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लुधियाना के लिए केंद्र सरकार का 5 करोड़ का गर्मी प्रोजेक्ट

लुधियाना में बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए केंद्र सरकार की मदद लुधियाना, जो एक बड़ा इंडस्ट्रियल हब है, को शहरी गर्मी (अर्बन हीट आइलैंड - UHI) से निपटने के लिए केंद्र सरकार के ₹5 करोड़ के क्लाइमेट

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लुधियाना में बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए केंद्र सरकार की मदद

लुधियाना, जो एक बड़ा इंडस्ट्रियल हब है, को शहरी गर्मी (अर्बन हीट आइलैंड - UHI) से निपटने के लिए केंद्र सरकार के ₹5 करोड़ के क्लाइमेट पायलट प्रोजेक्ट के तहत चुना गया है। यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की AMRUT 2.0 योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद तेजी से बढ़ते शहरों को गर्मी सहने लायक और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। लुधियाना उन 12 शहरों में से एक है, जिन्हें इस प्रोग्राम के लिए चुना गया है।

UHI इफेक्ट तब होता है जब शहरी इलाके आसपास के ग्रामीण इलाकों के मुकाबले काफी ज्यादा गर्म हो जाते हैं। इसकी वजह कंक्रीट और डामर जैसे मटीरियल्स का गर्मी सोखना, गाड़ियों और इमारतों की मौजूदगी होती है। इस प्रोजेक्ट की निगरानी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) करेगा। यह संस्था विशेषज्ञ टीमों और वॉलंटियर ऑर्गनाइजेशन्स के साथ मिलकर लुधियाना में डिटेल्ड हीट असेसमेंट स्टडी कराएगी।

बुधवार को ज़ोन-डी ऑफिस में नगर निगम अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन फुटेज और ग्राउंड सेंसर्स की मदद से लुधियाना के सबसे गर्म इलाकों की मैपिंग शुरू करने पर चर्चा हुई। नगर निगम कमिश्नर ओजस्वी अलंकार के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के तहत कम खर्चीले और टिकाऊ उपाय लागू किए जाएंगे। इनमें पब्लिक बिल्डिंग्स पर रिफ्लेक्टिव "कूल रूफ्स" लगाना, खाली सरकारी जमीन पर शहरी जंगल विकसित करना और स्कूलों, पार्कों और मार्केट्स के लिए हीट-सेफ कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड लागू करना शामिल है।

इसके अलावा, शहर में छायादार कूलिंग शेल्टर्स, पानी के स्टेशन और ग्रीन बस स्टॉप बनाए जाएंगे ताकि हीटवेव के दौरान बाहर काम करने वाले मजदूरों और कम आय वाले समुदायों को राहत मिल सके। इस पायलट प्रोग्राम में शामिल अन्य शहर हैं बेंगलुरु, गुवाहाटी, देहरादून, दिल्ली, जोधपुर, गाजियाबाद, ग्वालियर, नासिक, गुरुग्राम, वडोदरा और विशाखापट्टनम।

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