर्थिक सहायता योजना शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत प्रदेश की मान्यता प्राप्त देसी नस्लों की गाय पालने वाले चयनित किसानों को हर महीने 900 रुपये की सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार इस योजना को 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर लॉन्च करने की तैयारी में है।
15 नवंबर का दिन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के रूप में मनाया जाता है। सरकार ने इसी अवसर पर योजना की शुरुआत करने की तैयारी की है। हालांकि, योजना का संभावित लॉन्च 15 नवंबर को होना है और इसके लिए पात्रता और चयन प्रक्रिया से जुड़े अंतिम दिशा-निर्देशों का इंतजार रहेगा।
योजना का पूरा खाका 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पेश किया गया था। बैठक में कृषि और पशुपालन विभाग ने योजना को लेकर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया था। सरकार इस योजना के क्रियान्वयन पर हर साल करीब 40 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी में है।
योजना के लिए राशि का प्रावधान आगामी द्वितीय अनुपूरक बजट में किया जाएगा। इस तरह सरकार ने योजना के लिए सालाना बजट और इसके शुरुआती क्रियान्वयन का खाका तैयार कर लिया है। आर्थिक सहायता के जरिए चयनित किसानों को देसी गायों के पालन के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश की जाएगी।
सरकार योजना को शुरुआत में सीमित दायरे में लागू करेगी। पहले चरण में प्रदेश के 100 गांवों का चयन किया जाएगा। हर गांव से पांच-पांच पशुपालकों को लाभार्थी बनाया जाएगा। इस हिसाब से शुरुआती चरण में कुल 500 पशुपालक योजना से जुड़ेंगे और उन्हें हर महीने आर्थिक सहायता मिलेगी।
योजना में मध्य प्रदेश की पारंपरिक और क्षेत्रीय पहचान वाली छह देसी नस्लों को शामिल किया गया है। इन नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर सरकार का जोर है। योजना के तहत इन्हीं मान्यता प्राप्त देसी नस्लों की गाय पालने वाले चयनित किसानों को सहायता दी जाएगी।
इन छह नस्लों में निमाड़ी, मालवी, केनकथा, गौओलाओ, महाकौशली और गढ़ी-खेरी शामिल हैं। निमाड़ी नस्ल खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार सहित निमाड़ अंचल में पाई जाती है। यह नस्ल निमाड़ क्षेत्र की पारंपरिक पहचान से जुड़ी हुई है।
मालवी नस्ल मंदसौर, शाजापुर, राजगढ़ और उज्जैन सहित मालवा क्षेत्र में प्रचलित है। इस नस्ल को भी योजना में शामिल किया गया है, ताकि मालवा क्षेत्र में पाली जाने वाली देसी गायों को संरक्षण मिल सके।
केनकथा नस्ल बुंदेलखंड के पन्ना, छतरपुर और केन नदी के आसपास के क्षेत्रों में पाली जाती है। सरकार ने प्रदेश की क्षेत्रीय पहचान वाली इस नस्ल को भी सहायता योजना के दायरे में रखा है।
गौओलाओ नस्ल छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट के इलाकों में प्रमुख रूप से पाई जाती है। महाकौशली नस्ल की मौजूदगी जबलपुर, मंडला, डिंडोरी, सिवनी और अमरकंटक क्षेत्र में है। इन दोनों नस्लों को भी देसी गोवंश के संरक्षण के लिए योजना में शामिल किया गया है।
गढ़ी-खेरी नस्ल छिंदवाड़ा, मंडला और डिंडोरी के आदिवासी बहुल इलाकों में पाई जाती है। प्रदेश की इन छह पारंपरिक नस्लों को योजना के जरिए संरक्षण देने की तैयारी है।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल पशुपालकों को आर्थिक मदद देना नहीं है। इसके जरिए प्रदेश की स्थानीय गोवंश नस्लों को विलुप्त होने से बचाने और उनके संवर्धन को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से किसानों को देसी गायों के पालन के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
अब योजना के संभावित लॉन्च और इसके अंतिम दिशा-निर्देशों पर नजर रहेगी। खास तौर पर योजना की पात्रता, लाभार्थियों के चयन और 100 गांवों में 500 पशुपालकों को शामिल करने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। સરકાર 15 नवंबर से योजना शुरू करने की तैयारी में है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मध्य प्रदेश की इस योजना में चयनित किसानों को कितनी सहायता मिलेगी?
चयनित किसानों को हर महीने 900 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
योजना कब शुरू करने की तैयारी है?
सरकार योजना को 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर शुरू करने की तैयारी में है।
पहले चरण में कितने पशुपालकों को योजना का लाभ मिलेगा?
पहले चरण में 100 गांवों का चयन होगा और हर गांव से पांच पशुपालक चुने जाएंगे। इस तरह कुल 500 पशुपालकों को लाभ मिलेगा।
योजना में कौन-कौन सी देसी गायों की नस्लें शामिल हैं?
योजना में निमाड़ी, मालवी, केनकथा, गौओलाओ, महाकौशली और गढ़ी-खेरी नस्लें शामिल हैं।
सरकार योजना पर हर साल कितना खर्च करेगी?
सरकार योजना के क्रियान्वयन पर हर साल करीब 40 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी में है।
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