मॉनसून में 14% कम बारिश भी सामान्य दायरे में
मई-अगस्त में भारत में 598mm बारिश दर्ज हुई, जो 94mm कम है। अल नीनो के असर के बावजूद स्थिति सामान्य बनी है।
अल नीनो का मामूली असर: मॉनसून के 3 महीनों में भारत में 14% कम बारिश दर्ज
अल नीनो की चेतावनियों के बावजूद, मौसम के पहले तीन महीनों में भारत का मॉनसून सामान्य दायरे में रहा, बारिश लंबे समय के औसत से 14 फीसदी कम रही, जिसे मौसम विभाग अभी भी सामान्य की श्रेणी में रखता है।
1 जून से 30 अगस्त के बीच देश में 598 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य 694 मिलीमीटर है। विभाग के वर्गीकरण के हिसाब से, 20 फीसदी से कम की कमी को सामान्य बारिश माना जाता है।
क्षेत्रीय बंटवारे में नॉर्थईस्ट अलग
भारत की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से बारिश का पैटर्न अलग-अलग रहा, देश के 56 फीसदी इलाके में सामान्य बारिश हुई जबकि 44 फीसदी में सामान्य से कम बारिश रही।
नॉर्थईस्ट में सबसे ज्यादा 26 फीसदी की कमी रही, यहां 1,075 मिलीमीटर के सामान्य मुकाबले 792 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। हालांकि, इस इलाके में बेसलाइन बारिश वैसे भी बहुत ज्यादा होती है, इसलिए असल में बारिश देश के ज्यादातर दूसरे हिस्सों से अधिक ही रही। इस कमी का असर आंकड़ों के औसत पर ज्यादा पड़ा, जमीनी हालात पर कम।
नॉर्थवेस्ट इंडिया, दूसरे बड़े जोन में, 480 मिलीमीटर के मुकाबले 429 मिलीमीटर बारिश हुई, यानी 11 फीसदी की कमी। वहीं, सेंट्रल इंडिया में अच्छी बारिश दर्ज हुई।
अल नीनो की चिंता क्यों होती है
अल नीनो एक क्लाइमेट पैटर्न है जो पैसिफिक ओशन में गर्मी बढ़ने से पैदा होता है और आमतौर पर भारत के मॉनसून सिस्टम को कमजोर करता है। इसकी सबसे बड़ी अहमियत साउथवेस्ट मॉनसून पर इसके असर में है, जो भारत की साल भर की कुल बारिश का बड़ा हिस्सा लाता है।
2023 में, अल नीनो की स्थिति के बावजूद, जून से सितंबर के पूरे मॉनसून में बारिश सामान्य से सिर्फ 5.3 फीसदी कम रही। मौसम के जानकारों ने इस साल भी सामान्य स्थिति का अनुमान लगाया था।
स्रोत: Live Hindustan
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मॉनसून में 14% कम बारिश आना सामान्य माना जाता है?
जी, मौसम विभाग के हिसाब से 20 फीसदी से कम की कमी को सामान्य बारिश की श्रेणी में रखा जाता है। इस साल जून से अगस्त तक 14 फीसदी कम बारिश हुई, जो सामान्य दायरे में आती है।
अल नीनो क्या है और इससे मॉनसून पर क्या असर पड़ता है?
अल नीनो एक क्लाइमेट पैटर्न है जो पैसिफिक ओशन में गर्मी बढ़ने से पैदा होता है। यह भारत के मॉनसून सिस्टम को कमजोर करता है, खासकर साउथवेस्ट मॉनसून को, जो भारत की सालाना कुल बारिश का बड़ा हिस्सा लाता है।
भारत के किस हिस्से में सबसे ज्यादा बारिश की कमी रही?
नॉर्थईस्ट भारत में सबसे ज्यादा 26 फीसदी की कमी दर्ज हुई। वहां 792 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य 1,075 मिलीमीटर है। लेकिन इस इलाके में वैसे भी बहुत ज्यादा बारिश होती है।
इस साल मॉनसून में कुल कितनी बारिश दर्ज हुई?
जून से अगस्त के बीच भारत में 598 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 694 मिलीमीटर है। यानी 96 मिलीमीटर की कमी रही।
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