कनावनी के किसानों का 28वें दिन का धरना जारी, खतौनी में नाम बहाली की मांग
कनावनी गांव के किसानों ने अपनी खतौनी में नाम बहाल करने की मांग को लेकर धरना जारी रखा है। यह धरना 10 सितंबर 2026, गुरुवार को लगातार 28वें दिन भी चलता रहा।
कनावनी गांव के किसानों ने अपनी खतौनी में नाम बहाल करने की मांग को लेकर धरना जारी रखा है। यह धरना 10 सितंबर 2026, गुरुवार को लगातार 28वें दिन भी चलता रहा। चार हफ्ते से किसान शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से धरने पर डटे हुए हैं और अपनी मांगों पर अडिग बने हुए हैं।
किसानों का कहना है कि प्राधिकरण द्वारा राजस्व अभिलेखों और खतौनियों में उनका नाम दर्ज किया गया था। किसानों के मुताबिक माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा खत्म हो जाने के बावजूद जब तय अवधि में अवॉर्ड नहीं बनाया गया, तो अदालत के आदेश के अनुसार प्राधिकरण के अधिकार समाप्त हो चुके हैं।
ऐसे में अब किसानों की मुख्य मांग है कि राजस्व अभिलेखों में किसानों के नाम फिर से दर्ज किए जाएं और खतौनियों में किसानों के नाम बहाल किए जाएं। किसानों ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक राजस्व रिकॉर्ड में किसानों के नाम दर्ज नहीं किए जाते, तब तक धरना खत्म नहीं किया जाएगा। किसान अपनी जमीन और राजस्व अधिकारों की बहाली के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
कनावनी के धरना स्थल पर आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर किसानों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। प्रताप सिंह बागपत से और सतवीर सिंह दौसा से धरने पर पहुंचे। इनके अलावा अन्य गांवों के लोग भी आए और किसानों की मांगों के समर्थन में अपनी एकजुटता जाहिर की।
धरने पर मथन सिंह नागर, श्रीचंद नागर, राजेंद्र सिंह नागर, रणवीर बैसला, धनेश्वर शर्मा, करण सिंह नागर, गजेंद्र सिंह नागर, दीपचंद नागर, विनोद नागर, सतीश नागर, परवीन नागर, अशोक कसाना सहित कई किसान और गांव के लोग मौजूद रहे। किसान अपनी मांग पूरी होने तक धरना जारी रखने के लिए कमर कसे हुए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कनावनी के किसानों का धरना कितने दिन से चल रहा है?
कनावनी गांव के किसानों का धरना 28वें दिन चल रहा है। यह 10 सितंबर 2026 को 28वें दिन भी जारी था।
किसान आंदोलन की मुख्य मांग क्या है?
किसानों की मुख्य मांग है कि राजस्व अभिलेखों और खतौनियों में उनके नाम दर्ज और बहाल किए जाएं। किसान अपनी जमीन और राजस्व अधिकारों की बहाली चाहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या था?
सुप्रीम कोर्ट ने एक समय-सीमा निर्धारित की थी। किसानों के अनुसार, तय अवधि में अवॉर्ड नहीं बनाया गया, इसलिए कोर्ट के आदेश के अनुसार प्राधिकरण के अधिकार समाप्त हो चुके हैं।
क्या किसान धरना खत्म करने के लिए तैयार हैं?
नहीं, किसानों ने साफ कहा है कि जब तक राजस्व रिकॉर्ड में उनके नाम दर्ज नहीं किए जाते, तब तक धरना खत्म नहीं किया जाएगा।
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