केरल हाई कोर्ट ने खनिज अधिकार कानून को असंवैधानिक करार दिया
केरल हाई कोर्ट ने खनिज अधिकार कानून को असंवैधानिक बताया केरल हाई कोर्ट ने केरल मिनरल्स (वेस्टिंग ऑफ राइट्स) एक्ट, 2021 को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है।
केरल हाई कोर्ट ने केरल मिनरल्स (वेस्टिंग ऑफ राइट्स) एक्ट, 2021 को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 300A का उल्लंघन करता है, जो लोगों को उनकी संपत्ति से कानून के बिना वंचित होने से बचाता है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह इस कानून के तहत याचिकाकर्ताओं से वसूले गए रॉयल्टी की रकम वापस करे।
मालाबार खनिजों पर राज्य का दावा खारिज
2021 में बने इस कानून का मकसद केरल के मालाबार क्षेत्र में खनिज अधिकारों को राज्य सरकार के नाम करना था। इसके तहत जमीन मालिकों को उनके खदानों से निकाले गए ग्रेनाइट पर रॉयल्टी देनी होती। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को चुनौती दी और कहा कि राज्य सरकार को खनिजों की मालिकाना हक का दावा करने का अधिकार नहीं है, जब तक इसके लिए कोई विशेष कानून न बनाया जाए। उन्होंने पहले से दी गई रॉयल्टी की वापसी की भी मांग की।
राज्य सरकार ने इस कानून का बचाव करते हुए कहा कि मौजूदा खनन और खनिज कानूनों के तहत वह परमिट देने की शर्त पर रॉयल्टी वसूलने का अधिकार रखती है। सरकार ने कहा कि यह कानून खनिज संसाधनों पर सामुदायिक अधिकार सुनिश्चित करने और उनके समान वितरण के लिए बनाया गया था। लेकिन जस्टिस ए.के. जयशंकरन नांबियार और ए.के. प्रीथा की डिवीजन बेंच ने इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि खनिज अधिकारों पर राज्य का अधिकार नहीं है क्योंकि यह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कानून समानता, पेशे की आजादी और जीवन के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने माना कि यह कानून इन संवैधानिक गारंटी को पूरा करने में विफल रहा और इसे रद्द करने का फैसला लिया।
सीपीआई(M) ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की मांग की
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने राज्य सरकार से हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की अपील की है। पार्टी ने कहा कि रद्द किया गया कानून प्राकृतिक संसाधनों पर सामूहिक नियंत्रण और उनके वितरण को सुनिश्चित करने के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप था। पार्टी का मानना है कि खनिजों की मालिकाना हक जमीन मालिकों के पास हो सकता है, लेकिन खनन और वितरण पर सरकार का नियंत्रण होना चाहिए ताकि जनता का भला हो सके।
इस फैसले का मालाबार क्षेत्र के जमीन मालिकों पर बड़ा असर पड़ेगा, जो अब रॉयल्टी की वापसी के हकदार हैं। साथ ही, यह राज्य सरकार के प्राकृतिक संसाधनों पर नियामक अधिकारों पर सवाल खड़ा करता है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केरल हाई कोर्ट ने खनिज अधिकार कानून को रद्द क्यों किया?
कोर्ट ने कहा कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 300A का उल्लंघन करता है, जो लोगों को उनकी संपत्ति से बिना कानून के वंचित होने से बचाता है। कोर्ट का मानना था कि यह कानून समानता, पेशे की आजादी और जीवन के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है।
केरल मिनरल्स एक्ट, 2021 किस लिए बनाया गया था?
यह कानून मालाबार क्षेत्र में खनिज अधिकारों को राज्य सरकार के नाम करने के लिए बनाया गया था। इसके तहत जमीन मालिकों को अपनी खदानों से निकाले गए ग्रेनाइट पर रॉयल्टी देनी होती थी।
इस फैसले के बाद मालाबार के जमीन मालिकों को क्या होगा?
जमीन मालिकों को पहले से दी गई रॉयल्टी की वापसी मिलेगी। राज्य सरकार को कोर्ट का आदेश है कि वह इस कानून के तहत याचिकाकर्ताओं से वसूले गए रॉयल्टी की रकम वापस करे।
राज्य सरकार ने इस कानून को बचाने के लिए क्या तर्क दिया था?
सरकार ने कहा कि यह कानून खनिज संसाधनों पर सामुदायिक अधिकार सुनिश्चित करने और उनके समान वितरण के लिए बनाया गया था। सरकार का मानना था कि मौजूदा खनन और खनिज कानूनों के तहत वह परमिट देने की शर्त पर रॉयल्टी वसूल सकती है।
सीपीआई(M) ने इस फैसले पर क्या कहा?
सीपीआई(M) ने राज्य सरकार से हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की अपील की है। पार्टी का मानना है कि यह कानून प्राकृतिक संसाधनों पर सामूहिक नियंत्रण और उनके वितरण के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप था।
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