सरकार ने बायोगैस उत्पादन दस गुना बढ़ाने की योजना को मंजूरी दी
गैस आयात पर निर्भरता घटाने के लिए बायोगैस उत्पादन दस गुना बढ़ाने का लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार को ₹23,731 करोड़ के नेशनल गोबरधन (गैल्वनाइजिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार को ₹23,731 करोड़ के नेशनल गोबरधन (गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) स्कीम को मंजूरी दी। इस योजना का मकसद अगले दस साल में बायोगैस उत्पादन को दस गुना बढ़ाना है। इसके साथ ही असम में बाइहाटा चाराली से तेजपुर तक 135.87 किलोमीटर लंबा चार लेन का हाईवे बनाने के लिए ₹8,970 करोड़ के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई है।
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बायोगैस
गोबरधन स्कीम के तहत गोबर, कृषि अवशेष, गन्ने का प्रेस मड और नगर निगम के ऑर्गेनिक कचरे को साफ ऊर्जा में बदला जाएगा। सरकार का कहना है कि इस पहल से भारत की प्राकृतिक गैस आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। बायोगैस, जो प्राकृतिक गैस के समान होती है, मौजूदा गैस पाइपलाइन नेटवर्क में आसानी से शामिल की जा सकती है।
बायोगैस उत्पादकों को स्थिर बाजार देने के लिए सरकार ने शहरों में गैस वितरण कंपनियों को अपने सप्लाई चेन में बायोगैस मिलाने का निर्देश दिया है। 2026-27 तक कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) में 3% बायोगैस मिलाना जरूरी होगा, जो 2027-28 में 4% और 2028-29 से 5% तक बढ़ाया जाएगा। इस कदम से बायोगैस प्लांट में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और उत्पादकों को अपने उत्पादन के लिए भरोसेमंद बाजार मिलेगा।
आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक फायदे
सरकार का अनुमान है कि गोबरधन स्कीम अगले दस साल में ₹40,000 करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाएगी, 1.5 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा करेगी और 250 मिलियन टन ऑर्गेनिक खाद का उत्पादन करेगी। इसके साथ ही इस पहल से 40 मिलियन टन से ज्यादा कार्बन उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है। किसान गोबर और फसल अवशेष बेचकर आर्थिक लाभ उठा सकेंगे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के मौके बढ़ेंगे।
असम में हाईवे प्रोजेक्ट से कनेक्टिविटी को बढ़ावा
कैबिनेट ने असम में बाइहाटा चाराली (गुवाहाटी के पास) से मिशन चाराली (तेजपुर के पास) तक चार लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे बनाने की मंजूरी दी। ₹8,970 करोड़ का यह प्रोजेक्ट बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (टोल) मॉडल पर तैयार किया जाएगा। इस हाईवे से गुवाहाटी और तेजपुर के बीच यात्रा का समय 3.5 घंटे से घटकर सिर्फ 1.7 घंटे रह जाएगा।
यह हाईवे तेजपुर, ब्रह्मपुत्र टनल और अरुणाचल प्रदेश जैसे रणनीतिक क्षेत्रों से कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा। खास बात यह है कि तेजपुर बाइपास पर 4.9 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप भी बनाई जाएगी, जिसे भारतीय वायुसेना के साथ समन्वय में तैयार किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी अहम है।
ये दोनों पहलें भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने की दिशा में बड़ा कदम हैं।
स्रोत: Patrika
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