कोले वेटलैंड्स की सालाना कीमत ₹417 करोड़, अध्ययन में खुलासा
कोले वेटलैंड्स की सालाना कीमत ₹417 करोड़, स्टडी में खुलासा
कोच्चि: केरल के त्रिशूर और मलप्पुरम जिलों में फैले कोले वेटलैंड्स की सालाना आर्थिक कीमत ₹417 करोड़ आंकी गई है। हाल ही में हुई एक स्टडी में यह जानकारी सामने आई है। ये वेटलैंड्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण रामसर साइट हैं और पर्यावरण व आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम माने जाते हैं।
यह रिसर्च फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट, देहरादून और केरल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ फॉरेस्ट्री ने मिलकर की। स्टडी में 13,632 हेक्टेयर में फैले इन वेटलैंड्स की टोटल इकोनॉमिक वैल्यू (TEV) का आकलन किया गया। कोले वेटलैंड्स को 2002 में रामसर साइट और 2009 में केंद्र सरकार द्वारा हाई-वैल्यू बायोडायवर्सिटी एरिया के रूप में मान्यता दी गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, वेटलैंड्स से मिलने वाली अप्रत्यक्ष सेवाएं उनकी कुल कीमत में सबसे बड़ा योगदान देती हैं। जहां धान की खेती, मछली पकड़ना, कमल की खेती, बत्तख पालन और टूरिज्म जैसी सीधी सेवाओं की सालाना कीमत ₹169 करोड़ आंकी गई, वहीं बाढ़ रोकने, कार्बन को संरक्षित करने और ग्राउंडवॉटर रिचार्ज जैसी अप्रत्यक्ष सेवाओं की कीमत ₹240 करोड़ है। अप्रत्यक्ष सेवाएं TEV का 58% हिस्सा बनाती हैं, जिसमें बाढ़ रोकने की सेवा सबसे अहम है।
यह स्टडी कोले वेटलैंड्स को संरक्षित करने की जरूरत को रेखांकित करती है। ये वेटलैंड्स न सिर्फ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के आंकलन से इन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए ठोस नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
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