गाजियाबाद के कनावनी में किसानों का धरना 19वें दिन भी जारी, आस-पास के गांवों से मिला समर्थन
गाजियाबाद के गांव कनावनी में किसानों का धरना 1 सितंबर 2026, मंगलवार को 19वें दिन भी जारी रहा।
गाजियाबाद के गांव कनावनी में किसानों का धरना 1 सितंबर 2026, मंगलवार को 19वें दिन भी जारी रहा। रविवार को हुई महापंचायत के बाद आसपास के दूसरे गांवों के किसान भी धरना स्थल पर पहुंचे और कनावनी के किसानों को अपना पूरा समर्थन देते हुए कहा कि वे इस लड़ाई में मजबूती से साथ खड़े हैं।
समर्थन में आए किसानों ने कनावनी के किसानों की आवाज को बुलंद करते हुए कहा कि किसानों की जायज मांगों की लड़ाई में वे पूरी तरह साथ हैं और जरूरत पड़ने पर इस संघर्ष में पूरी ताकत से शामिल होंगे। कनावनी के किसानों का कहना है कि गांव की मांगों पर प्रशासन ने अभी तक कोई गंभीर ध्यान नहीं दिया है।
किसानों ने साफ किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता और उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक धरना लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अब सिर्फ कनावनी के किसानों की नहीं रह गई है, बल्कि यह किसानों के हक और अधिकार की लड़ाई बन चुकी है।
किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रशासन उनकी आवाज को नजरअंदाज करने की कोशिश करता है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। धरना स्थल पर महेंद्र नागर, कबूल सिंह नागर, श्रीपाल नागर, सेलक नागर, भगवत सिंह नागर, श्रीचंद नागर, लखीराम शर्मा, सुखबीर सिंह नागर, करण सिंह नागर, प्रकाश नागर, भोपाल नागर, रोहित नागर, भगतराम जाटव, त्रिखा जाटव समेत कई किसान मौजूद रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कनावनी में किसानों का धरना कितने दिन से चल रहा है?
गाजियाबाद के गांव कनावनी में किसानों का धरना 19वें दिन भी जारी है। यह धरना 1 सितंबर 2026, मंगलवार को अपने 19वें दिन में है।
क्या आसपास के गांवों से भी किसानों का समर्थन मिल रहा है?
जी हां, रविवार को हुई महापंचायत के बाद आसपास के दूसरे गांवों के किसान भी धरना स्थल पर पहुंचे हैं और कनावनी के किसानों को अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं।
किसान अपनी मांगों को लेकर क्या कह रहे हैं?
किसानों का कहना है कि गांव की मांगों पर प्रशासन ने अभी तक कोई गंभीर ध्यान नहीं दिया है। वे कहते हैं कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता और उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक धरना जारी रहेगा।
क्या किसान आंदोलन को और आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं?
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन उनकी आवाज को नजरअंदाज करता है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। वे कहते हैं यह अब सिर्फ कनावनी के किसानों की नहीं, बल्कि किसानों के हक और अधिकार की लड़ाई बन चुकी है।
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