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केरल में 17 बंदी हाथियों की ब्लड शुगर समेत जांच, हेल्थ कार्ड

केरल के थ्रिसूर मंदिर में 17 बंदी हाथियों की ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, किडनी और लिवर की जांच हुई। हर हाथी का हेल्थ कार्ड बनेगा।

केरल में 17 बंदी हाथियों की ब्लड शुगर समेत जांच, हेल्थ कार्ड
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केरलम के अलग-अलग हिस्सों से लाए गए 17 बंदी हाथियों की रोकथाम और समय रहते स्वास्थ्य देखभाल वाले कार्यक्रम के पहले चरण में ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, किडनी और लिवर से जुड़े संकेतकों की जांच की गई है। यह पहल ऐसे समय में की जा रही है, जब अचानक बड़ी संख्या में हाथियों के गिरने और उनकी मौत होने को लेकर चिंता बढ़ रही है।

थ्रिसूर मंदिर में पहली जांच

केरल एलीफेंट ओनर्स फेडरेशन ने केरल वेटरिनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी (केवीएएसयू) की तकनीकी मदद से यह मेडिकल कैंप लगाया। यह कैंप शुक्रवार को थ्रिसूर के श्री वडक्कुन्नाथन मंदिर में लगाया गया।

जांच का नेतृत्व केवीएएसयू के वेटरिनरी एंड एनिमल हसबैंड्री एक्सटेंशन विभाग के प्रोफेसर और एंटरप्रेन्योरशिप के डायरेक्टर टी.एस. राजीव ने किया। वेटरिनेरियनों ने हाथियों के ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और क्रिएटिन लेवल की जांच की। इसके साथ ही उनके लिवर और किडनी के कामकाज को भी देखा गया।

हाथियों के ब्लड, यूरिन और मल के सैंपल लिए गए और उन्हें बारीकी से जांच के लिए केवीएएसयू की लैब में भेजा गया। जांच के नतीजे चार से पांच दिनों में आने की उम्मीद है।

बंदी हाथियों की स्वास्थ्य जांच पहले भी की गई है। लेकिन आयोजकों ने इस कैंप को सामान्य से कहीं ज्यादा व्यापक कवायद बताया है। इसकी वजह जांच का बड़ा स्तर और इसमें शामिल अलग-अलग तरह की जांच हैं। इस स्क्रीनिंग का मकसद ऐसी अंदरूनी बीमारियों का पता लगाना है, जिन पर आम तौर पर ध्यान नहीं जा पाता और जो बिना पता चले रह सकती हैं।

आगे की देखभाल दर्ज करने के लिए हेल्थ कार्ड

जांच से मिलने वाली जानकारी हर हाथी के लिए जारी किए गए अलग-अलग हेल्थ कार्ड में दर्ज की जाएगी। इन कार्डों से हर जानवर का मेडिकल इतिहास तैयार होगा। आगे होने वाली जांच और इलाज के दौरान इन कार्डों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

डॉ. राजीव ने कहा, “अगर हमें स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या मिलती है, तो हम उसकी आगे जांच करेंगे। किडनी की कार्यक्षमता में कमी या स्वास्थ्य से जुड़ी दूसरी समस्याओं के मामले हो सकते हैं, जिन पर खास ध्यान देने की जरूरत होगी। ब्लड टेस्ट के नतीजे और दूसरी जांचें दर्ज कर ली गई हैं। किसी भी असामान्यता पर अलग से ध्यान दिया जाएगा।”

किडनी की कार्यक्षमता में कमी की आशंका का यह जिक्र ऐसे समय में आया है, जब कार्यक्रम के तहत किडनी के कामकाज और क्रिएटिन लेवल की जांच की जा रही है। कैंप में लिए गए ब्लड, यूरिन और मल के सैंपल की लैब जांच से भी इनसे जुड़ी जानकारी मिलने की उम्मीद है। आगे कोई जांच या इलाज किया जाएगा या नहीं, यह टेस्ट और दूसरी जांचों के नतीजों पर निर्भर करेगा।

आयोजकों ने कहा कि इस पहल के पीछे तुरंत ध्यान देने वाली मुख्य चिंता हाथियों के गिरने और अचानक मरने की बढ़ती संख्या है। उन्हें उम्मीद है कि ज्यादा विस्तार से और नियमित तौर पर की जाने वाली स्क्रीनिंग से ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं का समय रहते पता लगाने में मदद मिलेगी। इससे ये समस्याएं बिना पहचान के रह जाने से बच सकेंगी।

सभी बंदी हाथियों को कवर करने की योजना

इस कार्यक्रम में कई जगहों के वेटरिनरी विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया है। इस बड़े पैनल में एनिमल हसबैंड्री विभाग के डॉक्टर, गुरुवायूर देवस्वम के वेटरिनेरियन और इस क्षेत्र के दूसरे विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

केवीएएसयू की लैब में हाथियों से जुड़ी खास जरूरतों के मुताबिक होने वाली जांच समेत सभी टेस्ट किए जाएंगे। डॉ. राजीव ने कहा कि आयोजकों की योजना राज्य के सभी बंदी हाथियों को इस कार्यक्रम के दायरे में लाने की है।

डॉ. राजीव ने कहा, “हम राज्य के सभी बंदी हाथियों को कवर करने की योजना बना रहे हैं। हमने हाथियों के मालिकों से कहा है कि अगर वे एक वाहन का इंतजाम करते हैं, तो हम उस जगह पर जाकर उनके हाथियों की जांच कर सकते हैं।”

फेडरेशन मेडिकल कैंप कोट्टायम और कोल्लम तक बढ़ाने की योजना बना रहा है। आगे चलकर वह इस पहल को नियमित स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था में बदलना चाहता है। इस व्यवस्था के तहत हर छह महीने में हाथियों की व्यापक जांच की जाएगी।

घटती आबादी के बीच उठाया गया कदम

रोकथाम पर आधारित स्वास्थ्य देखभाल की जरूरत केरल में बंदी हाथियों की घटती आबादी से भी साफ होती है। आयोजकों की ओर से बताए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2008 में बंदी हाथियों की संख्या 1,000 से ज्यादा थी। यह संख्या घटकर करीब 366 रह गई है।

हर हाथी की मौत पहले से घटती आबादी को और कम कर देती है। ऐसे में हेल्थ कार्ड की यह पहल केरल में बचे हुए बंदी हाथियों के लिए ज्यादा व्यवस्थित और रोकथाम पर आधारित स्वास्थ्य देखभाल की दिशा में एक कदम मानी जा रही है। इसलिए थ्रिसूर में हुई स्क्रीनिंग का पहला चरण सिर्फ जांच किए गए 17 हाथियों की सेहत का जायजा लेने तक सीमित नहीं है। इसका मकसद पूरे राज्य में लगातार स्वास्थ्य निगरानी के लिए एक व्यवस्था तैयार करना भी है।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में कितने बंदी हाथियों की स्वास्थ्य जांच की गई?

केरल के अलग-अलग हिस्सों से लाए गए 17 बंदी हाथियों की स्वास्थ्य जांच की गई।

बंदी हाथियों की जांच में किन चीजों को देखा गया?

ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, क्रिएटिन लेवल और लिवर-किडनी के कामकाज की जांच की गई।

पहला मेडिकल कैंप कहां लगाया गया?

पहला मेडिकल कैंप थ्रिसूर के श्री वडक्कुन्नाथन मंदिर में लगाया गया।

हाथियों के कौन-कौन से सैंपल लिए गए?

हाथियों के ब्लड, यूरिन और मल के सैंपल लिए गए और उन्हें केवीएएसयू की लैब में भेजा गया।

हेल्थ कार्ड बनाने का मकसद क्या है?

हर हाथी का मेडिकल इतिहास दर्ज करना और आगे की जांच व इलाज में मदद करना हेल्थ कार्ड का मकसद है।

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