डिडियर डेशैंप्स का 14 साल का कोचिंग सफर स्पेन से हार के साथ खत्म
डिडियर डेशैंप्स की टीम फिर स्पेन के सामने हारी, कोच का 14 साल का दौर खत्म फ्रांस के कोच डिडियर डेशैंप्स का कार्यकाल फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में स्पेन से हार के बाद दुखद नोट पर खत्म होने जा रहा
डिडियर डेशैंप्स की टीम फिर स्पेन के सामने हारी, कोच का 14 साल का दौर खत्म
फ्रांस के कोच डिडियर डेशैंप्स का कार्यकाल फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में स्पेन से हार के बाद दुखद नोट पर खत्म होने जा रहा है। हालांकि टीम तीसरे स्थान के लिए प्लेऑफ खेलेगी, लेकिन ये हार उनके 14 साल लंबे सफर का अंत दिखाती है। ये दौर उम्मीदों से भरा था, लेकिन आखिरकार उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया।
खोए हुए मौके की कहानी
डेशैंप्स ने फ्रांस की फुटबॉल की सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पीढ़ी को संभाला, जिसे क्लेयरफोंटेन अकादमी ने तैयार किया था। लेकिन उनके रिकॉर्ड में सिर्फ एक वर्ल्ड कप (2018), एक यूईएफए नेशन्स लीग ट्रॉफी और 2022 वर्ल्ड कप व यूरोपीय चैंपियनशिप में लगभग जीत शामिल है। ये सब उनकी टीम की क्षमता को देखते हुए कम ही लगता है।
स्पेन के खिलाफ तीन बार हार उनके कार्यकाल की बड़ी असफलता रही। हर बार उन्होंने अलग-अलग खिलाड़ियों को मैदान पर उतारा, लेकिन स्पेन को हराने का तरीका नहीं ढूंढ पाए। मंगलवार का सेमीफाइनल इस दर्दनाक कहानी का नया अध्याय था, जहां स्पेन फिर से फ्रांस के लिए मुश्किल साबित हुआ।
इंडिविजुअल ब्रिलियंस बनाम टीमवर्क
डेशैंप्स की रणनीति व्यक्तिगत प्रतिभा पर निर्भर रही। काइलियन एमबाप्पे, उस्मान डेम्बेले और माइकल ओलिसे जैसे खिलाड़ी मैदान पर चमके। एमबाप्पे का प्रभाव फुटबॉल से आगे बढ़कर फ्रांस की राजनीति तक पहुंच गया है। डेम्बेले, जो बैलन डी’ओर विजेता हैं, और ओलिसे, मिडफील्ड के मास्टर, ने पूरे टूर्नामेंट में अपना जलवा दिखाया।
वहीं, स्पेन की सफलता टीम वर्क पर आधारित रही। कोच लुईस डे ला फुएंते ने फैबियन रुइज़, डैनी ओल्मो और मिकेल मेरिनो जैसे खिलाड़ियों पर भरोसा किया, जो ज्यादा चमकदार नाम नहीं थे। उनके गोलकीपर उनाई सिमोन और मिडफील्ड के तालमेल ने फ्रांस की स्टार पावर को काबू में रखा और उन्हें पजेशन से दूर रखा।
रणनीतिक गलतियां और बदलते ट्रेंड
डेशैंप्स की रणनीति हाल के सालों में इंटरनेशनल फुटबॉल के बदलते ट्रेंड के साथ तालमेल नहीं बैठा पाई। स्पेन ने पजेशन पर कब्जा कर फ्रांस की व्यक्तिगत प्रतिभा पर निर्भरता को उजागर किया। सेमीफाइनल में स्पेन ने अपनी रणनीति को पूरी तरह लागू किया, फ्रांस के स्टार खिलाड़ियों को पास मिलने से रोका और उन्हें डिफेंसिव मोड में डाल दिया।
ये तरीका इंटरनेशनल फुटबॉल के बड़े बदलाव को दिखाता है, जहां स्पेन और अर्जेंटीना जैसी टीमवर्क वाली टीमें आगे बढ़ रही हैं, जबकि फ्रांस पीछे छूट गया है। डेशैंप्स का विश्वास कि उनकी टीम की व्यक्तिगत प्रतिभा ही काफी है, गलत साबित हुआ।
एक युग का दर्दनाक अंत
डेशैंप्स का कार्यकाल वादों से भरा था लेकिन पूरी तरह सफल नहीं हो पाया। फ्रांस की मौजूदा पीढ़ी, जो टैलेंट से भरी हुई है, अब हंगरी 1954 और नीदरलैंड्स 1974 जैसी महान लेकिन खिताब से वंचित टीमों की श्रेणी में शामिल हो गई है। डेशैंप्स के लिए ये दौर खत्म हो रहा है, और उन्हें अब ये सोचने का वक्त मिलेगा कि क्या हो सकता था, क्योंकि वो इंटरनेशनल फुटबॉल से विदा लेने की तैयारी कर रहे हैं।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
डिडियर डेशैंप्स का कोचिंग सफर कब खत्म हुआ?
डिडियर डेशैंप्स का कोचिंग सफर स्पेन के खिलाफ सेमीफाइनल में हार के बाद खत्म हुआ।
डेशैंप्स के कार्यकाल में फ्रांस ने कितने बड़े टूर्नामेंट जीते?
डेशैंप्स के कार्यकाल में फ्रांस ने एक वर्ल्ड कप (2018) और एक यूईएफए नेशन्स लीग ट्रॉफी जीती।
डेशैंप्स की रणनीति में क्या कमी रही?
डेशैंप्स की रणनीति व्यक्तिगत प्रतिभा पर निर्भर रही, जो हाल के इंटरनेशनल फुटबॉल के ट्रेंड के साथ मेल नहीं खाई।
स्पेन की सफलता का राज क्या था?
स्पेन की सफलता टीम वर्क पर आधारित रही, जिसमें खिलाड़ियों ने मिलकर खेला।
डेशैंप्स का कार्यकाल किस तरह का रहा?
डेशैंप्स का कार्यकाल वादों से भरा था लेकिन पूरी तरह सफल नहीं हो पाया।
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