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मध्य प्रदेश में गांवों के लिए 125 दिन का रोजगार, 26 हजार करोड़ का निवेश

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 1 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में 41 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के अहम फैसले लिए गए।

मध्य प्रदेश में गांवों के लिए 125 दिन का रोजगार, 26 हजार करोड़ का निवेश
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 1 सितंबर को हुई कैबिनेट बैठक में 41 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के अहम फैसले लिए गए। प्रदेश के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए कई अहम वित्तीय प्रस्तावों और जनकल्याणकारी फैसलों को मंजूरी दी गई।

कैबिनेट ने "विकसित भारत (ग्रामीण): वीबी जी राम जी विकसित भारत जी राम जी योजना मध्यप्रदेश" को मंजूरी दी। योजना 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। वित्तीय वर्ष 2026-2027 में इस योजना की लागत 3,183 करोड़ रुपये होगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक योजना को जारी रखने के लिए कुल 26,436 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रस्ताव पास किया गया।

केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60:40 के अनुपात में होगी। राज्य का हिस्सा 10 हजार 574 करोड़ रुपये होगा। पांच साल में प्रशासनिक खर्च के लिए 946 करोड़ रुपये का खर्च होगा, जो राज्य सरकार देगी। नई योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को हर वित्तीय वर्ष में अब 100 दिन की जगह 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। रोजगार के दिनों में यह बढ़ोतरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके बढ़ाने में अहम साबित होगी।

नई योजना का मुख्य आधार 'विकसित भारत @2047' के राष्ट्रीय विजन के मुताबिक ग्रामीण बुनियादी ढांचे को तैयार करना है। अब हर ग्राम पंचायत जीआईएस आधारित तकनीक, 'पीएम गति शक्ति' लेयर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' तैयार करेगी।

इन योजनाओं को डिजिटल पोर्टल के जरिए 'विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक' में शामिल किया जाएगा। योजना के तहत पानी की सुरक्षा, जलवायु-अनुकूल इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और नए रोजगार मॉडल जैसे तकनीकी कामों को सही से करने के लिए मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद में एक खास राज्य-स्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट बनाई जाएगी। भारत सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक राज्य में मिलने वाले पैसे को पारदर्शी और जरूरत के आधार पर बांटने के लिए ग्राम पंचायतों को विकास मानदंडों के आधार पर क, ख, ग (A, B, C) श्रेणियों में बांटा जाएगा।

योजना में पूरी पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी, डिजिटल मस्टर रोल और हर छह महीने में सामाजिक अंकेक्षण को जरूरी बनाया गया है। साथ ही जल्दी शिकायत निपटाने के लिए हर जिले में एक 'लोकपाल' की नियुक्ति की जाएगी, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए शिकायतों का निपटारा करेंगे। मंत्रि-परिषद ने अंतरिम व्यवस्था के तहत नई परिषद के पूरी तरह गठन या पंजीकरण तक मौजूदा 'मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद' को ही इस नई योजना की सभी जिम्मेदारियां निभाने के लिए अधिकृत किया है।

कैबिनेट ने प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी सिस्टम और सांची ब्रांड को बेहतर बनाने के लिए 2 हजार 973 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। डेयरी विकास योजना के जरिए आगामी 5 साल में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7331 गांवों से बढ़ाकर 26,000 गांवों तक किया जाएगा। दूध संकलन को 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन किया जाएगा। दूध प्रसंस्करण क्षमता को 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन किया जाएगा। दूध पैकेट बिक्री 7 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन की जाएगी। कृत्रिम गर्भाधान कवरेज 15 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी किया जाएगा।

एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड और संबद्ध दुग्ध संघों के संचालन और प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश सरकार, एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन और संबद्ध दुग्ध संघों तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच सहकार्यता अनुबंध 13 अप्रैल 2025 को किया गया। इस अनुबंध के तहत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने 2 हजार 973 करोड़ की डेयरी विकास योजना पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। राज्य सरकार ने 500 करोड़ रुपये बुनियादी ढांचे के लिए अनुदान और इसके अलावा भारत सरकार की योजनाओं पर मंजूरी के मुताबिक अनुमानित 241 करोड़ रुपये का राज्य का हिस्सा और योजना के अलग-अलग हिस्सों को लागू करने की मंजूरी दी।

कैबिनेट ने पश्चिम भोपाल बायपास 4 लेन मय पेव्ड शोल्डर के लंबाई 35.61 किलोमीटर, निर्माण कार्य के लिए हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत कुल प्रोजेक्ट की वित्तीय लागत 3,225 करोड़ 51 लाख रुपये की पुनरीक्षित मंजूरी दी। इसके अलावा निर्माण से पहले की गतिविधियों की राशि 548 करोड़ 29 लाख रुपये का भुगतान भी राज्य बजट के जरिए किए जाने को मंजूरी मिली। इस बायपास के बनने से जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इंदौर आने-जाने वाले वाहनों को भोपाल से नहीं गुजरना पड़ेगा और 21 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी।

पहले पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन मय पेव्ड शोल्डर सहित हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (40:60) के तहत लंबाई-40.90 किलोमीटर के लिए 2,981 करोड़ 65 लाख रुपये की प्रशासकीय मंजूरी 4 सितंबर 2023 को दी गई थी। पश्चिम भोपाल बायपास की एक लाइन भोपाल-जबलपुर मार्ग पर मंडीदीप के पास इटायाकलां से शुरू होकर भोपाल-देवास मार्ग के गांव फंदा के पास तक बनाई जानी थी, जिसकी लंबाई 40.90 किलोमीटर थी। पश्चिम भोपाल बायपास इलाके में रातापानी टाईगर रिजर्व घोषित हो जाने, बड़े तालाब के कैचमेंट इलाके में पर्यावरण विभाग की नोटिफिकेशन के असर को शामिल करने, राज्य पुरातत्व विभाग की प्राचीन धरोहर शिवमंदिर (समसगढ़) एक लाइन पर आने और बायपास को पूर्वी बायपास से जोड़कर पूरी रिंग रोड बनाने की वजह से लाइन में बदलाव किया गया। लाइन में बदलाव से प्रोजेक्ट की लागत में पहली मंजूरी से 8.18 फीसदी बढ़ोतरी होने से पुनरीक्षित प्रशासकीय मंजूरी मंत्रि-परिषद से ली गई।

फैसले के मुताबिक प्रोजेक्ट निर्माण लागत का 40 फीसदी 599 करोड़ 44 लाख रुपये का भुगतान कंसेशन अनुबंध में तय माइलस्टोन हासिल करने पर 10 किस्तों में और नेट पॉजिटिव कॉस की राशि का भुगतान निर्माण अवधि में अनुबंध के प्रावधानों के मुताबिक, राज्य राजमार्ग निधि के जरिए किया जाएगा। प्रोजेक्ट निर्माण लागत की बाकी 60 फीसदी राशि 1,910 करोड़ 42 लाख रुपये का भुगतान एन्यूटी, ओएण्डएम और ब्याज सहित संचालन अवधि में 15 सालों तक छह महीने की एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के जरिए किया जाएगा।

कैबिनेट ने प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय संतुलन और बुनियादी ढांचे की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए मौजूदा राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) भोपाल की जगह अब राज्य में 3 अलग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की मंजूरी दी है। ये विश्वविद्यालय भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में बनेंगे। इस व्यवस्था के तहत भोपाल का मौजूदा विश्वविद्यालय 'मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय', उज्जैन के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को 'मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' और जबलपुर के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को 'महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के रूप में बनाया जाएगा।

फिलहाल आरजीपीवी के तहत 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थाएं और 3 लाख 83 हजार से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। मंजूर व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी तकनीकी कॉलेजों को संभागवार बांटकर नए बने तीन विश्वविद्यालयों के अधिकार क्षेत्र में सौंपा गया है। भोपाल के 'मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के अधीन भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग आएंगे। उज्जैन के 'मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के तहत उज्जैन और इंदौर संभाग रहेंगे। इसी तरह जबलपुर के 'महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के अधिकार क्षेत्र में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों के तकनीकी संस्थान शामिल किए जाएंगे।

तीनों विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए अलग कानून लागू किए जाएंगे। उज्जैन और जबलपुर में नए बनने वाले दोनों विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक संचालन के लिए शुरुआती स्तर पर कुलगुरु, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, उप कुलसचिव और वित्त अधिकारी के पदों को मंजूरी दी गई। साथ ही दूसरे सहायक और तकनीकी पदों को नियमानुसार आउटसोर्स के जरिए भरा जाएगा। इन पदों की सैलरी शुरुआत में विश्वविद्यालय की उपलब्ध राशि से दी जाएगी और ये संस्थान स्व-वित्तीय आधार पर चलाए जाएंगे। मंत्रि-परिषद ने तीनों विश्वविद्यालयों की स्थापना और आगे की कार्रवाई को रफ्तार देने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय 'मध्यप्रदेश प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय साधिकार समिति' बनाने को भी मंजूरी दी है। इस समिति में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार, वित्त, उच्च शिक्षा और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिवों और मध्यभारत प्रौद्योगिकी विश्वद्यालय के कुलगुरु सहित आयुक्त तकनीकी शिक्षा को सदस्य सचिव के रूप में शामिल किया गया है।

कैबिनेट ने मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग लंबाई 67.116 किलोमीटर, 4-लेन मय पेव्ड शोल्डर के साथ हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) पर निर्माण के लिए कुल प्रोजेक्ट वित्तीय लागत 2,776 करोड़ 83 लाख की प्रशासकीय मंजूरी दी है। अतिरिक्त निर्माण से पहले की गतिविधियों (जमीन अधिग्रहण और दूसरे काम) की राशि 428 करोड़ 94 लाख रुपये और सुपरविजन चार्जेस की राशि 65 करोड़ 77 लाख रुपये का भुगतान भी राज्य बजट के जरिए किए जाने को मंजूरी मिली।

मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन प्रोजेक्ट निर्माण लागत 1,151 करोड़ रुपये है। कुल प्रोजेक्ट निर्माण लागत की 40 फीसदी राशि 543 करोड़ 27 लाख रुपये (जीएसटी सहित) निर्माण अवधि के दौरान भुगतान म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा लिए जा रहे कर्ज के जरिए और कुल प्रोजेक्ट निर्माण लागत की बाकी 60 फीसदी राशि 1,738 करोड़ 85 लाख रुपये (जीएसटी सहित) का भुगतान संचालन अवधि में 15 सालों तक छह महीने की एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के जरिए किया जाएगा। प्रस्तावित मार्ग एन.एच.-346 विदिशा-चंदेरी पर मेहलुआ चौराहा से शुरू होता है और बीना में एन.एच-934 हीरापुर-बीना को क्रॉस करते हुए मालथोन में एन.एच-44 नॉर्थ साउथ कॉरीडोर को जोड़ता है। यह मार्ग क्षेत्रीय, अंतर-राज्यीय और औद्योगिक यातायात के लिए बेहद अहम है। बीना शहरी इलाके में बीपीसीएल रिफाइनरी, थर्मल पावर प्लांट, रेलवे यार्ड और बड़े उद्योग होने की वजह से भारी वाहनों की संख्या ज्यादा है। यह मार्ग भविष्य में एक मजबूत आर्थिक और लॉजिस्टिक कॉरीडोर के रूप में विकसित होने की ऊंची क्षमता रखता है।

मंत्रि-परिषद ने स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीन और उपकरण का रखरखाव से जुड़ी योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लगातार चलाने के लिए 488 करोड़ 41 लाख रुपये की मंजूरी दी है। इस योजना के तहत प्रदेश के अस्पतालों में दी गई मशीन और उपकरणों के रखरखाव, मरम्मत वगैरह के काम किए जाएंगे। मंत्रि-परिषद ने विभागीय संपत्तियों के रखरखाव से जुड़ी योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लगातार चलाने के लिए 915 करोड़ 77 लाख रुपये की मंजूरी दी। योजना के तहत प्रदेश के अस्पतालों में मॉड्यूलर किचन, मॉड्यूलर ओ.टी. वगैरह के मरम्मत काम किए जाते हैं।

मंत्रि-परिषद ने नए बने जिलों यानी मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालय चलाने के लिए हर जिले में उप संचालक का एक पद, सहायक वर्ग-2 का एक पद और सहायक वर्ग-3 के तीन पद सहित कुल 15 नए नियमित पद बनाए जाने और हर जिले के लिए चतुर्थ श्रेणी के दो-दो मानव संसाधन कुल 6 आउटसोर्सिंग से रखे जाने की मंजूरी दी है।

मंत्रि-परिषद ने नए बने जिला निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन की मंजूरी दी है। मंजूरी के मुताबिक चार जिला कार्यालयों में जिला आयुष अधिकारी के चार पद वेतन मान 15 हजार 600-39,100-6600 ग्रेड पे, सहायक ग्रेड-1 मुख्य लिपिक के चार पद वेतन मान 5,200-20 हजार 200-2800 ग्रेड पे, लेखापाल के चार पद वेतन मान 5,200-20 हजार 200-2,800 ग्रेड पे और सहायक ग्रेड-2 के चार पद वेतन मान 5,200-20 हजार 200-2400 ग्रेड पे की मंजूरी दी गई है।

मंत्रि-परिषद ने रबी विपणन वर्ष 2026 में मूंग और उड़द का 1 जुलाई 2026 से उपार्जन के लिए मुख्यमंत्री के फैसले को मंजूरी दी है। गौरतलब है कि रबी वर्ष 2025-26 (विपणन वर्ष 2026-27) में प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन के लिए मंत्रि-परिषद के 24 फरवरी 2026 के आदेश में पंजीकृत किसानों से उनकी उपज का 25 फीसदी उत्पादन ही खरीदने के फैसले को आंशिक रूप से बदलते हुए मूंग का पंजीकृत किसानों से उनकी उपज का 60 फीसदी तक का उपार्जन किए जाने का फैसला लिया गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में गांवों के लिए नई रोजगार योजना क्या है?

मध्य प्रदेश सरकार ने 'विकसित भारत (ग्रामीण)' योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों को हर साल 125 दिनों का रोजगार की गारंटी मिलेगी, जो पहले 100 दिन थी। यह योजना 1 जुलाई 2026 से लागू होगी।

इस योजना में कितने पैसे का निवेश होगा?

2026-27 से 2030-31 तक पांच साल में कुल 26,436 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इसमें से केंद्र सरकार 60 फीसदी और मध्य प्रदेश सरकार 40 फीसदी यानी 10,574 करोड़ रुपये का हिस्सा देगी।

योजना में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाएगी?

योजना में बायोमेट्रिक हाजिरी, डिजिटल मस्टर रोल और हर छह महीने में सामाजिक अंकेक्षण को जरूरी बनाया गया है। हर जिले में एक 'लोकपाल' की नियुक्ति की जाएगी, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायतों का निपटारा करेंगे।

दूध उत्पादकों के लिए सरकार ने क्या योजना दी है?

सरकार ने डेयरी विकास योजना के लिए 2,973 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसके तहत सहकारी दुग्ध समितियां 7,331 गांवों से बढ़कर 26,000 गांवों तक पहुंचेंगी। दूध संकलन 12 लाख किलोग्राम से 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन होगा।

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