मत्स्य विभाग ने गोविंदसागर में डाले 14.79 लाख से ज्यादा मछली बीज
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध गोविंदसागर जलाशय में मत्स्य संपदा बढ़ाने, उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए मत्स्य विभाग ने विभिन्न प्रजातियों के 14.79 लाख से अधिक गुणवत्तायुक्त मछली बीज का संग्रहण किया है।
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध गोविंदसागर जलाशय में मत्स्य संपदा बढ़ाने, उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए मत्स्य विभाग ने विभिन्न प्रजातियों के 14.79 लाख से अधिक गुणवत्तायुक्त मछली बीज का संग्रहण किया है। पश्चिम बंगाल और विभागीय मत्स्य फार्म से प्राप्त इन मछली बीजों को जलाशय के अलग-अलग स्थानों पर संग्रहित किया गया।
बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश में शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत 17 अक्तूबर को जिला बिलासपुर के लुहणू में 2,05,866 कतला एवं सिल्वर मछली बीज का प्रथम बैच संग्रहित किया गया। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में जलाशय के विभिन्न स्थानों पर दूसरी प्रजातियों के मछली बीज भी संग्रहित किए गए।
23 अक्तूबर को जिला ऊना के रायपुर मैदान में 3,38,505 सिल्वर कार्प मछली बीज का संग्रहण किया गया। इसके बाद 27 अक्तूबर को भाखड़ा में 3,83,472 कतला मछली बीज संग्रहित किए गए।
28 अक्तूबर को गोविंदसागर जलाशय के जकातखाना स्टेशन पर विभागीय कार्प फिश फार्म, अलसू, जिला मंडी से प्राप्त 2,66,000 रोहू एवं मृगल मछली बीज का संग्रहण किया गया।
इसके अतिरिक्त 30 अक्तूबर को लुहणू में पश्चिम बंगाल से विभाग द्वारा अनुमोदित दरों पर खरीदे गए 2,85,298 सिल्वर कार्प मछली बीज का भी संग्रहण किया गया। पश्चिम बंगाल से प्राप्त मछली बीज का आकार 100 मिलीमीटर एवं इससे अधिक है।
वहीं, रोहू और मृगल मछली बीज विभागीय कार्प फिश फार्म, अलसू, जिला मंडी में तैयार किया गया है। विभाग के अनुसार गुणवत्तायुक्त और बड़े आकार के मछली बीज के संग्रहण से इनके जीवित रहने की संभावना बेहतर रहती है। इससे गोविंदसागर जलाशय में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
मछली बीज संग्रहण की यह प्रक्रिया संयुक्त निदेशक मत्स्य, हिमाचल प्रदेश पवन कुमार की अध्यक्षता में गठित विभागीय समिति की निगरानी में पूरी की जा रही है। समिति के सदस्य सचिव एवं सहायक निदेशक मत्स्य, मत्स्य मंडल बिलासपुर पंकज ठाकुर, सहायक निदेशक मत्स्य मंडल मंडी नीतू सिंह और सहायक निदेशक मत्स्य मंडल सोलन पूनम धीमान इस प्रक्रिया के दौरान बतौर पर्यवेक्षक उपस्थित रहे।
इसके अलावा संबंधित मत्स्य अधिकारियों, मत्स्य सहकारी सभाओं के प्रतिनिधियों और स्थानीय मछुआरों ने भी विभिन्न स्थानों पर मछली बीज संग्रहण प्रक्रिया में हिस्सा लिया। विभागीय निगरानी में अलग-अलग प्रजातियों के मछली बीजों को जलाशय में निर्धारित स्थानों पर संग्रहित किया जा रहा है।
सहायक निदेशक मत्स्य, मत्स्य मंडल बिलासपुर पंकज ठाकुर ने बताया कि गोविंदसागर जलाशय में 46 मत्स्य सहकारी सभाएं काम कर रही हैं। इनके माध्यम से 2561 मछुआरे इस व्यवसाय से जुड़े हैं। ये मछुआरे रोज जलाशय से मछली पकड़कर अपनी आजीविका चलाते हैं।
पंकज ठाकुर ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश सरकार ने मछुआरों को प्रतिबंधित अवधि के दौरान 3500 रुपये प्रति मछुआरा परिवार सहायता राशि दी है। इसके अलावा केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पात्र मछुआरों को प्रतिबंधित अवधि के दौरान 3000 रुपये प्रति मछुआरा राहत राशि दिए जाने का प्रस्ताव है।
उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से निर्धारित मांग के अनुसार विभिन्न प्रजातियों के गुणवत्तायुक्त मछली बीज का संग्रहण किया जा रहा है। मत्स्य विभाग हर साल गोविंदसागर जलाशय के लिए प्रदेश के बाहर और विभागीय मत्स्य फार्मों से मछली बीज प्राप्त करता है। इन मछली बीजों का संग्रहण वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार किया जाता है।
विभाग के अनुसार इस काम का उद्देश्य गोविंदसागर जलाशय में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मत्स्य व्यवसाय से जुड़े स्थानीय मछुआरों की आजीविका को और मजबूत करना है। पंकज ठाकुर ने बताया कि मछली बीज संग्रहण की यह प्रक्रिया निर्धारित मांग के अनुसार आगे भी जारी रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोविंदसागर जलाशय में कितने मछली बीज डाले गए?
मत्स्य विभाग ने गोविंदसागर जलाशय में 14.79 लाख से ज्यादा गुणवत्तायुक्त मछली बीज डाले हैं।
मछली बीज किन प्रजातियों के हैं?
इनमें कतला, सिल्वर कार्प, रोहू और मृगल प्रजातियों के मछली बीज शामिल हैं।
मछली बीज कहां से लाए गए हैं?
मछली बीज पश्चिम बंगाल और विभागीय मत्स्य फार्म से लाए गए हैं।
मछली बीज डालने का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य गोविंदसागर जलाशय में मछली संपदा का संरक्षण और संवर्धन करना और मछली उत्पादन बढ़ाना है।
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