उज्जैन में भारत माता मंदिर संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि का 94वां प्राकट्य महोत्सव
उज्जैन में सनातन धर्म की अद्वैत वेदांत परंपरा के दिव्य आलोक-स्तंभ और विश्वविख्यात भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य, श्रोत्रिय, ब्रह्मनिष्ठ, अनंतश्रीविभूषित गुरुदेव
उज्जैन में सनातन धर्म की अद्वैत वेदांत परंपरा के दिव्य आलोक-स्तंभ और विश्वविख्यात भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य, श्रोत्रिय, ब्रह्मनिष्ठ, अनंतश्रीविभूषित गुरुदेव भगवान श्रीस्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज का 94वां प्राकट्य महोत्सव बेहद श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ अंजुश्री होटल परिसर में संपन्न हुआ। महाकाल की पावन नगरी उज्जयिनी में आयोजित इस महोत्सव में राष्ट्रचेतना और आध्यात्मिक एकता का भाव देखने को मिला।
यह महोत्सव मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री डॉ. मोहन यादव के उत्सव पुरुषत्व और कर्नाटक के महामहिम राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी की मुख्य आतिथ्य गरिमा में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमत्परमहंस परिव्राजकाचार्य, श्रोत्रिय, ब्रह्मनिष्ठ, अनंतश्री विभूषित, जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामंडलेश्वर पूज्यपाद श्री स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने की।
इस खास मौके पर पूज्य आचार्यश्री जी ने ब्रह्मलीन पूज्य गुरुदेव के जीवन, साधना, अद्वैत वेदांत, राष्ट्रचेतना और भारत माता मंदिर की स्थापना के जरिए सनातन संस्कृति के लिए किए गए उनके बड़े योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव का जीवन ज्ञान, तप, त्याग, सेवा, समन्वय और राष्ट्रबोध का अद्भुत संगम था। उनका अध्यात्म सिर्फ आत्मसाधना तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी, सेवा और लोकमंगल का व्यापक भाव शामिल था।
इसी भावभूमि में वर्ष 2028 में उज्जयिनी में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को लेकर भी खास और आत्मीय चर्चा हुई। पूज्य आचार्यश्री जी ने कहा कि सिंहस्थ सिर्फ एक मेला नहीं है, बल्कि भारत की सनातन आध्यात्मिक चेतना, संत-परंपरा, तीर्थ-संस्कृति और लोकआस्था का बड़ा महापर्व है। उज्जयिनी की धरती पर होने वाला सिंहस्थ दुनिया के सामने भारत की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक एकता का अद्वितीय दर्शन पेश करता है।
सिंहस्थ-2028 को भव्य, दिव्य, सुव्यवस्थित, सुरक्षित, स्वच्छ और श्रद्धालु-केंद्रित बनाने को लेकर माननीय मुख्यमंत्री जी, जनप्रतिनिधियों, संत समाज, प्रशासन और उज्जैन के नागरिकों की सामूहिक भूमिका पर विचार हुआ। पूज्य आचार्यश्री ने कहा कि यह सिर्फ शासन का आयोजन नहीं है, बल्कि उज्जैन के हर नागरिक, संत समाज, सामाजिक संस्थाओं और पूरे समाज का महापर्व है।
श्रद्धालुओं के आसान आवागमन और दर्शन से लेकर स्वच्छता, पेयजल, आवास, यातायात, स्वास्थ्य, सुरक्षा, घाटों और तीर्थ इलाकों की व्यवस्थाओं तक हर क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था बनाने का भाव सामने आया, जिससे देश-विदेश से आने वाला हर श्रद्धालु उज्जैन से सिर्फ दर्शन की याद लेकर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आत्मीयता और अविस्मरणीय अनुभव लेकर लौटे।
पूज्य आचार्यश्री ने कहा कि महाकाल की नगरी में होने वाला सिंहस्थ आने वाली पीढ़ियों के लिए उज्जयिनी की आध्यात्मिक पहचान और भारतीय संस्कृति की विराटता को दिखाने का मौका है। इसलिए विकास और व्यवस्था के साथ-साथ उज्जैन की प्राचीनता, पवित्रता, पर्यावरण, तीर्थ-परंपरा और सांस्कृतिक स्वरूप की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। सिंहस्थ की भव्यता सिर्फ सुविधाओं की बड़ी संख्या से नहीं, बल्कि उसकी आध्यात्मिक गरिमा और श्रद्धालु-सत्कार की भारतीय परंपरा से तय होगी।
इस मौके पर मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, उज्जैन के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, भारत माता मंदिर समन्वय सेवा ट्रस्ट के प्रेरक और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री परम पूज्य श्री स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी महाराज, भारत माता मंदिर समन्वय सेवा ट्रस्ट, हरिद्वार के न्यासी परम पूज्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि जी महाराज, परम पूज्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी ललितानंद गिरि जी महाराज, साध्वी प्रज्ञा भारती जी, ट्रस्ट के महासचिव श्री आई.डी. शास्त्री जी, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री सत्यनारायण जटिया जी, सिंहस्थ विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल जी, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा जी और श्री सतीश मालवीय जी, मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री सौभाग्य सिंह ठाकुर जी, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष श्री ओम जैन जी, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी जी, कार्यक्रम संयोजक श्री सुरेश मोढ़ जी, समन्वय परिवार उज्जैन के अध्यक्ष श्री टी.आर. थापक जी, पूर्व विधायक श्री संजय शुक्ला जी और महंत श्री राजेन्द्र भारती जी समेत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, संत-महात्मा, गणमान्यजन और देश-विदेश से जुड़े श्रद्धालु मौजूद रहे।
महोत्सव में ब्रह्मलीन पूज्य गुरुदेव के खास पूजन-अर्चन, रुद्राभिषेक और संत भंडारे का आयोजन किया गया। मौजूद संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने ब्रह्मलीन पूज्य गुरुदेव के श्रीचरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए।
पूज्य आचार्यश्री जी ने कहा कि पूज्य गुरुदेव का जीवन अद्वैत वेदांत, सनातन संस्कृति और राष्ट्रचेतना का उज्ज्वल प्रकाश है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सत्य, सेवा, साधना, समन्वय, आत्मबोध और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
महाकाल की इस पावन भूमि पर ब्रह्मलीन गुरुदेव के प्राकट्य महोत्सव का यह आयोजन सिर्फ एक महान संत का स्मरण नहीं है, बल्कि सनातन परंपरा के मूल्यों को वर्तमान से जोड़ने और सिंहस्थ-2028 जैसे बड़े आध्यात्मिक महापर्व को भव्य-दिव्य स्वरूप देने के सामूहिक संकल्प का मौका भी बना।
उज्जयिनी की धरती पर महाकाल की कृपा, संतों का आशीर्वाद, शासन-प्रशासन का संकल्प और हर व्यक्ति की भागीदारी इन्हीं के तालमेल से सिंहस्थ-2028 को ऐसा महापर्व बनाने का भाव जाहिर किया गया, जो भारत की सनातन आध्यात्मिक चेतना की विराटता को दुनिया के सामने पेश करे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी का 94वां प्राकट्य महोत्सव कहाँ आयोजित हुआ?
उज्जैन में अंजुश्री होटल परिसर में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी का 94वां प्राकट्य महोत्सव आयोजित हुआ।
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी किस मंदिर के संस्थापक थे?
स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी विश्वविख्यात भारत माता मंदिर के संस्थापक थे।
उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व कब होने वाला है?
उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2028 में होने वाला है।
सिंहस्थ महापर्व के आयोजन में किन लोगों की भूमिका पर जोर दिया गया?
सिंहस्थ-2028 को भव्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधियों, संत समाज, प्रशासन और उज्जैन के नागरिकों की सामूहिक भूमिका पर जोर दिया गया।
महोत्सव की अध्यक्षता किसने की?
महोत्सव की अध्यक्षता आचार्यमहामंडलेश्वर पूज्यपाद श्री स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने की।
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