मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की
मध्यप्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर कर दी है।
मध्यप्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर कर दी है। महाधिवक्ता कार्यालय मध्यप्रदेश ने “स्टेट ऑफ एम.पी. वर्सेस आशिता दुबे एवं अन्य” मामले में यह स्पेशल लीव पिटीशन दायर की है। यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के फैसले के बाद की गई है।
इंदौर, 16 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज शुक्रवार को प्रात: ओबीसी महासभा के प्रतिनिधि मंडलों ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन भोपाल में भेंट की। इस दौरान प्रतिनिधि मंडलों ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री के सामने अपना पक्ष रखा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार ओबीसी हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।” मुख्यमंत्री के मुताबिक, न्याय संगत और तार्किक व्यवस्था के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ. यादव ने बताया कि इसी उद्देश्य से ओबीसी आरक्षण के विषय पर सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई थी। इसके साथ ही ओबीसी के सभी संगठनों से वार्ता कर राज्य सरकार ने मजबूती के साथ उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखा था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस विषय को टालने की दृष्टि से नहीं, बल्कि उसका समुचित हल निकालने के उद्देश्य से काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण पर राज्य सरकार की नीति और नीयत स्पष्ट है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि ओबीसी आरक्षण के संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का बिंदुवार अध्ययन किया गया है। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के सामने राज्य सरकार की ओर से मजबूती से अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
इसी क्रम में आज सायं महाधिवक्ता कार्यालय मध्यप्रदेश ने सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर कर दी। आधिकारिक जानकारी में इस मामले का नाम “स्टेट ऑफ एम.पी. वर्सेस आशिता दुबे एवं अन्य” बताया गया है।
प्रतिनिधि मंडलों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मध्यप्रदेश में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण पर उच्च न्यायालय के 9 अक्टूबर 2026 के निर्णय के संबंध में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में अद्यतन आंकड़ों के आधार पर संवैधानिक समाधान करने और ओबीसी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की मांग रखी गई।
ओबीसी महासभा दिल्ली ने एडवोकेट श्री वैभव सिंह और इंजीनियर श्री महेंद्र सिंह लोधी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के सामने अपना पक्ष रखा। वहीं, ओबीसी महासभा ग्वालियर ने महासभा के संस्थापक श्री विजय कुमार, प्रदेश प्रभारी श्री जीतू लोधी और प्रदेशाध्यक्ष श्री गिरिराज धाकड़ के नेतृत्व में अपनी बात रखी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी आरक्षण पर क्या कदम उठाया?
मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है।
एसएलपी किस मामले में दायर की गई है?
एसएलपी “स्टेट ऑफ एम.पी. वर्सेस आशिता दुबे एवं अन्य” मामले में दायर की गई है।
ओबीसी आरक्षण से जुड़ा हाई कोर्ट का फैसला कब आया था?
ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला 9 अक्टूबर 2026 को आया था।
ओबीसी महासभा के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से क्या मांग की?
प्रतिनिधियों ने अपडेटेड आंकड़ों के आधार पर संवैधानिक समाधान और ओबीसी उम्मीदवारों के हितों की रक्षा की मांग की।
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