गोविंद सागर झील में डाली गईं कतला-सिल्वर कार्प की 2 लाख मछलियां
गोविंद सागर झील में कतला और सिल्वर कार्प मछलियों का मत्स्य बीज डाला गया है। मत्स्य पालन विभाग ने प्रदेश के बड़े जलाशयों में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने और स्थानीय मछुआरों की आजीविका को मजबूत करने के
गोविंद सागर झील में कतला और सिल्वर कार्प मछलियों का मत्स्य बीज डाला गया है। मत्स्य पालन विभाग ने प्रदेश के बड़े जलाशयों में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने और स्थानीय मछुआरों की आजीविका को मजबूत करने के लिए इस काम की शुरुआत की है। इसकी शुरुआत बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश स्थित गोविंद सागर झील से की गई।
विभाग की ओर से गोविंद सागर झील में कतला और सिल्वर कार्प मछलियों की उच्च गुणवत्ता वाली 2,05,866 मत्स्य उँगलिकाएँ डाली गई हैं। इन्हें ठेकेदार के माध्यम से पश्चिम बंगाल कोलकता से मंगवाया गया था। पहले चरण में कुल 2 लाख 5 हजार 866 कतला और सिल्वर कार्प मछलियों का बीज झील में डाला गया।
मात्स्यिकी निदेशालय के निदेशक ओमकांत ठाकुर ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन विभाग हर वर्ष प्रदेश के बड़े जलाशयों में मछलियों का बीज डालने का काम करता है। इनमें गोविंद सागर, पोंगडैेम, कोलडैम और चमेरा डेम इत्यादि शामिल हैं।
ओमकांत ठाकुर ने बताया कि इस बार प्रदेश के मुख्य जलाशयों में विभिन्न चरणों में करीब 1 करोड़ मत्स्य बीज डालने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग का उद्देश्य प्रदेश के जलाशयों में मछली उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही स्थानीय मछुआरों की आजीविका को मजबूत करना भी इस काम का अहम मकसद है।
गोविंद सागर झील में मत्स्य बीज डालने के दौरान विभागीय अधिकारी, मछुआरे और मत्स्य पालक समितियों के सदस्य मौजूद रहे। इन्हीं की उपस्थिति में कतला और सिल्वर कार्प मछलियों का बीज गोविंद सागर झील में डाला गया। विभाग ने इस प्रक्रिया की शुरुआत झील में बीज डालने के साथ की है।
निदेशक ओमकांत ठाकुर ने कहा कि विभाग हर वर्ष ठेकेदारों के माध्यम से उच्च गुणवत्तायुक्त मछलियों का बीज प्रदेश के बाहर से मंगवाता है। इसके बाद इस बीज को चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के अलग-अलग जलाशयों में डाला जाता है। इसी कड़ी में इस बार कतला और सिल्वर कार्प मछलियों का बेहतर गुणवत्ता वाला मत्स्य बीज विशेष रूप से पश्चिम बंगाल से मंगवाया गया है।
उन्होंने कहा कि गोविंद सागर झील सहित प्रदेश के बड़े जलाशयों में हर वर्ष बेहतर गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज डालने की मांग उठती रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने इस बार मछुआरों और स्थानीय हितधारकों की अपेक्षाओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाला मत्स्य बीज उपलब्ध करवाने का प्रयास किया है।
विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से आने वाले समय में गोविंद सागर झील में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इससे क्षेत्र के मछुआरों को भी आर्थिक लाभ होने की उम्मीद है। प्रदेश के अन्य मुख्य जलाशयों में भी विभिन्न चरणों में मत्स्य बीज डाला जाएगा, ताकि 1 करोड़ मत्स्य उँगलियाँ डालने का लक्ष्य पूरा किया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोविंद सागर झील में कितनी मछलियां डाली गईं?
गोविंद सागर झील में कतला और सिल्वर कार्प की 2,05,866 मत्स्य उँगलियां डाली गईं।
मछलियों का बीज कहां से मंगवाया गया था?
मछलियों का बीज ठेकेदार के माध्यम से पश्चिम बंगाल के कोलकाता से मंगवाया गया था।
मछली बीज डालने का मकसद क्या है?
इसका मकसद जलाशयों में मछली उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय मछुआरों की आजीविका मजबूत करना है।
प्रदेश के जलाशयों में कुल कितने मत्स्य बीज डालने का लक्ष्य है?
प्रदेश के मुख्य जलाशयों में अलग-अलग चरणों में करीब 1 करोड़ मत्स्य बीज डालने का लक्ष्य है।
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