कासरगोड में पुरातत्व सर्वे शुरू, ऐतिहासिक सबूतों की होगी पहचान
केरल के कासरगोड में पुरातत्व सर्वे शुरू हुआ है। जिले के ऐतिहासिक और पुरात्विक सबूतों की पहचान कर उनका दस्तावेज तैयार किया जाएगा।
कासरगोड की पुरात्विक विरासत केरलम के इतिहास का अहम हिस्सा है, मंत्री ने कहा
राज्य का पुरातत्व विभाग जिले से जुड़े ऐतिहासिक और पुरात्विक सबूतों की पहचान करने और उनका दस्तावेज तैयार करने के लिए कासरगोड आर्कियोलॉजिकल सर्वे 2026 कर रहा है।
पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय मंत्री ओ.जे. जनीश ने नीलेश्वरम के एनकेबी मेमोरियल हॉल में इस सर्वे की शुरुआत की।
ऐतिहासिक सबूतों का दस्तावेज तैयार करने पर जोर
मंत्री ने कहा कि कासरगोड के इतिहास को शामिल किए बिना केरलम का इतिहास पूरा नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि यह व्यापक सर्वे सरकार के 100 दिन के एक्शन प्रोग्राम के हिस्से के तौर पर किया जा रहा है।
इस सर्वे का मकसद कासरगोड के भीतर मौजूद ऐतिहासिक और पुरात्विक सबूतों की पहचान करना, उनका दस्तावेज तैयार करना और उन्हें व्यवस्थित तरीके से दर्ज करना है।
मंत्री ने कहा कि कासरगोड को ‘किलों की धरती’ के नाम से जाना जाता है और इसकी ऐतिहासिक जड़ें पाषाण युग तक जाती हैं।
उन्होंने जिले को ऐसी जगह भी बताया, जहां पहुंचने के बाद लोग वहां से लौटना नहीं चाहते।
महापाषाण स्मारक और अलग-अलग दौर का शासन
मंत्री ने कहा कि कासरगोड पाषाण युग के बाद के दौर के महापाषाण स्मारकों से समृद्ध है।
उन्होंने जिले में मौजूद लौह युग की लेटराइट गुफाओं और छतरी पत्थरों का खास तौर पर जिक्र किया।
मंत्री ने कहा कि कासरगोड का इतिहास लंबा और अलग-अलग दौर से बना हुआ है। इस इतिहास पर लगातार बदलते शासन का असर रहा है।
इन शासनों में आलुपास, स्थानीय सरदार, विजयनगर साम्राज्य, इक्केरी नायक और यूरोपीय शक्तियां शामिल थीं।
मंत्री की कही बातों के मुताबिक, इन सबूतों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने पर सर्वे का ध्यान जिले के पुरात्विक अवशेषों को केरलम के व्यापक ऐतिहासिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाता है।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक संदीप वारियर ने की।
विधायक गोविंदन पल्लीकप्पिल और जिला कलेक्टर श्रीधन्या सुरेश भी मौजूद थीं।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कासरगोड आर्कियोलॉजिकल सर्वे 2026 क्यों किया जा रहा है?
यह सर्वे कासरगोड से जुड़े ऐतिहासिक और पुरात्विक सबूतों की पहचान करने, उनका दस्तावेज तैयार करने और उन्हें व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने के लिए किया जा रहा है।
कासरगोड आर्कियोलॉजिकल सर्वे 2026 की शुरुआत किसने की?
इस सर्वे की शुरुआत पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय मंत्री ओ.जे. जनीश ने नीलेश्वरम के एनकेबी मेमोरियल हॉल में की।
कासरगोड को किस नाम से जाना जाता है?
कासरगोड को ‘किलों की धरती’ के नाम से जाना जाता है।
कासरगोड में किन ऐतिहासिक अवशेषों का जिक्र किया गया?
कासरगोड में महापाषाण स्मारक, लौह युग की लेटराइट गुफाएं और छतरी पत्थर मौजूद हैं।
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