हैदराबाद में फाउंटेन पेन का शौक डिजिटल युग में भी कायम
हैदराबाद में फाउंटेन पेन का क्रेज डिजिटल दौर में भी बरकरार आज के डिजिटल युग में, हैदराबाद के फाउंटेन पेन प्रेमी लिखने की इस खास कला को ज़िंदा रख रहे हैं।
आज के डिजिटल युग में, हैदराबाद के फाउंटेन पेन प्रेमी लिखने की इस खास कला को ज़िंदा रख रहे हैं। हैदराबाद फाउंटेन पेन क्लब (HFPC) में हर महीने कलेक्टर और कारीगर इकट्ठा होते हैं। यहां पेन, इंक और पेपर शेयर किए जाते हैं और एक कम्युनिटी का माहौल बनाया जाता है।
एक बढ़ता हुआ ट्रेंड
HFPC की शुरुआत 2016 में हुई थी, लेकिन इसे असली रफ्तार कोविड-19 महामारी के दौरान मिली। उस वक्त जब लोग अकेले थे, इस शौक ने उन्हें जोड़ने का काम किया। क्लब के फाउंडिंग मेंबर नवीन सिगमनी कहते हैं, "10 साल पहले ये बहुत अकेला शौक था।" महामारी के दौरान लोगों ने न सिर्फ एक-दूसरे से जुड़ना शुरू किया बल्कि राजामुंद्री जैसे शहरों के कारीगरों से भी संपर्क किया, जो हैंडमेड पेन बनाने के लिए मशहूर हैं।
क्लब की मीटिंग्स में कारीगरी की झलक देखने को मिलती है। यहां मेंबर्स अपने नए पेन दिखाते हैं, जिसमें एक्रिलिक पेन से लेकर प्रीमियम मॉडल जैसे पायलट कस्टम उरुशी शामिल होते हैं। उरुशी पेन अपने खूबसूरत लैक्कर वर्क के लिए मशहूर है। हैंडमेड एबोनाइट पेन, जो कलेक्टर्स की पहली पसंद हैं, अक्सर हैदराबाद के कुशल कारीगरों पर चर्चा को जन्म देते हैं।
पेन बनाने वाले कारीगर
हैदराबाद के फाउंटेन पेन कल्चर के पीछे ऐसे कारीगर हैं जो अपनी कला से इसे ज़िंदा रखे हुए हैं। इनमें से एक हैं 73 साल के पूना लक्ष्मी पथी (PLP), जो पिछले लगभग 60 सालों से पेन बना रहे हैं। उनका काम 35 स्टेप्स से होकर गुजरता है, जिसमें एबोनाइट रॉड्स को काटना, घुमाना, थ्रेडिंग और हाथ से पॉलिश करना शामिल है। PLP कहते हैं, "मेरे लिए हमेशा क्वालिटी मायने रखती थी, पैसा नहीं।" 2021 में उनके बेटों ने उनके नाम पर PLP ब्रांड लॉन्च किया ताकि उनके काम को सम्मान दिया जा सके।
दूसरी तरफ, पी प्रभाकर चारी हैं, जो वुडेक्स ब्रांड के अकेले कारीगर हैं। उनका छोटा वर्कशॉप मसाब टैंक के पास है। चारी हर महीने सिर्फ 25-30 पेन बनाते हैं, जिनमें से हर एक का सीरियल नंबर होता है। हालांकि, उनका एक मॉडल "स्काईलाइन" सीरियल नंबर के बिना आता है। उनके क्लाइंट्स में सांसद और पुलिस अधिकारी शामिल हैं, जो उनकी कारीगरी की तारीफ करते हैं। लेकिन चारी इस बात का अफसोस करते हैं कि उनका काम आगे बढ़ाने वाला कोई नहीं है। वो कहते हैं, "मेरे बाद कोई नहीं है।"
क्यों है ये खास
डिजिटल दौर में, हैदराबाद का फाउंटेन पेन कल्चर हमें कागज़ पर लिखने की खुशी और सुकून की याद दिलाता है। HFPC के मेंबर नुव्वला श्रीकांत के लिए ये सिर्फ एक शौक नहीं है, बल्कि थेरेपी है। स्वास्थ्य समस्या के बाद श्रीकांत ने फाउंटेन पेन को अपने रिकवरी का हिस्सा बनाया और कस्टमाइज्ड निब से लिखने में सुकून पाया।
फाउंटेन पेन के प्रति ये जुनून सिर्फ कारीगरी के प्यार को नहीं दिखाता, बल्कि तेजी से बदलती दुनिया में परंपराओं को बचाने की अहमियत भी बताता है। हैदराबाद के पेनमेकर्स अपनी मेहनत से ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि लिखने की ये कला शहर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनी रहे।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हैदराबाद में फाउंटेन पेन का शौक क्यों बढ़ रहा है?
हैदराबाद के फाउंटेन पेन प्रेमी इस खास कला को डिजिटल युग में भी ज़िंदा रख रहे हैं, और HFPC क्लब में मिलकर अपनी कलेक्शन और कारीगरी को साझा कर रहे हैं।
HFPC की स्थापना कब हुई थी?
HFPC की शुरुआत 2016 में हुई थी, लेकिन इसे असली रफ्तार कोविड-19 महामारी के दौरान मिली।
हैदराबाद के फाउंटेन पेन कारीगर कौन हैं?
हैदराबाद के फाउंटेन पेन कल्चर के पीछे पूना लक्ष्मी पथी और पी प्रभाकर चारी जैसे कारीगर हैं, जो अपनी कला से इस शौक को ज़िंदा रखे हुए हैं।
फाउंटेन पेन के प्रति लोगों का जुनून किस चीज़ को दर्शाता है?
यह जुनून कारीगरी के प्यार को नहीं, बल्कि तेजी से बदलती दुनिया में परंपराओं को बचाने की अहमियत को भी दर्शाता है।
फाउंटेन पेन का उपयोग किस तरह से लोगों के लिए थेरेपी बन गया है?
नुव्वला श्रीकांत ने स्वास्थ्य समस्या के बाद फाउंटेन पेन को अपनी रिकवरी का हिस्सा बनाया और कस्टमाइज्ड निब से लिखने में सुकून पाया।
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