दिल्ली में एमिली ईडन की दुर्लभ कला प्रदर्शनी शुरू
दिल्ली में एक खास प्रदर्शनी: विक्टोरियन आर्टिस्ट एमिली ईडन की भारतीय पेंटिंग्स करीब 200 साल बाद, दिल्ली को "देखने लायक कुछ नहीं" कहने वाली विक्टोरियन आर्टिस्ट एमिली ईडन की कला एक दुर्लभ प्रदर्शनी के
दिल्ली में एक खास प्रदर्शनी: विक्टोरियन आर्टिस्ट एमिली ईडन की भारतीय पेंटिंग्स
करीब 200 साल बाद, दिल्ली को "देखने लायक कुछ नहीं" कहने वाली विक्टोरियन आर्टिस्ट एमिली ईडन की कला एक दुर्लभ प्रदर्शनी के जरिए वापस लौटी है। Princes & People of India: Portraits by Emily Eden नाम की इस प्रदर्शनी में ईडन फैमिली की करीब 30 हैंड-कलर्ड लिथोग्राफ्स और आर्काइव मटीरियल को दिखाया गया है। ये प्रदर्शनी जनपथ स्थित DAG में हो रही है और 1 अगस्त तक चलेगी।
19वीं सदी के भारत पर अनोखी नजर
एमिली ईडन, जो 1836 से 1842 तक भारत के गवर्नर-जनरल रहे जॉर्ज ईडन की बहन थीं, ने उत्तर भारत का सफर किया और अपनी यात्रा को कला और पत्रों के जरिए दर्ज किया। उनकी पेंटिंग्स में भारतीय राजघराने, सैनिक और आम लोग बेहद बारीकी से उकेरे गए हैं। इनमें पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह, पटियाला के राजा को राजकीय हाथी पर और कोलकाता के हिंदू कॉलेज (अब प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी) के एक युवा छात्र की तस्वीरें शामिल हैं।
जहां उस समय के कई ब्रिटिश आर्टिस्ट लैंडस्केप पर फोकस करते थे, वहीं एमिली ईडन ने लोगों को अपनी कला का केंद्र बनाया। यह उन्हें अलग बनाता है क्योंकि उन्हें भारतीय राजघराने और कुलीन वर्ग तक पहुंच हासिल थी, जो उस दौर की महिलाओं के लिए दुर्लभ थी। प्रदर्शनी की क्यूरेटर और आर्ट हिस्टोरियन मैरी एन प्रायर ने बताया कि ईडन की पेंटिंग्स उनके विषयों की भव्यता और इंसानियत दोनों को दर्शाती हैं। जैसे, महाराजा रणजीत सिंह की तस्वीर में उनके अंतिम वर्षों की कमजोरी के बावजूद उनकी ताकत झलकती है।
दिल्ली: एक नजरअंदाज शहर
अपने लंबे सफर के बावजूद, ईडन ने दिल्ली को लगभग नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने यहां सिर्फ एक हफ्ता बिताया और इसे "भूतों का शहर" कहा। अपने भतीजे को लिखे एक पत्र में उन्होंने दिल्ली को "मस्जिदों और महलों के विशाल खंडहरों" के अलावा कुछ खास न बताते हुए खारिज कर दिया। पंजाब और कोलकाता जैसी जगहों के विपरीत, जिन्हें उन्होंने प्रेरणादायक पाया, दिल्ली उनके लिए खास नहीं थी।
हालांकि, उनके बनाए एक स्केच में राजा हिंदू राव की तस्वीर दिल्ली से जुड़ाव का संकेत देती है, क्योंकि राजा ने रिटायरमेंट के बाद यहां बसने का फैसला किया था। लेकिन ईडन ने जगह का नाम स्पष्ट रूप से नहीं बताया, और दिल्ली के प्रति उनकी उदासीनता उनके सफर का एक खास पहलू है।
इसका महत्व
एमिली ईडन की कला 19वीं सदी के भारत पर एक दुर्लभ और व्यक्तिगत नजरिया देती है। उनकी पेंटिंग्स उस दौर के लोगों और राजनीति की जटिलताओं को दर्शाती हैं, जब भारत ब्रिटिश शासन के अहम दौर में था। उनकी कला न सिर्फ ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें लोगों पर फोकस है, जो उस समय की औपनिवेशिक कला में लैंडस्केप के प्रभुत्व से अलग है। दिल्ली में चल रही यह प्रदर्शनी उनकी विरासत और उन कहानियों को फिर से देखने का मौका देती है, जो लगभग 200 साल बाद भी प्रासंगिक हैं।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एमिली ईडन की कला प्रदर्शनी कब तक चलेगी?
यह प्रदर्शनी 1 अगस्त तक चलेगी।
इस प्रदर्शनी में क्या-क्या दिखाया जाएगा?
इसमें एमिली ईडन की करीब 30 हैंड-कलर्ड लिथोग्राफ्स और आर्काइव मटीरियल शामिल हैं।
एमिली ईडन ने भारत के किस हिस्से का सफर किया?
उन्होंने उत्तर भारत का सफर किया।
दिल्ली में एमिली ईडन ने कितने समय तक बिताया?
उन्होंने दिल्ली में सिर्फ एक हफ्ता बिताया।
प्रदर्शनी की क्यूरेटर कौन हैं?
प्रदर्शनी की क्यूरेटर मैरी एन प्रायर हैं।
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