कोयर बोर्ड आंध्र प्रदेश में 15 कोयर क्लस्टर बनाने की योजना बनाई
कोयर बोर्ड आंध्र प्रदेश में बनाएगा 15 कोयर क्लस्टर कोयर बोर्ड, जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के तहत आता है, ने आंध्र प्रदेश में 15 कोयर क्लस्टर बनाने की योजना का ऐलान किया है।
कोयर बोर्ड, जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के तहत आता है, ने आंध्र प्रदेश में 15 कोयर क्लस्टर बनाने की योजना का ऐलान किया है। कोयर बोर्ड की सचिव एम.एस. लक्ष्मी प्रिया ने गुरुवार को वर्चुअल तरीके से आयोजित 'कोनसीमा कोयर कॉन्क्लेव-2026' के उद्घाटन सत्र में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा जिले में कच्चे माल की भरपूर उपलब्धता है, जो यहां कोयर आधारित यूनिट्स की स्थापना को बढ़ावा दे सकती है।
कोनसीमा में कोयर सेक्टर के विकास पर जोर
दो दिन का यह कॉन्क्लेव शुक्रवार को अमलापुरम में खत्म हुआ। इसे MSME मंत्रालय, कोयर बोर्ड और हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट ने मिलकर आयोजित किया था। इसका मकसद गोदावरी क्षेत्र में कोयर सेक्टर के मौके तलाशना था। डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा जिले के कलेक्टर आर. महेश कुमार ने बताया कि अगले तीन महीने में जिले में 20 कोयर आधारित MSME यूनिट्स स्थापित करने के लिए एक्शन प्लान तैयार कर लिया गया है।
उद्यमियों और किसानों को मिलेगी मदद
इन योजनाओं को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने उद्यमियों, नारियल किसानों, सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स और किसान उत्पादक संगठनों को हर तरह की मदद देने की योजना बनाई है। इसमें टेक्नोलॉजी, मार्केटिंग और ब्रांडिंग में सहायता शामिल होगी। यह जानकारी महेश कुमार ने दी।
इसके अलावा, जॉइंट कलेक्टर वाइकोन निडिया देवी ने भरोसा दिलाया कि कोयर आधारित यूनिट्स शुरू करने के इच्छुक लोगों को स्किल डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी सपोर्ट दिया जाएगा। कॉन्क्लेव में स्थानीय कारीगरों और युवा उद्यमियों ने अपने कोयर प्रोडक्ट्स भी प्रदर्शित किए, जिससे जिले की इस सेक्टर में क्षमता को उजागर किया गया।
केरल के कोयर उद्योग से सीखने पर जोर
कॉन्क्लेव के दौरान केरल के कोयर उद्योग का अनुभव भी साझा किया गया। केरल के कोयर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के डायरेक्टर समीर कृष्णा ने राज्य के कोयर व्यापार और निर्यात में सफलता की जानकारी दी। उन्होंने आंध्र प्रदेश को इसे अपनाने के लिए एक रोडमैप भी सुझाया।
क्यों है ये अहम
आंध्र प्रदेश में कोयर क्लस्टर्स की स्थापना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार के नए मौके बनेंगे और टिकाऊ उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। कोनसीमा जिले के प्राकृतिक संसाधन और सरकार की मदद से यह क्षेत्र कोयर आधारित उद्यमों का हब बन सकता है।
स्रोत: The Hindu
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