आईआईएम-बैंगलोर अगस्त में शुरू करेगा पहला अंडरग्रेजुएट स्कूल
आईआईएम-बैंगलोर अगस्त में पहली बार शुरू करेगा अंडरग्रेजुएट स्कूल भारतीय प्रबंधन संस्थान बैंगलोर (आईआईएम-बी) इस अगस्त में अपना पहला अंडरग्रेजुएट स्कूल शुरू करने जा रहा है।
भारतीय प्रबंधन संस्थान बैंगलोर (आईआईएम-बी) इस अगस्त में अपना पहला अंडरग्रेजुएट स्कूल शुरू करने जा रहा है। यह संस्थान के इतिहास में एक बड़ा कदम है। नए स्कूल का नाम 'गोरुर रतन टाटा स्कूल ऑफ अंडरग्रेजुएट स्टडीज' रखा गया है। यह स्कूल आईआईएम-बी के मुख्य कैंपस से 27 किलोमीटर दूर एक अलग कैंपस से संचालित होगा। इस साल से एडमिशन शुरू होंगे, जिसे टाटा ट्रस्ट्स की ग्रांट से समर्थन मिलेगा।
युवाओं के लिए नया कदम
आईआईएम-बी के डायरेक्टर-इन-चार्ज दिनेश कुमार ने शनिवार को आईआईएमब्यू 2026 लीडरशिप कॉन्क्लेव में कहा, "आईआईएम-बी के इतिहास में पहली बार 17 साल के छात्रों को एडमिशन दिया जाएगा।" उन्होंने माना कि इस उम्र के छात्रों को संभालने को लेकर संस्थान थोड़ा चिंतित है। उन्होंने मजाक में कहा, "हम थोड़ा नर्वस हैं क्योंकि हमने कभी इस उम्र के छात्रों को नहीं संभाला। अभी-अभी 20 साल के छात्रों की आदत पड़ी थी।"
यह स्कूल पारंपरिक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स से अलग होगा और इसे नालंदा विश्वविद्यालय की विरासत से प्रेरित एक वर्ल्ड-क्लास संस्थान के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रो. कुमार ने कहा कि यह पहल सिर्फ एक नया अकादमिक प्रोग्राम जोड़ने के लिए नहीं है, बल्कि एक ऐसा संस्थान बनाने के लिए है जो प्राचीन शैक्षिक आदर्शों को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ सके।
भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार किए गए इंटरडिसिप्लिनरी प्रोग्राम्स
गोरुर रतन टाटा स्कूल शुरुआत में दो फुल-टाइम रेजिडेंशियल प्रोग्राम्स ऑफर करेगा, जिसमें बी.एससी. (ऑनर्स) इन इकोनॉमिक्स शामिल है। दोनों कोर्स चार साल के होंगे और अगस्त से शुरू होंगे। इनका कोर्स डेटा साइंस, इकोनॉमिक्स और बिजनेस स्टडीज को जोड़कर तैयार किया गया है ताकि छात्रों को डेटा-ड्रिवन ग्लोबल इकॉनमी की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।
हर प्रोग्राम में 40 छात्रों को एडमिशन दिया जाएगा ताकि फोकस्ड और इंटेंसिव लर्निंग एनवायरनमेंट तैयार किया जा सके। संस्थान का यह कदम दिखाता है कि वह डेटा-इंटेंसिव फील्ड्स में चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रोफेशनल्स तैयार करने की जरूरत को समझता है।
टेक्नोलॉजी के गैप को भरने की कोशिश
प्रो. कुमार ने उभरती टेक्नोलॉजीज को बेहतर तरीके से समझने में संस्थानों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 95% आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोजेक्ट्स इसलिए फेल हो जाते हैं क्योंकि टेक्नोलॉजी को सही तरीके से समझा नहीं जाता। उन्होंने कहा, "आईआईएम बैंगलोर जैसे संस्थानों की जिम्मेदारी है कि लोग इन टेक्नोलॉजीज को सही तरीके से समझें ताकि वे वैल्यू और इम्पैक्ट क्रिएट कर सकें।"
क्यों है यह कदम खास?
आईआईएम-बी का यह कदम उसके पारंपरिक पोस्टग्रेजुएट और एग्जीक्यूटिव एजुकेशन फोकस से हटकर एक नया रास्ता दिखाता है। अंडरग्रेजुएट स्टडीज में कदम रखकर आईआईएम-बी न केवल अपनी पहुंच बढ़ा रहा है, बल्कि युवा छात्रों के लिए इंटरडिसिप्लिनरी एजुकेशन की बढ़ती मांग को भी पूरा कर रहा है। डेटा साइंस और बिजनेस स्टडीज को कोर्स में शामिल करना इंडस्ट्री की जरूरतों के साथ मेल खाता है, जिससे ग्रेजुएट्स भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे।
स्रोत: The Hindu
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