एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती पर तिरुपति में श्रद्धांजलि
तिरुपति में संगीत प्रेमियों और छात्रों ने महान गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती मनाई। नादस्वरम विभाग के छात्रों ने मंगल वाद्यम पेश किया।
तिरुपति में इस मौके को मनाने के लिए छात्र, विद्वान और संगीत प्रेमी जुटे
नादस्वरम विभाग के छात्रों ने बुधवार को तिरुपति में महान गायिका एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती के मौके पर 'मंगल वाद्यम' पेश किया।
संगीत प्रेमी, नए गायक, मंच कलाकार और शास्त्रीय संगीत के विद्वान एपीएसआरटीसी जंक्शन पर लगी उनकी कांस्य प्रतिमा के पास इकट्ठा हुए और माल्यार्पण किया। भीड़ में मौजूद विद्वानों ने 'एमएस अम्मा' को श्रद्धांजलि के तौर पर उनके शास्त्रीय गीत गाए, जैसा कि उन्हें संगीत जगत में जाना जाता था।
सांस्कृतिक श्रद्धांजलि और आर्थिक विरासत
तिरुपति की सांस्कृतिक संस्था 'रायलसीमा रंगस्थली' के सदस्यों ने अपने अध्यक्ष गुंडाला गोपीनाथ रेड्डी के नेतृत्व में उनकी प्रतिमा को श्रद्धांजलि दी। रेड्डी ने याद किया कि कैसे उन्होंने भज गोविंदम और विष्णु सहस्रनामम जैसी अपनी क्लासिक रचनाओं के जरिए भक्ति का प्रसार किया।
कार्यक्रम में बोलने वालों ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) में उनके योगदान को याद किया, जिसमें श्री वेंकटेश्वर सुप्रभातम और अन्नमय्या कीर्तनों से करोड़ों रुपये की रॉयल्टी शामिल है। 'भारत रत्न' पुरस्कार विजेता की विरासत इन भक्ति रचनाओं के जरिए आज भी गूंजती रहती है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती पर तिरुपति में क्या किया गया?
तिरुपति में नादस्वरम विभाग के छात्रों ने 'मंगल वाद्यम' प्रस्तुत किया। संगीत प्रेमियों और विद्वानों ने एपीएसआरटीसी जंक्शन पर लगी उनकी कांस्य प्रतिमा के पास इकट्ठा होकर माल्यार्पण किया और उनके शास्त्रीय गीत गाकर श्रद्धांजलि दी।
एमएस अम्मा को 'भारत रत्न' पुरस्कार के लिए किन कामों के लिए याद किया जाता है?
वह भज गोविंदम और विष्णु सहस्रनामम जैसी क्लासिक रचनाओं के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने इन भक्ति संगीतों के जरिए भारतीय संस्कृति का प्रसार किया और तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम को काफी योगदान दिया।
श्री वेंकटेश्वर सुप्रभातम और अन्नमय्या कीर्तनों से कितनी रॉयल्टी मिलती है?
इन भक्ति रचनाओं से तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम को करोड़ों रुपये की रॉयल्टी मिलती है।
रायलसीमा रंगस्थली ने एमएस सुब्बुलक्ष्मी को कैसे सम्मानित किया?
इस सांस्कृतिक संस्था के सदस्यों ने अपने अध्यक्ष गुंडाला गोपीनाथ रेड्डी के नेतृत्व में उनकी प्रतिमा को श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।
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