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CLAT में बड़े बदलाव का प्रस्ताव, 2027 परीक्षा पर नहीं होगा असर

एक्सपर्ट पैनल ने CLAT में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया, 2027 की परीक्षा पर असर नहीं कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) में बड़े बदलाव का प्रस्ताव एक्सपर्ट कमेटी ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) में बड़े बदलाव

CLAT में बड़े बदलाव का प्रस्ताव, 2027 परीक्षा पर नहीं होगा असर
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कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) में बड़े बदलाव का प्रस्ताव

एक्सपर्ट कमेटी ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) में बड़े बदलाव का सुझाव दिया है। इसमें अंडरग्रेजुएट उम्मीदवारों के लिए जनरल नॉलेज सेक्शन हटाने और सवालों की संख्या कम करने की बात कही गई है। हालांकि, ये बदलाव 2027 की परीक्षा पर लागू नहीं होंगे। CLAT का संचालन करने वाले नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के कंसोर्टियम ने यह जानकारी दी है।

सार्वजनिक राय मांगी गई

कंसोर्टियम ने पिछले हफ्ते एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट जारी की। इसमें साफ किया गया कि ये सिफारिशें CLAT 2028 को ध्यान में रखकर की गई हैं। 2027 की परीक्षा में केवल सवालों के फॉर्मेट और क्वालिटी में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। इस रिपोर्ट पर आम जनता से 31 अगस्त तक फीडबैक मांगा गया है।

पांच सदस्यीय पैनल, जिसमें LSE, ऑक्सफोर्ड, कोलंबिया, BML मुंजाल यूनिवर्सिटी और कैम्ब्रिज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं, पिछले साल सुप्रीम कोर्ट की आलोचना के बाद बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज, जस्टिस इंदु मल्होत्रा, कंसोर्टियम की एडवाइजरी बोर्ड की अध्यक्ष हैं।

मुख्य सिफारिशें: परीक्षा के ढांचे में बदलाव

रिपोर्ट में अंडरग्रेजुएट CLAT उम्मीदवारों के लिए तीन सेक्शन का नया मॉडल प्रस्तावित किया गया है। जनरल नॉलेज सेक्शन को पूरी तरह से हटाने और उसकी जगह फंक्शनल लिटरेसी पर आधारित नया इंग्लिश सेक्शन जोड़ने की बात कही गई है। लीगल और लॉजिकल रीजनिंग को मिलाकर एक नया एप्टीट्यूड सेक्शन बनाने का सुझाव दिया गया है। हर सेक्शन में 10-15 सवाल होंगे। परीक्षा की अवधि दो घंटे ही रहेगी, लेकिन स्पीड पर जोर कम किया जाएगा। एक नया सब्जेक्टिव एस्से सेक्शन भी जोड़ा जाएगा, जो कम्युनिकेशन और तर्क क्षमता को परखेगा।

पोस्टग्रेजुएट उम्मीदवारों के लिए कमेटी ने सुझाव दिया है कि समान सिलेबस की जगह एक टेलर्ड अप्रोच अपनाई जाए। परीक्षा का आधा हिस्सा अंडरग्रेजुएट स्टाइल सेक्शन पर आधारित होगा, जबकि बाकी हिस्सा हालिया कानूनी घटनाओं और सब्जेक्टिव प्रॉब्लम-सॉल्विंग सवालों पर केंद्रित होगा।

CLAT के संचालन में सुधार की जरूरत

पैनल ने CLAT के संचालन में मौजूद खामियों को भी उजागर किया है। इसमें सदस्य यूनिवर्सिटीज के बीच घुमावदार कन्वेनरशिप मॉडल को लेकर चिंता जताई गई है, जिससे संस्थागत मेमोरी प्रभावित होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि पेपर सेटिंग प्रक्रिया को प्रोफेशनल बनाया जाए। इसके लिए बाहरी टेस्टिंग एक्सपर्ट्स को नियुक्त किया जाए या एक समर्पित आंतरिक टीम बनाई जाए, ताकि क्वालिटी कंट्रोल सुनिश्चित हो सके और उत्तर कुंजी में गलतियों के कारण होने वाली कानूनी विवादों को कम किया जा सके।

क्यों है ये बदलाव जरूरी?

प्रस्तावित सुधार CLAT की लंबे समय से हो रही आलोचना को दूर करने की कोशिश करते हैं। इसमें रटने की आदत और कोचिंग सेंटरों को मिलने वाले अनुचित लाभ जैसी समस्याओं पर ध्यान दिया गया है। ये बदलाव परीक्षा को कानूनी शिक्षा और प्रैक्टिस के लिए जरूरी स्किल्स के साथ अधिक मेल खाने और इसके संचालन को बेहतर बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। कंसोर्टियम ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से इन सिफारिशों का आकलन करने के लिए एक कमेटी बनाने का अनुरोध किया है।

सार्वजनिक फीडबैक और 2028 तक लागू होने वाले बदलावों के साथ, ये रिपोर्ट भारत के सबसे महत्वपूर्ण लॉ एंट्रेंस एग्जाम को फिर से सोचने की दिशा में अहम मोड़ साबित हो सकती है।

स्रोत: Indian Express

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CLAT में क्या बदलाव आने वाले हैं?

एक्सपर्ट पैनल ने CLAT में बड़े बदलाव का सुझाव दिया है। अंडरग्रेजुएट के लिए जनरल नॉलेज सेक्शन हटाया जाएगा और उसकी जगह फंक्शनल लिटरेसी वाला इंग्लिश सेक्शन आएगा। लीगल और लॉजिकल रीजनिंग को मिलाकर एक नया सेक्शन बनेगा। हर सेक्शन में 10-15 सवाल होंगे और एक नया सब्जेक्टिव एस्से सेक्शन भी जोड़ा जाएगा।

क्या ये बदलाव 2027 की CLAT परीक्षा में लागू होंगे?

नहीं, ये बदलाव 2027 की परीक्षा पर लागू नहीं होंगे। ये सिफारिशें CLAT 2028 को ध्यान में रखकर की गई हैं। 2027 की परीक्षा में केवल सवालों के फॉर्मेट और क्वालिटी में कुछ छोटे-मोटे बदलाव किए जा सकते हैं।

इस एक्सपर्ट पैनल में कौन शामिल हैं?

पांच सदस्यीय पैनल में LSE, ऑक्सफोर्ड, कोलंबिया, BML मुंजाल यूनिवर्सिटी और कैम्ब्रिज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज, जस्टिस इंदु मल्होत्रा, इस पैनल की एडवाइजरी बोर्ड की अध्यक्ष हैं।

पोस्टग्रेजुएट CLAT में क्या बदलाव हैं?

पोस्टग्रेजुएट के लिए एक टेलर्ड अप्रोच का सुझाव दिया गया है। परीक्षा का आधा हिस्सा अंडरग्रेजुएट स्टाइल सेक्शन पर आधारित होगा, जबकि बाकी हिस्सा हालिया कानूनी घटनाओं और सब्जेक्टिव प्रॉब्लम-सॉल्विंग सवालों पर केंद्रित होगा।

CLAT के संचालन में क्या सुधार सुझाए गए हैं?

पैनल ने पेपर सेटिंग प्रक्रिया को प्रोफेशनल बनाने की सिफारिश की है। इसके लिए बाहरी टेस्टिंग एक्सपर्ट्स को नियुक्त किया जाए या एक समर्पित आंतरिक टीम बनाई जाए। इससे क्वालिटी कंट्रोल बेहतर होगा और उत्तर कुंजी में गलतियों से होने वाले विवाद कम होंगे।

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