इमरजेंसी फंड बनाने के 3 आसान कदम जानें
आपके पास इमरजेंसी सेविंग्स नहीं हैं? इन 3 स्टेप्स को अपनाकर बनाएं फाइनेंशियल सेफ्टी नेट पहले सुरक्षा, फिर संपत्ति बनाना अक्सर परिवारों से एक बड़ी गलती हो जाती है।
आपके पास इमरजेंसी सेविंग्स नहीं हैं? इन 3 स्टेप्स को अपनाकर बनाएं फाइनेंशियल सेफ्टी नेट
पहले सुरक्षा, फिर संपत्ति बनाना
अक्सर परिवारों से एक बड़ी गलती हो जाती है। वो वेल्थ बिल्डिंग पर ध्यान देते हैं, लेकिन फाइनेंशियल सिक्योरिटी की नींव यानी इमरजेंसी फंड को भूल जाते हैं। इसका नतीजा ये होता है कि अचानक आने वाले खर्चे या क्राइसिस जैसे मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी का जाना या जरूरी रिपेयर, उनके लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स को बिगाड़ सकते हैं।
यहां जानिए कैसे आप एक मजबूत फाइनेंशियल सेफ्टी नेट बना सकते हैं:
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1. अपने मंथली खर्चों का आकलन करें
सबसे पहले अपने जरूरी मंथली खर्चों का हिसाब लगाएं। इसमें रेंट या होम लोन की पेमेंट, बिजली-पानी का बिल, ग्रोसरी, ट्रांसपोर्ट और इंश्योरेंस प्रीमियम शामिल करें। ये आंकड़ा आपको बताएगा कि आपको कितना इमरजेंसी फंड चाहिए। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि तीन से छह महीने के बेसिक खर्चों के बराबर सेविंग्स रखें।
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2. सेविंग्स को ऑटोमेट करें
इमरजेंसी फंड बनाने के लिए लगातार सेविंग्स करनी पड़ती है। इसे आसान बनाने के लिए अपनी सेविंग्स को ऑटोमेट करें। कई बैंक और फाइनेंशियल ऐप्स ऐसे टूल्स देते हैं, जो आपकी इनकम का एक हिस्सा तय समय पर सेविंग्स अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं। ये "सेट इट एंड फॉरगेट इट" तरीका आपको फंड बढ़ाने में मदद करेगा और खर्च करने का लालच भी कम करेगा।
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3. छोटे से शुरू करें, लगातार सेव करें
अगर तीन से छह महीने के खर्चों जितना सेव करना मुश्किल लग रहा है, तो छोटे और आसान टारगेट से शुरू करें। कुछ हजार रुपये भी छोटे-मोटे इमरजेंसी खर्चों से बचाने में मदद कर सकते हैं। सबसे जरूरी बात है कि आप लगातार सेविंग्स करें और धीरे-धीरे अपनी सेविंग्स बढ़ाएं।
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इन स्टेप्स को अपनाकर परिवार एक ऐसा फाइनेंशियल कुशन बना सकते हैं, जो ना सिर्फ अचानक आने वाली मुश्किलों से बचाएगा, बल्कि मन की शांति भी देगा। फाइनेंशियल प्रोटेक्शन को वेल्थ क्रिएशन से पहले प्राथमिकता देना लॉन्ग-टर्म स्टेबिलिटी के लिए बेहद जरूरी है।
स्रोत: NDTV
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इमरजेंसी फंड बनाने के लिए पहले कदम क्या है?
पहले अपने मंथली खर्चों का आकलन करें, जैसे रेंट, बिजली-पानी का बिल और ग्रोसरी।
सेविंग्स को ऑटोमेट करने का क्या फायदा है?
इससे आपकी सेविंग्स बढ़ाने में मदद मिलेगी और खर्च करने का लालच कम होगा।
अगर तीन से छह महीने के खर्चों जितना सेव करना मुश्किल है, तो क्या करें?
छोटे और आसान टारगेट से शुरू करें, जैसे कुछ हजार रुपये बचाना।
इमरजेंसी फंड बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
ये अचानक आने वाली मुश्किलों से बचाने और मन की शांति देने के लिए है।
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