मिजोरम में म्यांमार से आने वाले सिंथेटिक ड्रग्स ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
पिछले 3 साल में 4000 किलो ड्रग्स जब्त हुई है।
स्थानीय संगठन 'यंग मिजो एसोसिएशन' (वाईएमए) ने 'ऑपरेशन जेरिको' के तहत 5 लाख वॉलेंटियर्स के साथ इस समस्या से लड़ाई छेड़ी है।
मिजोरम में म्यांमार से आने वाले सिंथेटिक ड्रग्स ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
पिछले 3 साल में 4000 किलो ड्रग्स जब्त हुई है।
स्थानीय संगठन 'यंग मिजो एसोसिएशन' (वाईएमए) ने 'ऑपरेशन जेरिको' के तहत 5 लाख वॉलेंटियर्स के साथ इस समस्या से लड़ाई छेड़ी है।

YMA volunteers patrolling to combat drug trafficking in Mizo · NewsDarpan AI
मिजोरम में म्यांमार से आने वाले सिंथेटिक ड्रग्स ने राज्य में गंभीर संकट पैदा कर दिया है। म्यांमार की 500 किलोमीटर लंबी खुली सीमा से ड्रग्स की तस्करी हो रही है। पिछले 3 साल में करीब 4000 किलो ड्रग्स जब्त की गई है। इन ड्रग्स ने राज्य के सामाजिक ताने-बाने को बुरी तरह प्रभावित किया है। पिछले साल इनकी वजह से 118 लोगों की मौत हुई, जबकि इस साल अब तक 21 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
चंफाई जिला इस तस्करी का मुख्य कॉरिडोर है। यहां से ड्रग्स देश के अन्य हिस्सों और बांग्लादेश व अरब देशों तक पहुंचाई जा रही है। ड्रग्स की तस्करी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे वॉट्सएप, टेलीग्राम और फेसबुक के जरिए हो रही है। ड्रग्स सप्लाई के लिए 'आइस' और 'कैंडी' जैसे कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।
मिजोरम के लोग खुद इस समस्या से लड़ने के लिए आगे आए हैं। 'यंग मिजो एसोसिएशन' (वाईएमए) ने 5 लाख वॉलेंटियर्स के साथ 'ऑपरेशन जेरिको' शुरू किया है। वाईएमए के वॉलेंटियर्स पुलिस और नारकोटिक्स विभाग के साथ मिलकर संवेदनशील इलाकों में रेड कर रहे हैं। उनका काम पीड़ितों को बचाना और उन्हें नशामुक्ति केंद्र तक पहुंचाना है।
हालांकि, तस्करों ने अब मणिपुर रूट का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। पहले म्यांमार से मणिपुर में एंट्री होती है और वहां से ड्रग्स मिजोरम और दूसरे राज्यों तक पहुंचाई जा रही है।