किसानों ने KPTCL प्रोजेक्ट को दी मंजूरी, 15 साल का विवाद खत्म
15 साल का विवाद खत्म, किसानों ने मैसूरु में KPTCL प्रोजेक्ट को दी मंजूरी कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (KPTCL) ने मैसूरु जिले में लंबे समय से रुके हुए 220kV कडकोल-वजमंगला पावर लाइन
कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (KPTCL) ने मैसूरु जिले में लंबे समय से रुके हुए 220kV कडकोल-वजमंगला पावर लाइन प्रोजेक्ट पर काम फिर से शुरू कर दिया है। गुरुवार को KPTCL ने जमीन मालिकों को मुआवजा दिया और स्थानीय किसानों, यूनियन नेताओं और पुलिस विभाग के समर्थन से रुका हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर का काम शुरू किया।
2011 से रुका प्रोजेक्ट अब आगे बढ़ा
2011 में शुरू हुआ ये प्रोजेक्ट मुआवजे और अन्य मुद्दों को लेकर विवादों के कारण लंबे समय तक अटका रहा। इस दौरान प्रोजेक्ट के तहत 83 पावर टावर बनाए गए थे, लेकिन लाइन-स्ट्रीनिंग का अहम काम पिछले एक दशक से अधूरा था। KPTCL के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. वी. राम प्रसाथ मनोहर और ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज के नेतृत्व में हुई नई बातचीत के बाद, निगम ने प्रभावित जमीन मालिकों को बढ़ा हुआ मुआवजा देने पर सहमति जताई। इसके बाद प्रोजेक्ट का काम फिर से शुरू हुआ।
KPTCL ने अब अगले 40-50 दिनों में लाइन-स्ट्रीनिंग का काम पूरा करने का वादा किया है। इस प्रोजेक्ट से मैसूरु क्षेत्र में बिजली कनेक्टिविटी को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
किसानों का सहयोग बना प्रगति की कुंजी
इस विवाद को सुलझाने में KPTCL के सुलहकारी रवैये को अहम माना जा रहा है। निगम ने प्रेस रिलीज में कहा, "जमीन मालिकों और किसानों ने KPTCL के मैत्रीपूर्ण रवैये पर खुशी जाहिर की और इसके प्रोजेक्ट्स में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया।" ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज ने किसानों के भरोसे पर जोर देते हुए कहा, "KPTCL हमेशा किसानों को मुआवजा और जरूरी मदद देने के लिए तैयार है। अगर आप हम पर भरोसा करें और सहयोग करें, तो बिजली सेवाएं कुशलता से दी जाएंगी।"
डॉ. मनोहर ने मैसूरु क्षेत्र में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के व्यापक मिशन पर जोर दिया, वहीं सुपरिटेंडेंट इंजीनियर रमेश ने कहा कि जमीन मालिकों और किसानों के निरंतर सहयोग से प्रोजेक्ट जल्द पूरा करने का भरोसा है।
क्यों है ये प्रोजेक्ट अहम
कडकोल-वजमंगला पावर लाइन के पूरा होने से क्षेत्र में बिजली ट्रांसमिशन की विश्वसनीयता और दक्षता में सुधार होगा, जिसका फायदा किसानों और आम जनता दोनों को मिलेगा। 15 साल पुराने इस विवाद का समाधान संवाद और उचित मुआवजे के जरिए किया गया, जो भविष्य में ऐसे ही अन्य विवादों को सुलझाने के लिए मिसाल बन सकता है। इससे अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच सहयोग की अहमियत भी सामने आती है।
स्रोत: The Hindu
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